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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Second Innings: Don't panic if you've been defrauded; file a complaint as soon as possible.

दूसरी पारी: फ्रॉड हो गया, तो घबराएं नहीं; जल्द से जल्द शिकायत दर्ज कराएं

Fri, 21 Aug 2026 08:30 AM IST
Pavan अमर उजाला
अमर उजाला Published by: Pavan Updated Fri, 21 Aug 2026 08:30 AM IST
सार

सवाल यह नहीं कि फ्रॉड होता क्यों है, बल्कि यह है कि अगर ठगी हो ही जाए, तो क्या करें? ऐसे में जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाए, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ज्यादा होती है। साइबर ठगी का शिकार हुए मेरठ के 72 वर्षीय रमेश जी की चिंता दूर करते हुए विशेषज्ञ प्रीतेश मिश्रा ने उन्हें कुछ यों समझाया....

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Second Innings: Don't panic if you've been defrauded; file a complaint as soon as possible.
फ्रॉड हो गया, तो घबराएं नहीं - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

डिजिटल लेनदेन ने आम नागरिकों, खासकर बुजुर्गों की जिंदगी को काफी आसान बना दिया है। पेंशन, बैंकिंग, बिजली बिल, खरीदारी और पैसे भेजने जैसे काम अब घर बैठे मोबाइल से हो जाते हैं। लेकिन, इसी के साथ साइबर ठगी का खतरा भी बढ़ा है। एनसीआरबी और साइबर क्राइम पोर्टल के आंकड़ों पर गौर करें, तो रोज हजारों लोग ऑनलाइन धोखाधड़ी का शिकार हो रहे हैं, खासकर बुजुर्ग। ऐसे में, सवाल यह नहीं कि फ्रॉड होता क्यों है, बल्कि यह है कि यदि ठगी हो ही जाए, तो आगे क्या करें और क्या वाकई पैसे वापस मिलने की उम्मीद रहती है? याद रखें, ऐसे मामलों में सही ढंग से उठाया गया कदम पैसा वापस दिला सकता है, बशर्ते सही जानकारी हो।
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ठगी के संकेतों को पहचानें
ऐसे मामलों में सतर्क रहना चाहिए, जब कोई अनजान व्यक्ति पैसे भेजने या बैंक से जुड़ी जानकारी मांगने लगे। मसलन, नौकरी, इनाम, निवेश, बीमा, बिजली कनेक्शन या किसी सरकारी योजना के नाम पर रकम मांगी जाए। आपने पैसे भेज दिए, फिर भी आपसे कहा जाए कि रकम नहीं पहुंची और दोबारा भेजने का दबाव बनाया जाए। इसके अलावा, बैंक जैसा असली दिखने वाला फर्जी मैसेज भेजकर कोई आपसे कहे कि गलती से आपके खाते में पैसे आ गए हैं। हो सकता है ठग आपका कोई रिश्तेदार या परिचित बनकर  आपको फोन करे और तत्काल पैसे भेजने को कहे। कभी- कभी ठग बैंक अधिकारी, पुलिस, सीबीआई, आयकर विभाग या कोई सरकारी अधिकारी बनकर भी डराते-धमकाते हैं, ताकि आप पैसे भेज दें।  
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फ्रॉड होने पर सबसे पहले क्या करें
साइबर ठगी होने पर सबसे पहले अपने बैंक के आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर पर फोन करें और हुई धोखाधड़ी के बारे में बताएं। लेनदेन रोकने या रकम को सुरक्षित रखने के लिए बैंक से जरूरी कार्रवाई करने को कहें। नंबर बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या पासबुक जैसे किसी आधिकारिक दस्तावेज से ही लें। इसके बाद राष्ट्रीय साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 और फिर राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। बुजुर्गों के लिए बेहतर होगा कि वे यह प्रक्रिया किसी भरोसेमंद सदस्य की मदद से पूरी करें।
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अगर रिफंड का मैसेज आए, पर पैसे न मिलें तो?
कई बार रिफंड प्रोसेस होने का मैसेज तो मिल जाता है, पर बैंक खाते में पैसे नहीं पहुंचते। ऐसी स्थिति में एमआरएम पोर्टल (mrm-ncrp.mha.gov.in/public-info) पर जाकर इसकी रिपोर्ट दर्ज करें। इससे समस्या तेज गति से ट्रैक की जाती है और अटका हुआ रिफंड जल्दी खाते तक पहुंच जाता है। याद रखें, जितनी जल्दी शिकायत दर्ज कराई जाए, पैसे वापस मिलने की संभावना उतनी ही ज्यादा होती है। आज के डिजिटल दौर में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा है, लेकिन अगर सतर्कता के बावजूद फ्रॉड हो ही जाए, तो सही कदम उठाकर अपने पैसे वापस पाना नामुमकिन नहीं है।  - लेखक साइबर क्राइम इंटरवेंशन ऑफिसर और साइबर ट्रेनर हैं।


शिकायत के बाद क्या होता है?
शिकायत सबसे पहले आई4सी (इंडियन साइबर क्राइम) के पास जाती है। वहां से 12 से 24 घंटे के भीतर यह शिकायत आपके नजदीकी साइबर सेल को भेज दी जाती है। फिर... अगर ठग ने अब तक पैसे उस अकाउंट से नहीं निकाले हैं, तो साइबर सेल तुरंत उस रकम को होल्ड करा देता है, जिससे ठग वह पैसा निकाल ही नहीं पाता। अगर पैसे पहले ही निकाले जा चुके हैं, तो शिकायत उस अकाउंट से जुड़े क्षेत्र के थाने भेजी जाती है, वहां से संबंधित व्यक्ति को ट्रेस कर पकड़ा जाता है और पैसे लौटाने के लिए कहा जाता है। अगर वह व्यक्ति पैसे वापस कर देता है, तो कुछ ही समय में वह रकम आपके खाते में वापस आ जाती है।अगर उसके पास तुरंत पैसे नहीं हैं, या मामले में और लोग भी शामिल हैं, तो जांच आगे बढ़ती है और दोषी को रकम लौटाने के लिए समय दिया जाता है। उस पर कानूनी कार्रवाई भी होती है। कई बार पूरा पैसा वापस मिलता है, तो कई बार आंशिक रकम पर सेटलमेंट होता है। यह पूरी तरह मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है, लेकिन एक बात तय है कि सही प्रक्रिया अपनाने वालों के पैसे वापस मिलने की
संभावना काफी बढ़ जाती है। इस पूरी प्रक्रिया की जानकारी शिकायतकर्ता को समय-समय पर मैसेज या कॉल के जरिये दी जाती है।  

जिंदगी की दूसरी पारी बहुत महत्वपूर्ण होती है। आप अपने विचार, अनुभव या समस्याएं edit@amarujala.com पर भेज सकते हैं।
 
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