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मशीन विवेक कहां से लाएगी? तकनीक आगे बढ़ेगी, पर फैसला इंसान ही करेगा
Sat, 07 Feb 2026 07:48 AM IST
देवेश त्रिपाठी
ब्लेयर एफ्रॉन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
ब्लेयर एफ्रॉन, द न्यूयॉर्क टाइम्स
Published by: देवेश त्रिपाठी
Updated Sat, 07 Feb 2026 07:48 AM IST
सार
विवेक एक ऐसा अद्वितीय मानवीय कौशल है, जिसका स्वचालन नहीं किया जा सकता, निकट भविष्य में तो बिल्कुल नहीं।
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कृत्रिम बुद्धिमत्ता
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
विस्तार
कॉलेज के दिनों में मुझे मध्यकालीन अध्ययन के एक सेमिनार में शामिल होने का अवसर मिला। विषय था-ब्रिटिश कॉमन लॉ की उत्पत्ति। वहां मैंने जाना कि 14वीं सदी के इंग्लैंड में न्यायाधीश किस तरह संपत्ति से जुड़े विवादों का निपटारा करते थे। जब गवाहों के बयान आपस में टकराते और दस्तावेज अधूरे या अस्पष्ट होते थे, तब न्यायाधीश अपनी तार्किक क्षमता और विवेक का इस्तेमाल करके निर्णय लेते थे। उस सेमिनार की सीख आज भी मेरे काम आती है। वह मुझे पढ़ने, शोध करने और विश्लेषण करने वाली गहरी शिक्षा की अहमियत की याद दिलाती है।
मेरी कॉलेज की शिक्षा ने मुझे यह नहीं सिखाया कि 'क्या सोचना है', बल्कि यह सिखाया कि 'कैसे सोचना है'। तकनीकी प्रभुत्व वाली इस दुनिया में रणनीतिक और वित्तीय फैसले लेते समय यही नजरिया सबसे ज्यादा कारगर साबित होता है। आज जितनी भी बोर्डरूम चर्चा होती है, हरेक के केंद्र में एआई होता ही है। निस्संदेह एआई परिवर्तनकारी साबित होगा। फिर भी, बहुत कुछ ऐसा भी है, जो बिल्कुल नहीं बदलेगा। उनमें सबसे प्रमुख है इन्सानी विवेक। विवेक से मेरा तात्पर्य है-परस्पर विरोधी मूल्यों और मतभेदों के बीच मध्यस्थता करने की क्षमता; उन पहलुओं पर विचार करने का हुनर, जो अपने आप में महत्वपूर्ण तो हैं, पर जिन्हें एकसाथ पूरा नहीं किया जा सकता; और श्रेष्ठ विकल्प तक पहुंचने के लिए कई रास्तों पर विचार करने का कौशल। यह एक अद्वितीय मानवीय कौशल है।
हाल ही में, मेरा एक ग्राहक अपने व्यवसाय का एक हिस्सा बेचना चाहता था। उसके सामने दो विकल्प थे-या तो उस तेजी से बढ़ने वाली इकाई को बेच दिया जाए, जो अस्थिर थी व मुख्य कारोबार का केंद्र नहीं थी, या फिर उस धीमी गति से बढ़ने वाली इकाई को बेचा जाए, जो कंपनी के उद्देश्य और मिशन से अधिक मेल खाती थी। एआई आधारित विश्लेषण ने धीमी वृद्धि वाले व्यवसाय को बेचने की सिफारिश की। लेकिन मानवीय विवेक ने दूसरा रास्ता दिखाया कि उतार-चढ़ाव वाली इकाई को बेचें और दूसरी को बेहतर बनाएं।
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हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि कौन-सा रास्ता सही साबित होगा, लेकिन मैं एआई के उत्तर की निश्चितता देखकर दंग रह गया। बेशक एआई पैटर्न पहचानने, कोड बनाने और भारी मात्रा में टेक्स्ट व डाटा को संकलित करने में सक्षम है। पर किसी को यह तय तो करना ही होता है कि विश्लेषण भरोसेमंद है या नहीं, उसके निहितार्थ क्या हैं और उस पर अमल करना समझदारी होगी या नहीं। यही वे जगहें हैं, जहां तकनीक नहीं, बल्कि मानव विवेक निर्णायक भूमिका निभाता है।
पिछले वर्ष एक बोर्ड यह जानना चाहता था कि उसे एक व्यावसायिक सौदे के लिए कितनी बोली लगानी चाहिए। एआई ने एक ऐसी राशि सुझाई, जो मुझे कम लगी। फिर चर्चा हुई कि क्या सौदे की कीमत अधिक रखनी पड़ेगी। जैसा कि अपेक्षित था, जब कंपनी ने एआई द्वारा सुझाई कीमत का प्रस्ताव दिया, तो उसे निरस्त कर दिया गया। बाद में, अधिक कीमत की पेशकश स्वीकार कर ली गई और सौदा सफल रहा। सौदे को लेकर एआई मानवीय पहलुओं को नहीं समझ सका, जिसे मानवीय निर्णय ने बखूबी समझा। इसी वजह से मुझे संदेह है कि एआई जल्द मानवीय पहलुओं की बराबरी लेगा।
