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पश्चिम बंगाल: विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति, राज्यपाल-सरकार के बीच बढ़ता टकराव

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Sat, 03 Jun 2023 02:23 PM IST
सार

कई पूर्व कुलपतियों ने राज्यपाल के फैसले का विरोध किया है। ऐसे कुछ लोगों ने प्रेस कांफ्रेंस कर राज्यपाल के अधिकार और उनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन लोगों ने राज्यपाल के पूर्व आदेश को नहीं माना था उनको दरकिनार करते हुए दूसरे लोगों की नियुक्ति की गई है।

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West Bengal Governor CV Ananda Bose appointed 11 interim V-Cs, govt call it illegal
राज्यपाल सी.वी.आनंद बोस - फोटो : Twitter

विस्तार

पश्चिम बंगाल में राजभवन और राज्य सचिवालय के बीच टकराव की लंबी परंपरा रही है। लेकिन पूर्व राज्यपाल जगदीप धनखड़ के कार्यकाल के दौरान यह चरम पर पहुंच गया था। मौजूदा राज्यपाल सी.वी.आनंद बोस के कार्यभार संभालने के बाद कुछ दिनों तक सरकार के साथ उनका तिरसठ का आंकड़ा रहा था। लेकिन विभिन्न मुद्दों पर टकराव बढ़ने के कारण अब यह आंकड़ा छत्तीस में बदलने लगा है।

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पहले राज्य के मुख्य चुनाव अधिकारी की नियुक्ति के मुद्दे पर विवाद हुआ और अब सरकारी सहायता प्राप्त 11 विश्वविद्यालयों में वाइस-चांसलरों की नियुक्ति के मुद्दे पर राज्यपाल और सरकार खुल कर एक-दूसरे के सामने आ गए हैं।
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सरकार ने राज्यपाल की ओर से की गई नियुक्तियों को अवैध बताते हुए कहा है कि सरकार ऐसे वाइस-चांसलरों को मान्यता नहीं देगी।

दरअसल, राज्यपाल सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के पदेन चांसलर होते हैं। जगदीप धनखड़ के साथ विवाद तेज होने के कारण बीते साल सरकार ने विधानसभा में एक विधेयक पारित कर राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को चांसलर बनाने का फैसला किया था। लेकिन राज्यपाल के हस्ताक्षर नहीं होने के कारण वह विधेयक कानून की शक्ल नहीं ले सका है।

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राज्यपाल ने की 11 विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति


अब ताजा मामले में राज्यपाल ने इस सप्ताह 11 विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों की बैठक बुला कर उनसे बातचीत की और उसके बाद उनको वीसी के पद पर नियुक्ति कर दिया। दूसरी ओर, शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा है कि विभिन्न विशेषज्ञों को लेकर गठित सर्च कमेटी की ओर से भेजे गए नामों पर राज्य सरकार के साथ विचार-विमर्श करने के बाद ही राज्यपाल नियुक्ति का फैसला करते हैं। राज्य में लंबे समय से यही परंपरा चलती रही है। 


उनका आरोप था कि राज्यपाल ने इन नियुक्तियों के जरिए अब तक प्रचलित परंपरा और नियमों का उल्लंघन किया है। उन को सीधी नियुक्ति करने का अधिकार नहीं है।

लेकिन दूसरी ओर राज्यपाल का कहना है कि राज्य सरकार से विचार-विमर्श का मतलब यह नहीं है कि वे उसकी तमाम बातों पर सहमति जता दें। राजभवन की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि राज्यपाल ने छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए ही विश्वविद्यालयों में रिक्त पदों पर अंतरिम वाइस-चांसलरों की नियुक्ति का फैसला किया है।


शिक्षा मंत्री ने नियुक्तियों को बताया अवैध

शिक्षा मंत्री ने इन नियुक्तियों को अवैध बताते हुए संबंधित लोगों से अपने पद पर ड्यूटी ज्वाइन नहीं करने की अपील की थी लेकिन उनकी अपील बेअसर रही। तमाम लोगों ने अपनी ड्यूटी ज्वाइन कर ली है। शिक्षा मंत्री का आरोप है कि राज्यपाल शिक्षा विभाग से बिना किसी चर्चा के अपनी मर्जी से कुलपतियों की नियुक्ति कर विश्वविद्यालयों पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। मंत्री ने आगे कहा कि अगर नियुक्तियां खारिज नहीं की गई तो सरकार कानूनी सलाह लेगी।

कई पूर्व कुलपतियों ने भी राज्यपाल के फैसले का विरोध किया है। ऐसे कुछ लोगों ने यहां प्रेस कांफ्रेंस कर राज्यपाल के अधिकार और उनकी भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जिन लोगों ने राज्यपाल के पूर्व आदेश को नहीं माना था उनको दरकिनार करते हुए दूसरे लोगों की नियुक्ति की गई है।

इसके पहले राज्य सरकार ने राज्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति को लेकर भी राज्यपाल को दो नाम भेजे थे लेकिन राज्यपाल ने उन नामों को स्वीकार नहीं किया है। इससे अभी तक राज्य चुनाव आयुक्त के पद खाली पड़ा है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सार्वजनिक तौर पर इस मुद्दे को उठाते हुए राजभवन की भूमिका की आलोचना की है लेकिन मामला जस का तस है।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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