विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: सबसे पसंदीदा और शिखर पर रहने वाली 100 फिल्में
यह वर्ष स्त्रियों के नाम रहा है। गीतांजलि श्री को इंटरनेशनल बुकर, एनी अर्नो को साहित्य का नोबेल पुरस्कार और अब ‘साइट एंड साउंड’ 100 श्रेष्ठ फ़िल्मों की सूची में सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म है। 1975 में बनी ‘जीन डिएलमैन, 23 के डु कॉमर्स, 1080 ब्रसल्स’ फ़िल्म और इस तरह 70 साल में पहली बार एक स्त्री सिने-निर्देशक फ़्रांसीसी शान्टाल अकरमैन (1950-2015) सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पद पर शोभायमान हुई हैं।
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प्रत्येक सिने-प्रेमी की मनपसंद फ़िल्मों की एक सूची होती है, आवश्यक नहीं की दूसरों की पसंद भी वही हो। साथ ही कुछ फ़िल्में ऐसी भी हैं जो सब काल में अधिकांश लोगों को पसंद आई हैं। ब्रिटेन की एक फ़िल्म पत्रिका ‘साइट एंड साउंड’ 1952 से प्रत्येक दस वर्ष पर सब समय की श्रेष्ठ फ़िल्मों की सूची निकालती है। यह सूची 1600 सम्मानित सिने-समीक्षक तथा सिने-इतिहासकारों के मत गणना के आधार पर तैयार की जाती है। उन्होंने हाल में 2022 के अपनी सूची जारी की है।
प्रकाश और छाया के अदभुत संयोग और प्रयोग से जादू रचने वाले, अनेक उपलब्धियां-बहुआयामी के स्वामी ऑर्सन वेल्स की ‘सिटीजन केन’ 1962 से इस सूची के शीर्ष पर रही है।
डेविड थॉमसन टॉप फ़िल्म के शिखर पर रहने की कहानी को बताते हुए कहता है कि चीजें जैसी हैं, मुझे नहीं लगता है कि ‘सिटीजन केन’ को कोई चोटी से हटा सकता है। यह फ़िल्म 1972, 1972, 1982, 1992 और 2002 में यानि 50 साल के लंबे समय से चोटी पर रही है।
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आगे थॉमसन कहता है, 2012 में हिचकॉक की ‘वर्टिगो’ के लिए इसे अपना यह सर्वोच्च स्थान छोड़ना पड़ा। मगर आधी सदी यह सबसे ऊंचे स्थान पर रहने वाली फ़िल्म है, भविष्य में शायद ही यह रिकॉर्ड टूटे। मगर इस साल यह रिकॉर्ड टूट गया। इस वर्ष की सूची में प्रथम स्थान पर न ‘सिटिजन केन’ है और न ही हिचकॉक की ‘वर्टिगो’ है।
यह वर्ष स्त्रियों के नाम रहा है। गीतांजलि श्री को इंटरनेशनल बुकर, एनी अर्नो को साहित्य का नोबेल पुरस्कार और अब ‘साइट एंड साउंड’ की 100 श्रेष्ठ फ़िल्मों की सूची में सर्वश्रेष्ठ फ़िल्म है। 1975 में बनी ‘जीन डिएलमैन, 23 के डु कॉमर्स, 1080 ब्रसल्स’ फ़िल्म और इस तरह 70 साल में पहली बार एक स्त्री सिने-निर्देशक फ़्रांसीसी शान्टाल अकरमैन (1950-2015) सर्वश्रेष्ठ निर्देशक के पद पर शोभायमान हुई हैं।
‘वर्टिगो’ दूसरे नंबर पर और ‘सिटिजन केन एक पायदान और नीचे उतर कर तीसरे स्थान पर है। यहूदी शान्टाल अकरमैन निर्देशक के साथ-साथ स्क्रीनप्ले राइटर, अर्टिस्ट और फ़िल्म-शिक्षिका भी थीं।
‘सिटिजन केन’
चलिए 50 साल तक नंबर वन फ़िल्म ‘सिटिजन केन’ के विषय में कुछ रोचक बातें जान ली जाए। निर्देशक ऑर्सन वेल्स और उसकी प्रसिद्ध ‘सिटिज़न केन’ के इतने मिथक फैले हुए हैं कि सच्चाई खोजना तनिक कठिन है। फ़िल्म ‘रोजबड’ की गुत्थी सुलझाने के क्रम में पूरी कहानी कह डाली जाती है। फ़िल्म में प्रयोग की गई इसी फ़िसलपट्टी ‘रोजबड’ की 1982 में नीलामी हुई, जिसे एक अन्य बहुप्रसिद्ध फ़िल्म निर्देशक स्टीवन स्पीयलबर्ग ने खरीदा।
कुछ साल बाद उन्हें लगा कि यह आमजन के देखने के लिए प्रदर्शित होनी चाहिए, अत: उन्होंने इसे अकादमी म्युजियम को दान कर दिया। वेल्स ने जब फ़िल्म ‘सिटिजन केन’ बनाई उसे फ़िल्म निर्माण का कोई अनुभव नहीं था। केवल अपने आत्मविश्वास के बल पर उसने यह काम स्वीकारा था।
