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दूसरा पहलू: अंटार्कटिका में वैज्ञानिकों का जमावड़ा क्यों है? अब अतीत की जलवायु को फिर से बनाने के लिए बर्फ...

Tue, 15 Apr 2025 06:39 AM IST
ज्योति भास्कर डेविड विलियम हेडिंग, द कन्वर्सेशन
डेविड विलियम हेडिंग, द कन्वर्सेशन Published by: ज्योति भास्कर Updated Tue, 15 Apr 2025 06:39 AM IST
सार

अंटार्कटिका महाद्वीप में इस समय करीब 30 देशों के शोध केंद्र हैं। मौजूदा शोध का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन है। यहां आम तौर पर इन्सान नहीं होते, इसलिए वैज्ञानिक प्राकृतिक प्रणालियों की प्रक्रियाओं व प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने में सक्षम होते हैं। अंटार्कटिका की सबसे बड़ी खोज 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिका सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों द्वारा ओजोन परत में छिद्र का पता लगाना था। दूसरा शोध अतीत की जलवायु को फिर से बनाने के लिए बर्फ के कोर का उपयोग करना रहा है।

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Why scientists gathering in Antarctica Now they are studying the ice to recreate the climate of past
अंटार्कटिक पर वैज्ञानिकों की नजरें - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

बीते माह मार्च के मध्य में अंटार्कटिका में दक्षिण अफ्रीका के अलग-थलग पड़े साने-IV बेस पर नौ शोधकर्ताओं में से एक के हिंसक होने की खबरें सुर्खियां बनी थीं। यहां सवाल यह उठता है कि इस बर्फीले महाद्वीप पर आखिर इतने वैज्ञानिकों का जमावड़ा क्यों है और वे क्या तलाश कर रहे हैं? अंटार्कटिका में अभी चल रहे शोध का मुख्य विषय जलवायु परिवर्तन पर केंद्रित है, क्योंकि यह सफेद महाद्वीप वैश्विक चक्रों में होने वाले परिवर्तनों के लिए एक अच्छा वायुदाबमापी है। यहां का वातावरण अनूठा है। यहां चरम जलवायु है, जो इसे वैश्विक जलवायु और वायुमंडलीय स्थितियों में किसी भी बदलाव के प्रति अत्यधिक संवेदनशील बनाती है। 

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एक और महत्वपूर्ण बात, अंटार्कटिका में आम तौर पर इन्सान नहीं होते, इसलिए वैज्ञानिक प्राकृतिक प्रणालियों की प्रक्रियाओं और प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करने में सक्षम होते हैं। शोध के लिए यहां भौगोलिक स्थिति काफी उपयुक्त है। इसका एक उदाहरण अंतरिक्ष मौसम (मुख्य रूप से सौर गतिविधि के कारण पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र में गड़बड़ी) पर काम है। दरअसल, पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र संचार प्लेटफॉर्म, तकनीक, बुनियादी ढांचे और यहां तक कि मानव स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकता है। अभी अंटार्कटिका में करीब 30 देशों के शोध केंद्र हैं।
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ये केंद्र शोधकर्ताओं के बड़े समुदाय की सेवा करते हैं, क्योंकि अंटार्कटिका में  कई अध्ययन स्थल अलग-थलग हैं, जहां रसद पहुंचाना एक चुनौती है। संसाधन आमतौर पर सीमित हैं। इनमें दक्षिण अफ्रीका के साने-IV बेस पर 10 से 12 शोधकर्ताओं के व्यक्तिगत बेस हैं। शोधकर्ता अंटार्कटिका में शीत और विकट जाड़े के दिनों में करीब 15 महीने तक रहते हैं।
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अंटार्कटिका की सबसे बड़ी खोज 1985 में ब्रिटिश अंटार्कटिका सर्वेक्षण के वैज्ञानिकों द्वारा ओजोन परत में छिद्र का पता लगाना था, जिसके कारण मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल पर अमल हुआ, जो चरणबद्ध तरीके से ओजोन को नष्ट करने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन को समाप्त करने के लिए की गई संधि है। इससे ओजोन परत को ठीक करने में सफलता मिली।


दूसरा सबसे महत्वपूर्ण शोध अतीत की जलवायु को फिर से बनाने के लिए बर्फ के कोर का उपयोग करना रहा है। बर्फ के कोर हवा के बुलबुले को संरक्षित करते हैं, जो समय के साथ वायुमंडल की स्थितियों के बारे में बहुत सारी जानकारी प्रदान करते हैं। अंटार्कटिका का अध्ययन जलवायु परिवर्तन के लिए अहम है। बर्फ पिघलने से समुद्र का जलस्तर बढ़ेगा, जो कि चिंता का विषय है। इसलिए इस संदर्भ में अंटार्कटिका पर हो रहे अध्ययन महत्वपूर्ण हैं।

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