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विरोध से पहले नागरिकता संशोधन कानून को समझना भी जरूरी

Fri, 20 Dec 2019 01:34 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Fri, 20 Dec 2019 01:34 PM IST
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what is Citizenship Amendment Act 2019 in hindi
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद ने किया विधेयक के समर्थन में प्रदर्शन - फोटो : अमर उजाला

नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 को लेकर सारा देश उबल रहा है। नागरिकों को अपने अधिकारों और संविधान के प्रति जागरूक होना जरूरी भी है, लेकिन किसी भीं प्रतिक्रिया से पहले वस्तुस्थिति की जानकारी उससे भी जरूरी है।

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दरअसल, भेड़चाल से न तो किसी पक्ष का और ना ही देश का भला होने वाला है। खासकर वैचारिक विरोध के लिए आपा खोकर सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना राष्ट्र के प्रति गैर जिम्मेदाराना व्यवहार है। यही नहीं क्रिया की प्रतिक्रिया में आन्दोलन को साम्प्रदायिक रंग देना राष्ट्रवाद नहीं बल्कि राष्ट्रविरोध है।
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संवैधानिकता पर सवाल
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 धर्म के आधार पर अवैध घुसपैठियों को उनकी भारत में घुसपैठ की तिथि से नागरिकता के लिए प्रावधान करने वाला कानून वर्तमान परिपेक्ष्य में गैर जरूरी तो है ही लेकिन इसकी संवैधानिकता पर भी गंभीर सवाल उठने स्वाभाविक है। इस कानून के कारण देश में ही नहीं विदेश में भी ऐसा संदेश जा रहा है मानों कि यह मौलिक अधिकार हनन करने वाला और भारत की सर्वधर्म समभाव की विश्व छवि को खराब करने वाला है।

कुल 6 धाराओं के इस कानून में धारा 2 से अवैध प्रवासी जिसे या घुसपैठिया की परिभाषा में स्पष्ट किया गया है कि 31 दिसम्बर 2014 से पूर्व भारत में प्रवेश करने वाले अफगानिस्तान, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान के हिन्दू, सिक्ख, बौद्ध, जैन, पारसी या ईसाई समुदाय के व्यक्तियों को अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। उल्लेखनीय है कि भारत में अवैध प्रवासी नागरिकता का पात्र नहीं है। लेकिन अब सभी गैर मुस्लिम घुसपैठिए नागरिकता के पात्र हो जाएंगे। 
 

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आखिर कितने फीसदी लोग इस कानून को ठीक से समझ पाएं हैं? - फोटो : अमर उजाला

क्या है नागरिकता संशोधन कानून?
नागरिकता संशोधन अधिनियम 2019 में कुल 6 धाराएं हैं। इस अधिनियम में अफगानिस्तान, बांग्लादेश तथा पाकिस्तान में इन नागरिकों पर उत्पीड़न तथा शरणार्थी होनेे  का कोई उल्लेख नहीं है। मूल नागरिकता अधिनियम 1955 की धारा 2(1) (ख) में अवैध प्रवासी की परिभाषा दी गई है, जिसे घुसपैठिया कहा जा सकता है।

समाज सेवी संस्था मौलाना अबुल कलाम आजाद अल्पसंख्यक कल्याण समिति के अध्यक्ष तथा कानून के जानकर एडवोकेट नदीम उद्दीन कहते हैं कि इस कानून में स्पष्ट किया गया हैै कि ऐसा व्यक्ति जो वैैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों के बिना भारत में प्रवेश करता है या वैध पासपोर्ट या अन्य यात्रा दस्तावेजों से प्रवेश करने वाला ऐसा व्यक्ति है जो दस्तावेजों में इजाजत की अवधि के बाद भी रह जाता है, शामिल है।

धारा 1 में नाम तथा विस्तार के बाद नए नागरिकता अधिनियम की धारा 2 से धारा 2(1) (ख) में परन्तु जोड़कर यह अपवाद जोड़ा गया है कि अफगानिस्तान, बांग्लादेश या पाकिस्तान के हिन्दू, सिख, बौद्ध, जैैन, पारसी या ईसाई समुदाय के ऐसे व्यक्ति जो 31 दिसम्बर 2014 को या उससे पूर्व भारत में प्रविष्ट हुआ और केन्द्र सरकार द्वारा पासपोर्ट तथा विदेशी विषयक अधिनियम से छूट दी गई है तो वह अवैध प्रवासी नहीं माना जाएगा। 


अवैध घुसपैठ हो जाएगी वैध
यद्यपि इस कानून से घुपैठियों को वैध करने का रास्ता तो खुल ही रहा है फिर भी, इसके लिए भी छूट वाले नियम एवं आदेश लागू करने होंगे तभी इसका लाभ मिलेगा। नए नागरिकता अधिनियम की धारा 3 से नई धारा 6ख जोड़ी गई है, जिससे उक्त व्यक्तियों द्वारा आवेदन करने पर देशीयकरण द्वारा नागरिकता के लिए प्रमाण पत्र सम्बन्धित अधिकारियों द्वारा प्रदान करने का प्रावधान किया गया है।

