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Lionel Messi India Tour: आखिर मैसी के भारत दौरे से किस चीज का प्रमोशन हुआ?

Wed, 17 Dec 2025 03:32 PM IST
Ajay Bokil अजय बोकिल
Updated Wed, 17 Dec 2025 03:32 PM IST
सार

Lionel Messi: भारत में मैसी ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर और भारतीय फुटबाॅल खिलाड़ी सुनील छेत्री से भी मिले। दौरे के आखिर में वो जामनगर में अंबानी के निजी चिड़ियाघर वनतारा भी गए और वन्य प्राणियों को देखा।

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What exactly was promoted by Messi's visit to India? Lionel Messi India tour
मैसी के भारत दौरे से आखिर किस चीज का प्रमोशन हुआ? - फोटो : PTI

विस्तार

अर्जेंटीना के दिग्गज फुटबॉल खिलाड़ी लियोनेल मैसी के ताजा भारत दौरे और उन्हें देखने के लिए जुटी भारतीयों की भीड़ से इतना ही साबित हुआ कि दुनिया के लिए हम भारतीयों का मतलब सच्चे खेल प्रशंसक से ज्यादा एक भीड़ है और भारत एक विशाल बाजार है, जिसका जो जब चाहे, जैसा चाहे दोहन कर सकता है। हम भी मैसी जैसे वर्ल्ड क्लास खिलाड़ी तैयार करने की जगह विदेशी खिलाडि़यों की आरती उतारकर ही खुश हैं।

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भारत के पांच शहरों कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई, दिल्ली और जामनगर के अपने सद्भावना दौरे के समापन के बाद लियोनेल मैसी ने भले ही भारत को अपनी शानदार मेहमानवाजी और प्यार के लिए ‘थैंक्यू’ कहा हो, लेकिन ये दौरा हमे आत्ममंथन पर विवश करता है। क्योंकि इस दौरे से आखिर किस चीज का प्रमोशन हुआ? कई नामी भारतीय खिलाड़ियों ने भी ऐसे प्रायोजित दौरे के औचित्य पर सवाल उठाए हैं कि आखिर इस दौरे से भारत को हासिल क्या हुआ, सिवाय एक भव्य तमाशे के? 
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मैसी का यह दौरा कोलकाता के एक खेल प्रशंसक और इवेंट कंपनी के मालिक शतद्रु ( सतलुज नदी का प्राचीन नाम) दत्ता ने आयोजित किया था। अड़तीस वर्षीय मैसी अमेरिकी फुटबॉल क्लब इंटर मियामी को पहली बार एमएलएस कप जिताने में मदद करने के बाद प्रमोशनल दौरे पर निकले हैं। इस दौरे को GOAT इंडिया 2025 के अंतर्गत आयोजित किया गया था। GOAT यानी ग्रेट ऑफ ऑल टाइम।

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कोलकाता के अलावा मैसी के इस दौरे में सम्बन्धित राज्यों की सरकारों की भी भागीदारी रही। हैदराबाद में मेसी ने मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी के साथ एक प्रदर्शन मैच खेला और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से भी मुलाकात की तो  मुंबई में मैसी ने महाराष्ट्र सरकार के 'प्रोजेक्ट महादेव' का शुभारंभ किया। जिसका उद्देश्य राज्य में जमीनी स्तर पर फुटबॉल को मजबूत करना है। दिल्ली में उनके साथ फुटबॉल खिलाड़ी लुइस सुआरेज और रोड्रिगो डी पॉल भी थे। तीनों ने आईसीसी अध्यक्ष जय शाह,  दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता और डीडीसीए अध्यक्ष रोहन जेटली से मुलाकात की। जय शाह ने उन्हें टी 20 विश्वकप में आने का न्यौता भी दिया। 


