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फिल्मों-उपन्यास की जादुई दुनिया: आना कैरेनीना- कई रंग, कई रूप

Sun, 27 Nov 2022 04:26 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Sun, 27 Nov 2022 04:26 PM IST
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world cinema history, Anna Karenina Novel by Leo Tolstoy
आना कैरेनीना किताब - फोटो : istock

लियो निकोलाईविच टॉल्सटॉय ने चार वर्षों (1873-1877) की कड़ी मेहनत से एक कालजई उपन्यास ‘आना कैरेनीना’ रचना की। हालांकि कहना मुश्किल है इस महान लेखक को ‘वार एंड पीस’ के लिए अधिक जाना जाता है अथवा ‘आना कैरेनीना’ के लिए। लियो टॉल्सटॉय की अमर कृति ‘आना कैरेनीना’! करीब डेढ़ सौ साल से जीवन की गुत्थियों को समेटे उच्च सिंहासन पर बैठी नायिका आना कैरेनीना उपन्यासकारों, नाटककारों और फ़िल्म निर्देशकों के लिए चुनौती और प्रेरणा बनी हुई है।

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टॉल्सटॉय की यह दूसरी महत्वपूर्ण कृति है। इसमें शक नहीं कि आना विश्व साहित्य की एक सर्वश्रेष्ठ नायिका है। साहित्य में आना कैरेनीना, हेस्टर प्रिन (नैथेनियल हॉथर्न के ‘स्कारलेट लेटर’ की नायिका) तथा एम्मा (फ़्लॉबेयर के ‘मैडम बोवेरी’) जेन एयर (शॉर्लिट ब्रोन्टी के ‘जेन एयर’ की नायिका) तथा लीसा (स्टीफ़न स्वाइग के ‘लेटर फ़्रॉम एन अन्नोन वूम” की नायिका) को समकोटि की उच्च नायिकाओं का स्थान प्राप्त है। ये सब-की-सब त्रासद नायिकाएं हैं।

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जब आना पीरो ने आत्महत्या की थी संयोग से टॉल्सटॉय वहां उपस्थित थे। इस घटना का उन पर बड़ा गहरा प्रभाव हुआ। पापजन्य, प्रताणित और भयंकर घटना से वे हिल गए। उन्हें इस स्त्री का चेहरा बेढ़ंगा दिखाई देता था, लेकिन उसके होंठ लाल थे और उनमें एक रहस्यमय हंसी अटकी हुई थी। उनकी नायिका आना का अंत भी अत्यंत भयंकर है। उनकी आना मिथ्याभिमानी समाज की उपज है, उसके निश्छल और खुले प्रेम को बंद समाज सहन/स्वीकार नहीं कर पाता है।

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प्रेम के अपराधबोध और जबरदस्ती अपने प्राणप्रिय बेटे से अलग हो कर वह अपना जीवन समाप्त करती है। आज भी समाज अपनी सोच में बहुत बदला नहीं है। आना कैरेनीना गुजरे जमाने की औरत होते हुए भी अत्याधुनिक है, समकालीन है।

टॉल्सटॉय की उपन्यास ‘आना  कैरेनीना’

तीन विवाहित जोड़ियों के जीवन का विश्लेषण है, टॉल्सटॉय का उपन्यास ‘आना  कैरेनीना’। एक नीरस नौकरशाह कैरेनीन से आना की शादी हुई है। पर एक युवा सेना अधिकारी व्रॉन्स्की से उसका उद्धत प्रेम है। दूसरी ओर स्थाई और प्रसन्न वैवाहिक जीवन बिता रहे लेविन और किटी हैं। तीसरा परिवार आना के भाई स्टीवा और किटी की बहन डॉली का है। यह परिवार बिखरता-बचता, हिलता-सम्भलता चल रहा है।

उपन्यास की जटिल संरचना जीवन की जटिलता को समेटे हुए है। इस बड़ी रचना में कई पात्र हैं, कई जोड़ियां हैं, कई विभिन्न स्वभाव के लोग हैं, रूस का तत्कालीन समाज है और है रूसी समाज के नागरिक और ग्रामीण जीवन का चित्रण। आठ चैप्टर में विभाजित ‘आना कैरेनीना’ अद्भुत कालजयी रचना है। 

रूसी कृति होते हुए भी ‘टाइम’ पत्रिका ने इसे कभी भी लिखे उपन्यासों में महानतम नहीं माना है। इस पर चकित होते हुए कई बड़े रचनाकारों जैसे फ़ियोडोर दोस्तोवस्की, वाल्दीमीर नाबोकोव, विलियम फ़ॉक्नर आदि ने अपने-अपने विचार रखे हैं। आत्महत्या से पहले आना पीरो बोवा ने अपने पत्र में पति के लिए लिखा-

‘तुम ही मेरे वास्तविक हत्यारे हो। यदि खून करने वाले किसी व्यक्ति को वास्तविक शांति मिलती होती होगी, तो तुम भी सुखी और संतुष्ट रहना।’


