World Cancer Day 2023: कैंसर की जंग में दवाओं के साथ लें अध्यात्म का सहारा
कैंसर एक ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही लोग जीने की इच्छा छोड़ देते हैं या इस बीमारी की जंग में अपनी हिम्मत हार बैठते हैं। कैंसर का असर जितना व्यक्ति के शरीर को कमजोर बनाता है उससे ज्यादा उसे मानसिक रूप से भी कमजोर बना देता है।
विस्तार
World Cancer Day 2023: आज के समय में दुनियाभर में लाखों लोग कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी से ग्रसित हैं। कैंसर ऐसी बीमारी है, जिसका नाम सुनकर ही लोग मन में डर बन जाता है, हम बीमारी की जंग में अपनी हिम्मत हार बैठते हैं। कैंसर का असर जितना व्यक्ति के शरीर को कमजोर बनाता है उससे कहीं ज्यादा उसे मानसिक रूप से भी कमजोर बना देता है।
कैंसर के मरीज को डिप्रेशन का शिकार होने में देर नहीं लगती। ऐसे में इस बीमारी से जंग जीतने के लिए फिजिकल रूप से इलाज (कीमोथेरेपी, मेडिसिन आदि) के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य का भी ध्यान रखना चाहिए। इस बीमारी के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए प्रतिवर्ष में 4 फरवरी को विश्व कैंसर दिवस मनाया जाता है।
इस बीमारी से जंग जीतने के लिए डॉक्टर और दवाईयां तो अपना काम कर ही रहे हैं, साथ ही आप घर पर कुछ आध्यात्मिक इलाज के जरिए भी लाभ प्राप्त कर सकते हैं।
आध्यात्मिक इलाज क्या है ?
इसे एक पारंपरिक उपचार प्रणाली के रूप में जाना जाता है, जो पूरे शरीर, मन और आत्मा में ऊर्जा के संतुलन और प्रवाह को पुनर्स्थापित करती है। जिस प्रकार दवाई हमारे शरीर के अंदर जाकर बीमारी को ठीक करती है, ठीक उसी प्रकार आध्यात्मिक इलाज हमारे मन को मजबूत बना कर किसी भी बीमारी से लड़ने की हिम्मत देता है।
अध्यात्म से व्यक्ति को आत्मविश्वास व मानसिक बल मिलता है। व्यक्ति चाहे कैसा भी जीवन जी रहा हो, मन अशांत, व्याकुल या अस्थिर हो उसे अध्यात्म का सहारा मिल जाए तो जीवन की यात्रा और सुगम व सरल हो जाती है।
आध्यात्मिक इलाज क्यों जरूरी है ?
सुख-दुख, विपदाएं, परेशानियां, कठिनाइयां और बीमारियों का सामना करते-करते व्यक्ति केअंदर से सकारात्मक ऊर्जा खत्म होने लगती है, जिस कारण व्यक्ति थक जाता है और अंदर से टूट जाता है। कभी-कभी आत्महत्या तक के कदम उठा लेता है। परन्तु जिस व्यक्ति के जीवन में अध्यात्म का सहारा हो उसे सकारात्मक ऊर्जा का बल प्राप्त होता है। अध्यात्म में वो शक्ति है, जो हारे हुए व्यक्ति के जीवन में नई ऊर्जा भर देता है।
अध्यात्म के बहुत सारे अंग हैं जैसे- योग, प्राणायाम, मंत्र साधना, ध्यान, आदि। इसके माध्यम से व्यक्ति अपने आप को भीतर से मजबूत बना सकता है। यही वजह है कि जो व्यक्ति अपने जीवन में अध्यात्म को अपना लेता है, वो संसार की हर परिस्थिति का डटकर सामना करता है। ऐसा व्यक्ति जीवन में कभी हार नहीं सकता।
आध्यात्मिक इलाज के प्रकार
मंत्र
मंत्र चिकित्सा में महामृत्युंजय मंत्र को बेहद चमत्कारी माना गया है। महामृत्युंजय मंत्र के जाप से कैंसर समेत कई बड़ी बीमारियों के ठीक होने की प्रामाणिक बातें सामने आ चुकी हैं। इसलिए कैंसर चाहे जिस भी स्टेज का हो बीमार व्यक्ति को डॉक्टरी इलाज के साथ ही महामृत्युंजय मंत्र का भी जाप करना चाहिए। यदि रोगी व्यक्ति खुद जाप नहीं कर सकता तो परिवार का कोई व्यक्ति उसके लिए मंत्र का जाप कर सकता है। मान्यता है कि ऐसा करने से कैंसर के जल्द सही होने की संभावना बढ़ जाती है। वहीं अगर कैंसर सही नहीं भी हो पाता है तो उसकी वजह से रोगी को तकलीफ कम होती है।
योग
योग से शरीर, मन और आत्मा को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। योग, तनाव और चिंता का प्रबंधन करने में भी सहायक है। यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है और मानसिक तनाव को दूर करता है। रोजाना 30 मिनट तक योग करके कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों के जोखिम को कम किया जा सकता है।
संगीत
कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी का नाम सुनते ही व्यक्ति डर जाता है और खुद को मानसिक रूप से कमजोर समझने लगता है। ऐसे में इलाज के साथ ही मरीज को म्यूजिक थेरेपी का सहारा लेना चाहिए। संगीत न सिर्फ तनाव कम करते हैं बल्कि भावनात्मक और आध्यात्मिक रूप से व्यक्ति की मदद कर सकते हैं।
सकारात्मक सोच
कैंसर की जंग में सकारात्मक सोच व्यक्ति का सबसे बड़ा हथियार हो सकता है। पूर्व क्रिकेट खिलाड़ी युवराज सिंह हों या कई बॉलीवुड सितारे, सबने अपनी सकारात्मक सोच के जरिए ही कैंसर पर विजय हासिल की है। सकारात्मक सोच वाले शरीर पर ही दवाइयां अपना असर दिखती हैं। इसलिए कभी भी व्यक्ति को हताश नहीं होना चाहिए।
रत्न
वैसे तो कैंसर के लिए धूम्रपान, रेडिएशन, वायरस, केमिकल, मोटापा आदि प्रमुख कारण होते हैं। लेकिन ज्योतिष में कुछ ग्रहों को भी कैंसर का कारक माना गया है। ऐसे में डॉक्टर से इलाज के साथ ही किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की भी सलाह लें। ज्योतिष में कई रत्नों को बेहद चमत्कारी माना जाता है, जो आसपास की नकारात्मक ऊर्जा को दूर करते हैं। इनसे बीमारियों से लड़ने में मदद भी मिलती है। दवाइयों के साथ ही किसी ज्योतिष विशेषज्ञ की सलाह पर रोगी को रत्न धारण करवा कर देखें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।