भारत में मैसी ‘क्रिकेट के भगवान’ सचिन तेंदुलकर और भारतीय फुटबाॅल खिलाड़ी सुनील छेत्री से भी मिले। दौरे के आखिर में वो जामनगर में अंबानी के निजी चिड़ियाघर वनतारा भी गए और वन्य प्राणियों को देखा। लेकिन मैसी के दौरे में सबसे ज्यादा चर्चा देश में फुटबॉल की राजधानी’कहे जाने वाले कोलकाता में हुए भारी हंगामे की हुई। जहां मैसी से समुचित मुलाकात न कराए जाने पर दर्शकों ने गुस्सा जताया और भारी तोड़फोड़ की।

दरअसल, दर्शकों का आरोप है कि आयोजकों ने मैसी से मुलाकात के नाम पर उन्हें साफ तौर पर ठगा है। साल्ट लेक स्टेडियम में आयोजित इस कार्यक्रम का टिकट 4300 रुपये का था, जिसे लोगों ने 25 हजार रुपये तक में ब्लैक में खरीदा। बदले में मैसी 10 मिनट के लिए आए और हाथ हिलाकर चले गए। कोलकाता में इस बवाल के राजनीतिक परिणामों को भांपकर और राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बैनर्जी ने ताबड़तोड़ डैमेज कंट्रोल करने की कोशिश की। उन्होंने मामले की जांच एसआईटी को सौंपी तथा राज्य के खेल मंत्री अरूप बिस्वास से इस्तीफा ले लिया। उधर आयोजक शतद्रु धोखाधड़ी के मामले में 14 दिन की पुलिस हिरासत में हैं।
 

What exactly was promoted by Messi's visit to India? Lionel Messi India tour
मैसी के भारत दौरे से आखिर किस चीज का प्रमोशन हुआ? - फोटो : अमर उजाला

आखिर इस दौर का उद्देश्य क्या था? 

लेकिन मैसी के दौरे के पीछे मकसद क्या था? क्या यह भारत में फुटबॉल को नए सिरे से लोकप्रिय बनाने के कैम्पेन का हिस्सा है या फिर ‘ग्रेट प्लेयर टूरिज्म’ का नया चोंचला है अथवा नामी खिलाडि़यों को भारत दर्शन करवाकर भारतीयों की जेब ढीली करवाने का नया पैंतरा है? GOAT दौरे के आयोजक शतद्रु दत्ता के बारे में कहा जा रहा है कि वो इवेंट मैनेजमेंट कंपनी चलाते हैं और खेलों के रसिया हैं। ऐसे आयोजन पहले भी करते रहे हैं और पूर्व भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान सौरव गांगुली के करीबी हैं। शतद्रु की अपनी सम्पत्ति का खुलासा अभी नहीं हुआ है, लेकिन मैसी के इस दौरे में अरबों के वारे-न्यारे हुए हैं, इसमें संदेह नहीं। 

यूं भारत में फुटबॉल का इतिहास डेढ़ सौ साल से ज्यादा पुराना है। देश में पहला फुटबॉल क्लब 1872 कोलकाता में रजिस्टर्ड हुआ था। लेकिन देश में फुटबॉल का विकास और प्रगति उस तरह से कभी नहीं हुई, जैसी कि अपेक्षित थी। 1948 के लंदन ओलम्पिक भारतीय फुटबॉल टीम नंगे पैर ही मैदान में उतरी थी, क्योंकि उसके पास जरूरी जूते ही नहीं थे। इसके बाद टीम पर बैन लगा दिया गया था। भारत में फुटबॉल लोकप्रिय खेल है।
 