बताने की जरूरत नहीं कि कितना व्यंग्य, कितनी वेदना, कितनी असंतुष्टि, कितनी कटोक्ति छिपी है, इस टिप्पणी में। इस अवसादग्रस्त स्त्री पर काम करते हुए स्वयं टॉल्सटॉय बार-बार अवसाद के शिकार हुए थे। साहित्य सहारा और मुक्ति देता है। इस रचना के प्रकाशन के बाद टॉल्सटॉय ने खुद को मुक्त अनुभव किया और कहा कि उन्होंने ‘आना कैरेनीना’ में सब कुछ लिख दिया और कुछ नहीं बचा था। 

उपन्यास पर कई भाषाओं में बनी फिल्में

900 पन्नों की कहानी को कुछ घंटों की फ़िल्म में समेट पाना नामुमकिन है। इसके बावजूद इन डेढ़ सौ सालों में इस उपन्यास पर करीब 27 फ़िल्में बन चुकी हैं। इनमें से कई आज उपलब्ध नहीं हैं। इस उपन्यास पर कई भाषाओं में कई देशों में फ़िल्म बनी है।

मोरिस एंड्रे मैत्रे, बेट्टी नैनसेन (मूक), एडमंड गौल्डिंग (मूक तथा दो अंत वाली), क्लैरेंस ब्राउन, तातीयाना लुकाशेविच, एज़ेल डाने ज़ुल्फ़ीकर, एलेक्जेंडर ज़ार्खी, जूलिएन डुविविएर (श्वेत-श्याम) जैसे तमाम सिने-निर्देशकों ने इस पर अपना हाथ आजमाया है। यदि इस पर 2012 में बनी निर्देशक जो राइट की फ़िल्म नहीं देखी है तो सिने-भाषा की एक फ़िल्म से आप वंचित हैं।


इस फ़िल्म का स्क्रीनप्ले प्रसिद्ध नाटककार टॉम स्टॉपर्ड ने लिखा है। निर्देशक जो राइट ने खूबसूरत अभिनेत्री कैरा नाइटली (आना) प्रसिद्ध अभिनेता जूड लॉ (कैरेनीन) तथा ऐरॉन टेलर-जॉन्सन (व्रॉन्स्की) को लेकर यह फ़िल्म बनाई है।

पादरी जैसा दिखता पति कैरेनीन पत्नी को बहुत प्रेम करता है, परंतु दूर से, रूखे-सूखे तरीके से। स्त्री पति से सदा रोमांटिक प्रेम की अपेक्षा करती है। जब उसे व्रॉन्स्की से प्रेम मिलता है तो वह उसे छिपा नहीं पाती है। उसे झूठ बोलना नहीं आता है तथा सच कहने का खामियाजा वह भुगतती है।

पुरुष को कई औरतों से संबंध बनाने के बाद भी उसे समाज से किसी प्रकार के विरोध का सामना नहीं करना पड़ता है, उसके सात खून माफ़ हैं। लेकिन स्त्री को समाज आज भी काठ की हांडी की तरह तौलता है। किसी स्त्री ने घर-परिवार के बाहर एक कदम निकाला नहीं कि पूरा समाज उसकी आलोचना, उससे नफ़रत करने को एकजुट हो जाता है। भौतिक प्रगति, संचार सुविधाओं, तकनीकी सहूलियतों और विज्ञान की उड़ान के बावजूद औरत के प्रति समाज का नजरिया अतीत से बंधा हुआ ज्यों-का-त्यों है।

मैथ्यू मैक्फ़ैडीन का संगीत और जो राइट की इस फ़िल्म के कोरियोग्राफ़र सिडि लार्बी चेर्कौयी इस फ़िल्म को ऑपेरा की श्रेणी में ला खड़ा करते हैं। नाटकीय अभिनय से भरपूर इस फ़िल्म की कुछ आउटडोर शूटिंग छोड़ कर तकरीबन सारी फ़िल्म स्टेज सेटिंग पर फ़िल्माई गई है। घुड़दौड़ की प्रतियोगिता का प्रमुख दृश्य भी स्टेज पर फ़िल्माया गया है। यह फ़िल्म तकनीकि का भरपूर उपयोग करती है। शैली के क्या कहने, प्रकाश-छाया,  कैमरे के एंग्ल्स, पल-पल बदलते सेट, परदा, पोशाक, जेवरात, फ़र्नीचर, स्केटिंग रिंग। 

ओह! क्या नहीं है यहां!  सब कुछ इतना चमकता हुआ, इतना आकर्षक है कि दर्शक इन सब में खो जाता है। यही इस जादुई प्रतीति देती फ़िल्म की ताकत है और यही इस फ़िल्म की सीमा भी। प्रसिद्ध अभिनेत्री कैरा नाइटली के विषय में निर्देशक जो राइट का कहना है कि कैरा नाइटली मजबूत और बहादुर है। उनमें तरह-तरह की भूमिका करने का साहस है।

वे आना कैरेनीना की आंतरिक संवेदनाओं-भावनाओं को उभारने में सफ़ल रही हैं। अगर आप बड़े परदे पर इस फ़िल्म को देखें तो चाक्षुष त्योहार मनाती 130 मिनट की यह फ़िल्म अपने आप में एक उत्सव में शरीक होने की अनुभूति देती है। यह दर्शक को अपने साथ बहा ले जाती है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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