विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: क्रिसमस-जीसेस क्राइस्ट पर बनी फिल्में
जीसेस क्राइस्ट और उनके जीवन पर कई फिल्में बनी हैं मगर जीसेस के मानवीय आयाम पर केंद्रित ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ सबसे हट कर बनी फ़िल्म है। इस गाथात्मक फ़िल्म का संगीत पीटर गैब्रियल ने दिया है, जो फ़िल्म के मूड को स्थापित करने में पूरी तरह सहायक है।
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क्रिसमस का मौसम आते ही केरोल, केक, और कार्ड्स की धूम मच जाती है। क्रिसमस मतलब जीसेस क्राइस्ट और उनसे जुड़ी बातें। उनके जन्म की कथा, उनके जादूई करिश्मों की गाथाएं, उनका मसीहा होना, उनका सूली पर चढ़ना और बहुत कुछ। बाइबिल के अलावा साहित्य और सिनेमा में हमें जीसेस क्राइस्ट को लेकर खूब सारी सामग्री प्राप्त होती है।
जब जीसेस क्राइस्ट की बात होती है, तो अनायास वर्जिन मेरी, जुडास, मेरी मैग्डलीन, लास्ट सपर भी चले आते हैं। जीसेस से जुड़ी यह सामग्री हमें तकरीबन सब देशों, सभी भाषाओं में मिलती है। इतनी कहानियां हैं कि सत्य और मिथक को अलगाना कठिन है। बाइबिल और गॉस्पल में काफ़ी कुछ निहित है मगर विभिन्न काल में अनेक रचनाकारों ने भी क्राइस्ट और उनके जीवन, उस काल पर बहुत कुछ लिखा है।
नोबेल पुरस्कृत पुर्तगाली उपन्यासकार होसे (जूजे) सारामागो ने ‘द गॉस्पल अकॉर्डिन्ग टू जीसेस क्राइस्ट’ (इंग्लिश 1994) लिखा तो खूब हंगामा हुआ। उन्होंने जीसेस के मन में उठने वाली शंकाओं और संशयों को शब्द दिए। अनीश्वरवादी, कम्युनिस्ट लेखक की जान पर बन आई। किताब प्रतिबंधित हो गई।
इसी तरह इसके काफी पहले 1955 में निकोस कजन्ज़ाकीस ने ग्रीक भाषा में ऐतिहासिक उपन्यास ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ लिखा जिसका इंग्लिश अनुवाद 1960 में प्रकाशित हुआ तो भूचाल आ गया। मनोवैज्ञानिक अध्ययनकर्ता फ़िलॉसफ़र कज़न्ज़ाकीस ने आलेखों के अलावा ‘ज़ोरबा द ग्रीक’, ‘फ़ाउस्ट’, ‘फ़्रीडम ओर डेथ’, ‘द ग्रीक पैशन’ जैसी सृजनात्मक कृतियां भी साहित्य को दीं। उनकी रचनाओं पर फिल्म भी बनी हैं।
जीसेस क्राइस्ट से जुड़ी फिल्मों की लंबी सूची है। अगर हम केवल इंग्लिश फिल्मों की ही बात करें तो ‘द गॉस्पल अकॉर्डिंग टू सेंट मैथ्यू’, द ग्रेटेस्ट स्टोरी एवेर टोल्ड’, ‘जीसेस क्राइस्ट सुपरस्टार’, ‘बेन-हर’, ‘द रोब’, ‘टेन कमांडमेंट्स’, ‘पॉल एपोस्टल ऑफ़ क्राइस्ट’, ‘एक्जोडस: गॉड्स एंड किंग्स’, ‘द बाइबिल द बिग्निंग’, ‘द पैशन ऑफ़ द क्राइस्ट’, ‘द मसीहा’, ‘जीसेस ऑफ़ नज़रेथ’, ‘द किंग ऑफ़ किंग्स’ ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’... लिस्ट खतम ही नहीं होती है।
द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ क्राइस्ट
मार्टिन स्कॉरसेसि ने निकोस कजन्ज़ाकीस की रचना ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ को इसी नाम से 1988 में फ़िल्म में रूपांतरित किया। हंगामा तो होना ही था। दर्शकों से अधिक समीक्षकों ने फिल्म की आलोचना की। निर्देशक को छिप कर रहना पड़ा। सुरक्षा की दृष्टि से छिपा कर केवल एक सिने-समीक्षक रोजर एबर्ट को निर्देशक के सानिध्य में फिल्म दिखाई गई और फ़िर रोजर एबर्ट ने उस पर लिखा।
प्रसिद्ध सिने-समीक्षक रोजर एबर्ट ने न केवल मार्टिन स्कॉरसेसि की फ़िल्म ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ पर लिखा वरन आगे चल कर उन्होंने मार्टिन और उनके काम पर पूरी किताब ‘स्कॉरसेसि बाई एबर्ट’ भी लिखी। सिने-प्रेमियों को यह किताब अवश्य पढ़नी चाहिए। चलिए एक बार फ़िर लौटते हैं, ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ फ़िल्म पर।