उच्च शिक्षा और व्यवसाय में लोगों को विशेषज्ञता की तरफ धकेलने का चलन है। एआई इस दबाव को और बढ़ा देता है। आम सोच यह है कि अगर मशीनें सामान्य काम कर सकती हैं, तो इन्सानों को खास कामों पर ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि इसका उल्टा सच है। जैसे-जैसे नियमित विश्लेषण स्वचालित होता जाएगा, पेशेवरों को जो चीज अलग बनाएगी, वह होगी अलग-अलग क्षेत्र में चीजों को समझने की क्षमता, ऐसे पैटर्न देखना, जो विशेषज्ञ नहीं देख पाते, और सही फैसला लेना।
नियुक्ति करते समय व्यावसायिक नेतृत्वकर्ता ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जो विश्लेषण करने, खुद को बदलने, नए कौशल सीखने और नई जानकारियों से लैस होने में तेजी से सक्षम हों। सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से सोचते हैं, बिना किसी निर्देश का इंतजार किए अनिश्चितता के बीच रास्ता निकालते हैंैं। मशीन इन गुणों की नकल नहीं कर सकती। ऐसे उम्मीदवार एआई का इस्तेमाल एक उपकरण के रूप में करते हैं, बैसाखी के रूप में नहीं। बहुत पहले हुए उस मध्यकालीन कानून सेमिनार ने मुझे वित्त और अर्थशास्त्र के मेरे पाठ्यक्रम से ज्यादा इस दुनिया के लिए तैयार किया। जैसे सदियों पहले उन जजों ने सही-गलत की बहस के बीच फैसले दिए, जहां सबूत मिश्रित और अधूरे थे, वैसे ही आज पेशेवरों के पास ऐसा हुनर होना चाहिए कि वे उन जगहों पर चीजों को बेहतर बना सकें, जहां मशीनें काम नहीं कर सकतीं।
नैपकिन एआई
यह स्मार्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल है, जो साधारण टेक्स्ट को तुरंत प्रोफेशनल, कस्टमाइजेबल और देखने में आकर्षक डायग्राम और इन्फोग्राफिक्स में बदल देता है, जिन्हें प्रेजेंटेशन या डॉक्यूमेंट्स में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें उपयोगकर्ता को केवल अपना टेक्स्ट डालना होता है। इसके बाद यह एआई उस टेक्स्ट का विश्लेषण करता है और उपयुक्त आइकॉन, लेआउट और कनेक्टर्स सुझाता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो कम समय में प्रभावशाली विजुअल कंटेंट बनाना चाहते हैं। यह टूल उच्च गुणवत्ता के विजुअल्स कम समय में तैयार करने की सुविधा देता है।
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मेरी कॉलेज की शिक्षा ने मुझे यह नहीं सिखाया कि 'क्या सोचना है', बल्कि यह सिखाया कि 'कैसे सोचना है'। तकनीकी प्रभुत्व वाली इस दुनिया में रणनीतिक और वित्तीय फैसले लेते समय यही नजरिया सबसे ज्यादा कारगर साबित होता है। आज जितनी भी बोर्डरूम चर्चा होती है, हरेक के केंद्र में एआई होता ही है। निस्संदेह एआई परिवर्तनकारी साबित होगा। फिर भी, बहुत कुछ ऐसा भी है, जो बिल्कुल नहीं बदलेगा। उनमें सबसे प्रमुख है इन्सानी विवेक। विवेक से मेरा तात्पर्य है-परस्पर विरोधी मूल्यों और मतभेदों के बीच मध्यस्थता करने की क्षमता; उन पहलुओं पर विचार करने का हुनर, जो अपने आप में महत्वपूर्ण तो हैं, पर जिन्हें एकसाथ पूरा नहीं किया जा सकता; और श्रेष्ठ विकल्प तक पहुंचने के लिए कई रास्तों पर विचार करने का कौशल। यह एक अद्वितीय मानवीय कौशल है।