देश में 122 फुटबॉल स्टेडियम भी हैं, लेकिन खेल का स्तर बहुत ही नीचा है। फीफा वर्ल्ड रैंकिंग में भारत का नंबर दुनिया में 142 वां है। भारतीय टीम फीफा कप तो क्या एशिया कप के लिए भी क्वालिफाई नहीं कर पाती। GOAT इंडिया के आायोजन पर कुल कितने रुपये खर्च हुए यह तो बाद में पता चलेगा, लेकिन फुटबॉल प्रेमियों को यह जानकर हैरानी हो सकती है कि भारत सरकार ने देश में फुटबॉल के लिए पिछले साल बजट में 8.78 करोड़ रुपये दिए थे और अखिल भारतीय फुटबॉल फेडरेशन उसमें भी केवल 4 करोड़ रुपये साल भर में खर्च कर सका था। जबकि GOAT दौरे में इससे कई गुना ज्यादा खर्च हो गए। 


इसमें दो राय नहीं कि लियोनेल मैसी दुनिया के महानतम फुटबॉल खिलाडि़यों में से हैं। वो अब तक 46 टीम ट्रॉफियां जिता चुके हैं। 600 मिलियन डाॅलर की सम्पत्ति के मालिक मैसी एक परोपकारी भी हैं और अर्जेंटीना में अपने पिता के साथ टैक्स फ्रॉड के मामले में भी फंस चुके हैं। बेहतर होता कि मैसी के नाम पर महंगा तमाशा करने की जगह इतना पैसा भारत में फुटबॉल के जमीनी स्तर पर विकास और विस्तार पर खर्च किया जाता। क्रिकेट की तर्ज पर एक व्यापक फुटबॉल नेटवर्क खड़ा कर ग्रामीण प्रतिभाओं को तराशकर उन्हें भारतीय फुटबॉल टीम में शामिल करने का व्यापक कार्यक्रम चलाया जाता। गांव-गांव में फुटबॉल क्लब और अकादमियां खड़ी कर ग्रामीण स्तर से राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉल टूनामेंट आयोजित किए जाते। ऐसा नहीं है कि अभी कुछ नहीं हो रहा है। लेकिन जो हो रहा है, वो नाकाफी है। 
 

What exactly was promoted by Messi's visit to India? Lionel Messi India tour
मैसी के भारत दौरे से आखिर किस चीज का प्रमोशन हुआ? - फोटो : PTI

मैसी के इस प्रायोजित दौरे की कई नामी भारतीय खिलाडि़यों ने आलोचना की है। भारत के ओलंपिक में स्वर्ण पदक विजेता शूटर अभिनव बिंद्रा ने सवाल किया कि क्या एक समाज के तौर पर हम खेल संस्कृति बना रहे हैं या फिर किसी दूसरे देश की खेल शख्सियत का उत्सव मना रहे हैं? मैसी का जयगान करने के बाद अब समय आत्मनिरीक्षण का है। ओलंपियन पहलवान विनेश फोगाट ने कहा कि ‘मैं उम्मीद करती हूं कि कोई तो वक्त आएगा, जब सिर्फ एक दिन के लिए नहीं, बल्कि हर दिन के लिए हम सचमुच खेल के लिए जाग सकेंगे। 

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान बाइचुंग भूटिया ने भी कोलकाता के आयोजन की कड़ी आलोचना की है। सवाल यह भी है कि हमने भले मैसी को भारत बुला लिया हो, लेकिन अर्जेंटीना ने कभी किसी नामी भारतीय खिलाड़ी को इस तरह बुलाकर सम्मानित किया? क्रिकेट वहां खेला नहीं जाता, लेकिन क्या कोई भारतीय हाॅकी अथवा अन्य खिलाड़ी भी इस लायक नहीं समझा गया?

दरअसल जहां वैश्विक स्तर के खिलाडि़यों की फसल तैयार की जाती है, वहां ऐसे तमाशों की जगह ठोस काम ज्यादा होता है और वहां की जनता भी तमाशबीन बनने की जगह नायकों को पैदा करने में भरोसा करती है। बेहतर तो यह होता कि मैसी जैसा कोई शानदार खिलाड़ी भारतीय फुटबाॅल खिलाडि़यों के लिए कोच और मार्गदर्शक के रूप में नियुक्त किया जाता।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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