जब नवंबर समेत 10 महीने ही होते थे एक साल में
नवंबर शब्द लैटिन भाषा के ‘‘नोवेम’’ से निकला है जिसका अर्थ ‘‘नाइन’’ या नौ होता है। मूल कैलेंडर केवल 304 दिन लंबा था। सर्दियों के महीनों में एक अंतर छोड़कर जब कृषि गतिविधियां न्यूनतम थीं।
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नवंबर का महीना एक खास महीना है, जिसने विश्व की उन महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को देखा है जिन्होंने राष्ट्रों और संस्कृतियों को आकार दिया है। यह महीना मूल रोमन कैलेंडर के 10 महीनों में से नवां महीना था जो बाद में 11वां महीना बना। भारत में यह महीना देश के 9 राज्यों का जन्मदाता है। इसी महीने नोबल पुरस्कार विजेता सीबी रमन, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभ भाई पटेल, लता मंगेशकर और आर.के. नारायण जैसी महान हस्तियों का जन्म हुआ था।
भारत में सर्वाधिक जनसंख्या द्वारा मानायी जाने वाली दीवाली सामान्यतः इसी महीने आती और देश के चार सर्वोच्च धामों में से एक बदरीनाथ के कपाट भी इसी महीने शीतकाल के लिए बंद होते हैं। नवंबर में राष्ट्रीय मधुमेह माह मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य इस दीर्घकालिक बीमारी के बारे में जागरूकता बढ़ाना और लोगों को शिक्षित करना है। भारत में नवंबर मानसून की विदाई और शीत ऋतु के आगमन के साथ ही दीवाली, छट और गुरु पर्व जैसे त्योहारों का महीना है।
नवंबर ग्यारहवां नहीं बल्कि नवां महीना होता था
नवंबर शब्द लैटिन भाषा के ‘‘नोवेम’’ से निकला है जिसका अर्थ ‘‘नाइन’’ या नौ होता है। मूल कैलेंडर केवल 304 दिन लंबा था। सर्दियों के महीनों में एक अंतर छोड़कर जब कृषि गतिविधियां न्यूनतम थीं। जनवरी और फरवरी को जोड़कर, कैलेंडर सौर वर्ष के साथ एडजस्ट करने का प्रयास किया गया।
दरअसल, ग्रेगोरियन कैलेंडर में जब मूल रूप से केवल 10 ही महीने थे तब उसमें नवंबर नवां महीना ही था। बाद में जब जनवरी और फरवरी को कैलेंडर में जोड़ा गया तो नवंबर ग्यारहवां महीना बन गया, लेकिन नाम वही रहा। यह नामकरण परंपरा रोमन कैलेंडर के इतिहास और समय के साथ इसके विकास को दर्शाता है।
महीनों के लिए लैटिन नामों का उपयोग कई भाषाओं में जारी रहा। विश्व के अधिकांश देशों की तरह भारत में भी सरकारी कामकाज के साथ ही आमतौर पर ग्रेगोरियन कैलेंडर ही व्यवहार में हैं और हिन्दू कलेंडर केवल त्योहारों और मुहूर्तों तक सीमित रह गया है।
ग्रेगोरियन कैलेंडर की शुरुआत पोप ग्रेगोरी अष्टम ने जूलियन कैलेंडर की अशुद्धियों में सुधार करने के लिये 1582 में की थी। इसमें सामान्यतः 365 और प्रत्येक चार साल बाद लीप इयर में 366 दिन होते हैं। ग्रेगोरियन कैलेंडर को सबसे पहले कैथोलिक देशों ने अपनाया था और धीरे-धीरे प्रोटेस्टेंट और ऑर्थोडॉक्स देशों ने भी इसे अपनाना शुरू किया जैसे ग्रेट ब्रिटेन और उसके उपनिवेशों ने इसे 1752 में अपनाया।
जनवरी और फरवरी बाद में जोड़े गये वर्ष में
ग्रेगोरियन कैलेंडर का उपयोग दुनियाभर के अधिकांश देशों द्वारा शासकीय उद्देश्यों के लिए किया जाता है। यह 150 से अधिक देशों में समय चक्र है। कुछ देशों में सांस्कृतिक या धार्मिक उद्देश्यों के लिए वैकल्पिक कैलेंडर हो सकते हैं। लेकिन इस कैलेंडर का उपयोग आमतौर पर शासकीय या प्रशासनिक मामलों के लिए किया जाता है। शुरू में 10 महीनों वाला रोमन कैलेंडर मार्च से शुरू होकर दिसंबर में समाप्त होता था।
जनवरी और फरवरी को उस समय के राजा नुमा पोम्पिलियस ने 713 ईसा पूर्व में रोमन कैलेंडर में जोड़ा था। नुमा ने कैलेंडर को चंद्र वर्ष के साथ अधिक निकटता से संरेखित करने के लिए जनवरी (रोमन ईश्वर जेनसके नाम पर ) और फरवरी (रोमन त्योहार फेब्रुआ के नाम पर) को जोड़ा गया।