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हाल ही में, मेरा एक ग्राहक अपने व्यवसाय का एक हिस्सा बेचना चाहता था। उसके सामने दो विकल्प थे-या तो उस तेजी से बढ़ने वाली इकाई को बेच दिया जाए, जो अस्थिर थी व मुख्य कारोबार का केंद्र नहीं थी, या फिर उस धीमी गति से बढ़ने वाली इकाई को बेचा जाए, जो कंपनी के उद्देश्य और मिशन से अधिक मेल खाती थी। एआई आधारित विश्लेषण ने धीमी वृद्धि वाले व्यवसाय को बेचने की सिफारिश की। लेकिन मानवीय विवेक ने दूसरा रास्ता दिखाया कि उतार-चढ़ाव वाली इकाई को बेचें और दूसरी को बेहतर बनाएं।
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हालांकि, यह कहना जल्दबाजी होगी कि कौन-सा रास्ता सही साबित होगा, लेकिन मैं एआई के उत्तर की निश्चितता देखकर दंग रह गया। बेशक एआई पैटर्न पहचानने, कोड बनाने और भारी मात्रा में टेक्स्ट व डाटा को संकलित करने में सक्षम है। पर किसी को यह तय तो करना ही होता है कि विश्लेषण भरोसेमंद है या नहीं, उसके निहितार्थ क्या हैं और उस पर अमल करना समझदारी होगी या नहीं। यही वे जगहें हैं, जहां तकनीक नहीं, बल्कि मानव विवेक निर्णायक भूमिका निभाता है।
पिछले वर्ष एक बोर्ड यह जानना चाहता था कि उसे एक व्यावसायिक सौदे के लिए कितनी बोली लगानी चाहिए। एआई ने एक ऐसी राशि सुझाई, जो मुझे कम लगी। फिर चर्चा हुई कि क्या सौदे की कीमत अधिक रखनी पड़ेगी। जैसा कि अपेक्षित था, जब कंपनी ने एआई द्वारा सुझाई कीमत का प्रस्ताव दिया, तो उसे निरस्त कर दिया गया। बाद में, अधिक कीमत की पेशकश स्वीकार कर ली गई और सौदा सफल रहा। सौदे को लेकर एआई मानवीय पहलुओं को नहीं समझ सका, जिसे मानवीय निर्णय ने बखूबी समझा। इसी वजह से मुझे संदेह है कि एआई जल्द मानवीय पहलुओं की बराबरी लेगा।
उच्च शिक्षा और व्यवसाय में लोगों को विशेषज्ञता की तरफ धकेलने का चलन है। एआई इस दबाव को और बढ़ा देता है। आम सोच यह है कि अगर मशीनें सामान्य काम कर सकती हैं, तो इन्सानों को खास कामों पर ध्यान देना चाहिए। मेरा मानना है कि इसका उल्टा सच है। जैसे-जैसे नियमित विश्लेषण स्वचालित होता जाएगा, पेशेवरों को जो चीज अलग बनाएगी, वह होगी अलग-अलग क्षेत्र में चीजों को समझने की क्षमता, ऐसे पैटर्न देखना, जो विशेषज्ञ नहीं देख पाते, और सही फैसला लेना।
नियुक्ति करते समय व्यावसायिक नेतृत्वकर्ता ऐसे लोगों की तलाश करते हैं, जो विश्लेषण करने, खुद को बदलने, नए कौशल सीखने और नई जानकारियों से लैस होने में तेजी से सक्षम हों। सर्वश्रेष्ठ उम्मीदवार स्वतंत्र रूप से सोचते हैं, बिना किसी निर्देश का इंतजार किए अनिश्चितता के बीच रास्ता निकालते हैंैं। मशीन इन गुणों की नकल नहीं कर सकती। ऐसे उम्मीदवार एआई का इस्तेमाल एक उपकरण के रूप में करते हैं, बैसाखी के रूप में नहीं। बहुत पहले हुए उस मध्यकालीन कानून सेमिनार ने मुझे वित्त और अर्थशास्त्र के मेरे पाठ्यक्रम से ज्यादा इस दुनिया के लिए तैयार किया। जैसे सदियों पहले उन जजों ने सही-गलत की बहस के बीच फैसले दिए, जहां सबूत मिश्रित और अधूरे थे, वैसे ही आज पेशेवरों के पास ऐसा हुनर होना चाहिए कि वे उन जगहों पर चीजों को बेहतर बना सकें, जहां मशीनें काम नहीं कर सकतीं।
नैपकिन एआई
यह स्मार्ट आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल है, जो साधारण टेक्स्ट को तुरंत प्रोफेशनल, कस्टमाइजेबल और देखने में आकर्षक डायग्राम और इन्फोग्राफिक्स में बदल देता है, जिन्हें प्रेजेंटेशन या डॉक्यूमेंट्स में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें उपयोगकर्ता को केवल अपना टेक्स्ट डालना होता है। इसके बाद यह एआई उस टेक्स्ट का विश्लेषण करता है और उपयुक्त आइकॉन, लेआउट और कनेक्टर्स सुझाता है। यह खासतौर पर उन लोगों के लिए उपयोगी है, जो कम समय में प्रभावशाली विजुअल कंटेंट बनाना चाहते हैं। यह टूल उच्च गुणवत्ता के विजुअल्स कम समय में तैयार करने की सुविधा देता है।