जीसेस क्राइस्ट पर करोड़ों लोगों की आस्था है। वे क्राइस्ट को ईश्वर का पुत्र मान कर पूजते हैं, उन्हें मसीहा कहते हैं। निकोस कजन्ज़ाकीस का ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ तथा मार्टिन स्कॉरसेसि की इसी नाम की फ़िल्म जीसेस क्राइस्ट के अंतर में भौतिक और आध्यात्मिक चलने वाली निरंतर लड़ाई का चित्रण है।
एक शब्दों में किताब के पन्नों पर, दूसरा चाक्षुष सिनेमा के परदे पर। उपन्यास की भूमिका से उठाए शब्दों, ‘दि इन्सेसंट, मर्सीलेस बैटल बिटवीन द स्पिरिट एंड द फ़्लेश’ को फ़िल्म के परदे पर भी उद्धृत किया गया है।
प्रसिद्ध मार्टिन स्कॉरसेसि ने इस फ़िल्म के अलावा ‘मीन स्ट्रीट’, ‘टैक्सी ड्राइवर’, ‘द लास्ट वाल्ट्ज़’, ‘रेजिंग बुल’, ‘ह्यूगो’, ‘द कलर ऑफ़ मनी’, ‘गुडफ़ेलाज’, ‘केप फ़ीयर’, ‘कैसिनो’, ‘दि एज ऑफ़ इनोसेंस’, ‘कुंदन’, ‘गैंग्स ऑफ़ न्यू यॉर्क’ जैसी तमाम फ़िल्में बनाई हैं। उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री बनाई हैं तथा पुरानी फ़िल्मों के सहेजने के अभियान में भी जुटे हुए हैं।
पौने तीन घंटे लंबी चमकदार फ़िल्म ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ का स्क्रीनप्ले पॉल श्रेडर ने तैयार किया है। जीसेस क्राइस्ट की भूमिका में अभिनेता विलियम डाफ़ो के अभिनय की तारीफ फ़िल्म के कटु आलोचकों ने भी है। एक आलोचक के अनुसार सटीक देहयष्टि के साथ जन्मे, रेशमी आवाज के धनी विलियम डाफ़ो ने अपनी अभिनय क्षमता का जम कर विकास किया है। इस फ़िल्म में वे दर्शकों को स्तंभित करते हैं।
इसी तरह वेश्या मेरी मैग्डलीन की भूमिका कर रही अभिनेत्री बारबरा हर्शे ने भी खूब प्रभावित किया है। जुडास की भूमिका कर रहे हर्वी काटेल का अभिनय भी सराहनीय है और जीसेस की मां मेरी के रूप में वर्ना ब्लूम भी जंचती हैं।
मार्टिन स्कॉरसेसि की फिल्मों को मिली सराहना
मार्टिन स्कॉरसेसि एक प्रतिबद्ध निर्देशक हैं और इसकी छाप उनकी इस फ़िल्म में देखी जा सकती है। यहां जीसेस अपनी नियति को लेकर संदेहग्रस्त हैं। उन्हें शंका है कि जो आवाजें उन्हें सुनाई देती हैं वे गॉड की हैं या शैतान की? वे अपनी कमजोरियों और कायरता से नफरत करते हैं। अपने प्रलोभन को लेकर वे शंकित हैं।
जीसेस खुद को खूब शारीरिक कष्ट देते हैं। उन्हें पवित्रता से अधिक भय सताता है। जीसेस के दारुण दु:ख-दर्द को फ़िल्म मूर्तिमान करती है। शीघ्र जीसेस को अपनी भूमिका का ज्ञान होता है और वे शिष्यों की एक टोली तैयार कर अपने काम में जुट जाते हैं। मगर स्व-संशय से लगातार जूझते भी रहते हैं।
फ़िल्म का प्रत्येक फ़्रेम दर्शक से गंभीरता की अपेक्षा करता है, परंतु इस फ़िल्म का अंतिम हिस्सा विशेष ध्यान की मांग करता है, जहां निर्देशक ने कल्पना का भरपूर सहारा लिया है। इस हिस्से में जीसेस अपने सर्वाधिक यंत्रणादायक कष्ट से गुजरते हैं।
जीसेस क्राइस्ट और उनके जीवन पर कई फिल्में बनी हैं मगर जीसेस के मानवीय आयाम पर केंद्रित ‘द लास्ट टेम्प्टेशन ऑफ़ क्राइस्ट’ सबसे हट कर बनी फ़िल्म है। इस गाथात्मक फ़िल्म का संगीत पीटर गैब्रियल ने दिया है, जो फ़िल्म के मूड को स्थापित करने में पूरी तरह सहायक है। गैर-परम्परावादी फिल्म का कैमरा निर्देशन माइकेल बालहाउस ने किया है। मार्टिन स्कॉरसेसि ने इस फ़िल्म को बना कर एक बहुत बड़ा जोखिम लिया है। अगर सृजनात्मक लोग जोखिम नहीं लेंगे तो कौन लेगा?
अंत में उनका जीसेस खुद को पवित्र करता है, रेगिस्तान में उसका रूपांतरण होता है। यहां जीसेस को एक मनुष्य के रूप में चित्रित किया गया है वह हममें से एक है, हमसे ऊपर नहीं, लेकिन वह हमसे ऊपर उठ जाता है। ऊपर उठ जाता है क्योंकि अपनी कमजोरियों को पहचान कर उन पर विजय प्राप्त करता है। क्या हममें से प्रत्येक में यह संभावना नहीं है? एक बार यह फ़िल्म देखिए और खुद को टटोलिए, तब फ़िल्म के विषय में कोई निर्णय लीजिए।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।