जनवरी को सबसे पहले शुभारम्भ के देवता जेनस के सम्मान में रखा गया और फरवरी को आत्म शुद्धिकरण के महीने के रूप में जोड़ा गया। इस परिवर्तन ने 12 महीने के कैलेंडर की शुरुआत की जिसका हम आज उपयोग करते हैं और जो बाद में 46 ईसा पूर्व में जूलियस सीजर द्वारा पेश किए गए जूलियन कैलेंडर में विकसित हुआ।
इसमें हर चार साल में एक लीप वर्ष के साथ एक निश्चित 365-दिवसीय वर्ष शामिल था, जिसने जनवरी और फरवरी को पहले दो महीनों के रूप में स्थापित किया। 1582 में पोप ग्रेगरी द्वारा पेश किए गए ग्रेगोरियन कैलेंडर में प्राचीन कैलेंडर के मूल ढांचे को बनाए रखा।
अति महत्वपूर्ण वैश्विक घटनाओं का गवाह है नवंबर
विश्व स्तर पर भी नवंबर का महीना कई महत्वपूर्ण घटनाओं का गवाह रहा है। वैश्विक स्तर पर 1 नवंबर 1512 को माइकल एंजेलो द्वारा चित्रित सिस्टिन चैपल की छत का आधिकारिक तौर पर अनावरण किया गया था, जो पुनर्जागरण कला में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि को चिह्नित करता है। 2 नवंबर, 1947 को हॉवर्ड ह्यूजेस द्वारा डिजाइन की गई एक विशाल उड़ान नाव ’’स्प्रूस गूज’’ की पहली सफल परीक्षण उड़ान हुई।
यह विमानन में नवाचार का प्रतीक है। 9 नवंबर, 1989 को बर्लिन की दीवार गिर गई, जिससे जर्मनी के पुनर्मिलन और शीत युद्ध के अंत में एक महत्वपूर्ण क्षण को चिह्नित किया गया। 11 नवंबर, 1918 को प्रथम विश्व युद्ध आधिकारिक तौर पर आर्मिस्टिस के हस्ताक्षर के साथ समाप्त हुआ।
इस दिन को अब विभिन्न देशों में आर्मिस्टिस डे या वेटरन्स डे के रूप में याद किया जाता है। 22 नवंबर, 1963 को अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ। कैनेडी की हत्या डलास, टेक्सास में की गई एक ऐसी घटना थी जिसने अमेरिकी राजनीति और संस्कृति को काफी प्रभावित किया।
26 नवंबर, 1942 को पर्ल हार्बर में अमेरिकी नौसेना अड्डे पर जापानी हमला एक महत्वपूर्ण घटना थी, जो द्वितीय विश्व युद्ध में प्रवेश कर रही थी। 30 नवंबर, 1803 को संयुक्त राज्य अमेरिका ने औपचारिक रूप से फ्रांस से लुइसियाना क्षेत्र पर कब्जा कर अपने क्षेत्र का काफी विस्तार किया था।
भारत के 9 राज्यों का जन्म महीना है नवंबर
दीवाली और छट जैसे सर्वाधिक लोगों द्वारा मनाये जाने वाले त्योहारों के साथ ही नवंबर का महीना छत्तीसगढ़, उत्तराखण्ड और झारखण्ड के लोगों के दशकों से संजोये गये अलग प्रदेश के सपने के साकार करने का महीना भी है। वर्ष 2000 में इसी महीने की पहली तारीख को छत्तीसगढ़ भारतीय गणतंत्र को छब्बीसवां, 9 नवंबर को उत्तराखण्ड 27वां और 15 नवंबर को झारखण्ड 28वां राज्य बना था।
भारत के इतिहास में सम्पूर्ण नवंबर महीने से भी महत्वपूर्ण इस महीने की पहली तारीख है जिस दिन वर्षों पहले देश के विभिन्न राज्यों का भाषा के आधार पर पुनर्गठन करने का फैसला लिया गया था। साल 1956 से लेकर साल 2000 तक इसी दिन भारत के 6 अलग-अलग राज्यों का जन्म हुआ। सन् 1956 में नवंबर के महीने पहली तारीख को जन्में राज्यों में कर्नाटक, केरल, राजस्थान और मध्य प्रदेश शामिल हैं।
राज्य पुनर्गठन अधिनियम के तहत तमिलनाडु और कर्नाटक के क्षेत्र काट कर केरल राज्य बना। जबकि, 1 नवंबर को भाषा के आधार पर ही मैसूर का गठन किया गया जिसका 1973 में कर्नाटक नामकरण किया गया।
इसी तरह विभिन्न राजशाही वाली रियासतों को मिलाकर राजस्थान का गठन हुआ।पश्चिम बंगाल का नये क्षेत्रों के साथ पुनर्गठन भी 1 नवंबर 1956 को ही हुआ था। इनके अलावा इसी महीने की इसी तिथि को वर्ष 1966 में पंजाब और हरियाणा राज्य अलग-अलग अस्तित्व में आये थे।
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