यह धारा पूर्वोतर के अनुसूची-6 और इनर लाइन वाले राज्यों पर नहीं लागू होगी। नए नागरिकता अधिनियम की धारा 6 से तीसरी अनुसूची में देशीयकरण से नागरिकता की उल्लेखित शर्तों में अफगानिस्तान, बांग्लादेश, पाकिस्तान के अवैध प्रवासियों के लिए छूट का प्रावधान जोेड़ा गया हैै, लेकिन इस छूट के अतिरिक्त शेष शर्तों का पालन उन्हें भी नागरिकता के लिए करना होगा। यद्यपि ऐसे नागरिकों को 11 वर्ष भारत में रहने की शर्त के स्थान पर पांच वर्ष का ही पालन करना होगा।
    

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इस अधिनियम में कहीं भी शरणार्थी तथा धर्म के आधार पर उत्पीड़न का उल्लेख नहीं किया गया है। - फोटो : Twitter

दोहरी नागरिकता समाप्त करने का प्रावधान
नए अधिनियम की धारा 4 से 7 घ नई उपधारा जोड़कर भारत के कार्ड धारक विदेशी नागरिकों की दोहरी नागरिकता समाप्त करने का प्रावधान शामिल किया गया है। यह नागरिकता 16 देशों को अनिवासी भारतीयोें को देने का प्रावधान है जिन्हें चुनाव और सरकारी नौैकरी सम्बन्धी अधिकार नहीं मिलते हैं। नए नागरिकता अधिनियम में धारा 5 से धारा 18(2) उपधारा जोड़कर रजिस्ट्रेशन एवं देशीयकरण प्रमाण पत्र की शर्तों व प्रक्रिया के नियम बनाने का प्रावधान किया गया हैै। 

धर्म के आधार पर उत्पीड़न का उल्लेख नहीं    
इस अधिनियम में कहीं भी शरणार्थी तथा धर्म के आधार पर उत्पीड़न का उल्लेख नहीं किया गया है, जैसा कि प्रचारित किया जा रहा है। यहां बता दें कि शरणार्थियों तथा वैध रूप से भारत में रह रहे विदेशियों के लिए पहले से ही नागरिकता का प्रावधान है, जिसके लिए इस कानून की आवश्यकता ही नहीं है। वैसे भी भी नागरिकता प्रदान करना एक निरन्तर प्रक्रिया है।

इस कानून से किसी भी व्यक्ति को स्वयं नागरिकता नहीं मिलेगी बल्कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान या बांग्लादेश का घुसपैठिया बताते हुए उसे आवेदन करना पड़ेगा तथा नागरिकता की शर्ते पूर्ण करने व उसका आवेदन अधिकारियों द्वारा स्वीकार करने पर ही नागरिकता मिलेगी।

इस कानून से पहले भी लंबी अवधि के वीजा धारक विभिन्न पात्र शरणार्थी अधिकारियों के नागरिकता के लिए चक्कर लगा रहे हें और उन्हें नागरिकता नहीं मिल पा रही है। अब इस लाइन में लाखों लोग और बढ़ जाएंगे। 

अल्पसंख्यकों पर अत्याचार बढ़ सकते हैं
इस कानून से 9 प्रतिशत से अधिक हिन्दू आबादी वाले बांग्लादेश, 2 प्रतिशत आबादी वाले पाकिस्तान तथा लगभग 1 प्रतिशत हिन्दू आबादी वाले अफगानिस्तान में हिन्दुओं का उत्पीड़न बढ़ सकता है और वहां के कट्टरवादी एवं अलगावादी लोग उन्हें भारत जाकर रहने को विवश कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त अन्य देशों में हिन्दुओं के प्रति उत्पीड़न व नफरत बढ़ने तथा भारत की धार्मिक सदभाव व प्रेम की संस्कृति तथा छवि पर प्रतिकूल असर पढ़ने की भी संभावनाएं रहेंगी।

हिंसा और तोड़फोड़ हो सकती है घातक
एक वर्ग विशेष के प्रति भेदभाव के बावजूद देश में लगभग सभी वर्गों का और खासकर बुद्धिजीवियों का इस आन्दोलन को व्यापक समर्थन मिल रहा है। इसी का नतीजा है कि 2014 तक देश में एनआरसी लागू करने की घोषणा करने वाली सरकार भी यह कहते हुए पीछे हट गई कि एनआरसी पर अभी कोई निर्णय ही नहीं हुआ। लेकिन साम्प्रदायिकता से ऊपर उठ चल रहे इस जनान्दोलन को तभी तक व्यापक समर्थन मिलेगा जब तक कि यह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक ढंग से चलेगा। वैसे भी असामाजिक तत्व इस जनजागरण को साम्प्रदायिक रंग देने पर तुले हुए हैं। तोड़फोड़ और हिंसा के नतीजे बहुत खतरनाक हो सकते हैं। 

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।            

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