अपने अंतिम दिनों में निर्देशक ऑर्सन वेल्स कडुआहट और नि:संग भाव के मिश्रण के साथ अक्सर कहता था, ‘ओ गॉड, जब मैं मर जाऊंगा तब वे मुझे प्यार करेंगे।’ उसने इसके बारे में अपने दोस्त और फ़िल्म निर्देशक हेनरी जगलोम से कहा था कि बस मेरे मरने का इंतजार करो। सब कुछ होगा। जिस कहानी से मेरा जरा-सा भी संबंध है, उसे वे खोद निकालेंगे। मेरे जीवन के बारे में कहानियाँ गढ़ेंगे। यह सब बिकाऊ होगा।
महानता के साथ मिथक जुड़ जाते हैं, और ऐसा ही हुआ भी। वैसे उसके जीवित रहते भी उसे प्यार करने वालों की, उसकी और उसके काम की प्रशंसा करने वालों की कमी न थी। पर उसके विरोधी और कटु आलोचकों की फ़ौज भी थी। जीते जी उसकी उतनी कद्र न हुई, उसके जाने पर उसके साथ ‘टच ऑफ़ एविल’ में काम करने वाली अभिनेत्री जेनेट लीग ने कहा, काश! हमने ऑर्सन के जीनियस का और अधिक उपयोग किया होता।
एक्टर-डॉयरेक्टर जॉन हस्टन का कहना कितना सटीक है, ‘हॉलीवुड कम्युनिटी के लिए यह कोई सम्मान की बात नहीं है कि इसने उसकी प्रतिभा का बेहतर उपयोग नहीं किया।’
ऑर्सन वेल्स की फिल्में
अपनी फ़िल्मों के अलावा ऑर्सन वेल्स ने ‘द स्पेनिश अर्थ’, ‘स्विस फ़ैमिली रॉबिंसन’, ‘जर्नी इनटू फ़ीयर’, ‘जेन एयर’, ‘फ़ॉलो द ब्यॉज’, ‘टुमारो इज़ फ़ॉर एवर’, ब्लैक मैजिक’, ‘द थर्ड मैन’, ‘प्रिंस ऑफ़ फ़ॉक्सेस’, ‘द ब्लैक रोज’, ‘किंग लियर’, ‘ट्रबल इन द ग्लेन’, ‘थ्री केसेस ऑफ़ मर्डर’, ‘नेपोलियन’, ‘मोबी डिक’ के अलावा अन्य तमाम फ़िल्मों (एक सूत्र के अनुसार उसने कुल 61 फ़िल्मों में काम किया था।) में अभिनय भी किया।
ऑर्सन वेल्स ने 1941 में ‘सिटिजन केन’ बनाई। वह इस फ़िल्म का निर्देशक, प्रड्यूसर, सह-लेखक, एडीटर और प्रमुख अभिनेता सब कुछ है। वेल्स ने छाया के संयोजन, संगीत, सेट, ड्रेस, कलाकारों के चुनाव, कैमरा एंगल्स, अभिनय के बेहतरीन चुनाव से एक कालजयी फ़िल्म का निर्माण किया है। तमाम अड़चनों के बावजूद फ़िल्म ने 11 पुरस्कार जीते, जिसमें एक ऑस्कर भी शामिल है। इसका एक दृश्य फ़िल्मांकन का नायाब नमूना है।
शुरुआती सफ़लता के दिनों में केन अमेरिका के राष्ट्रपति की भतीजी एमिली नोर्टन से विवाह करता है। उनका यह विवाह कुछ सालों के लिए ही रहता है। इन कुछ सालों में क्या कुछ बदलता है, दोनों के रिश्तों की पूरी कहानी का फ़िल्मांकन अपनी विशेषता के लिए सिनेमा के इतिहास में सदा के लिए दर्ज है। गजब का मोंटेज है इस दृश्य में। दोनों ब्रेकफ़ास्ट टेबल पर बैठे हैं, वक्त के साथ उनका रूप-रंग, व्यवहार, भाषा-बोली-बानी सब बदलती जाती है। बड़ी तेजी से सब कुछ घटित होता है।
मेकअप मैन मॉरिस सैडरमैन के मेकअप का कमाल है कि बारह-सोलह साल के लंबे समय को हर दो साल के एक शॉट में समेटा गया है। मजे की बात है मॉरिस सैडरमैन मेकअप विभाग का प्रमुख न हो कर मात्र एक अपरेंटिस था। विशेष बात है कि इस पूरे दृश्य का फ़िल्मांकन मात्र एक दिन में हुआ था। आसान नहीं है हर दो साल में हुए व्यक्तित्व और वेशभूषा को भिन्न रूप में दर्शाना।
हर बार दोनों पात्रों का मेकअप और ड्रेस बदल जाता है, मुद्रा बदल जाती है, पर लोकेशन वही डायनिंग टेबल रहता है। समय और स्थान को संपादन की कुशलता से साधा गया है। पूरा-का-पूरा दृश्य केवल दो मिनट में समेटा गया है।
दशक की शीर्ष फ़िल्म ‘जीन डिएलमैन, 23 के डु कॉमर्स, 1080 ब्रसल्स’ के अलावा सूची में छठवें नंबर पर ‘2001: ए स्पेस ओडिसी है, दसवें नंबर पर 1952 में बनी ‘सिंगिंग इन द रेन’ है। हां, भारत से एकमात्र फ़िल्म सूचि में है, आपका अनुमान ठीक है, ‘पथेर पांचाली’ पैंतीसवें नंबर पर है और 41वें पायदान के लिए दो नाम में टाई हुई और फ़िल्में हैं, ‘बाइसिकल थीव्स’ तथा राशोमोन’।
95वें नंबर के लिए पांच फ़िल्मों में टाई हुई और इस तरह सौंवे नंबर पर 2017 की फ़िल्म ‘गेट आउट’ दूसरी तमाम फ़िल्मों को गेट आउट करती हुई यह सूची पूरी होती है।
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