बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: कमरहट्टी विधानसभा, जहां विकास से ज्यादा शांति और सद्भाव चाहते हैं लोग
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कोलकाता, महानगर से सटे उत्तर 24 परगना जिला एक जमाने में मार्कवादियो का लालदुर्ग माना जाता था, जहां लाल झंडे के अलावा कुछ नहीं दिखता था। कमरहट्टी विधानसभा सीट भी इसका अपवाद नहीं। 1967 से लेकर 2016 में यहां माकपा उम्मीदवार विजयी रहा। 1972 में कांग्रेस उम्मीदवार प्रदीप पालित और 2011 में तृणमूल कांग्रेस के मदन मित्र ममता लहर में सवार होकर जीतने में सफल रहे थे।
माकपा के मानस मुखर्जी 2001, 2006 और 2016 में विजयी रहे। पूर्व परिवहन, खेल मंत्री समेत विभिन्न संगठनों से जुड़े मदन मित्र तीसरी बार यहां से चुनाव लड़ रहे हैं और राज्य की सबसे चर्चित सीटों में कमरहट्टी शामिल है। माकपा ने इस बार उनके मुकाबले युवा उम्मीदवार सायनदीप मित्र, भाजपा ने राजू बनर्जी को खेला होबे के मैदान में उतारा है।
क्या हैं जमीनी हालात? चुनाव पर क्या कहते हैं लोग?
कमरहट्टी विधानसभा को तीन भागों में बांटा जा सकता है। कमरहट्टी,बेलघरिया और आरियादह के मतदाताओं का मूड, समीकरण एक दूसरे से पूरी तरह जुदा दिख रहा है। एक ओर कमरहट्टी जूटमिल तो दूसरी ओर नगरपालिका के नजदीक नजरूल मंच में सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजन के नजदीक एक दल के लोगों ने नागरिकों को सेवा प्रदान करने के लिए परिसेवा केंद्र खोल रखा है।
कपड़ा कारोबारी नसीम रजा मानते हैं कि इस चुनाव में बुनियादी मुद्दे गौण हो चुके हैं। इलाके में एक ही मुद्दा हावी है कि शांतिपूर्ण तरीके से जीवन यापन करना है या हिंसा और अफरा-तफरी के बीच रहना है। बंगाल में सीपीएम के 34 साल और ममता के 10 साल में शांति रही है और चाहते हैं कि यह माहौल कायम रहे।
कमरहट्टी बाजार में दूसरे एक व्यापारी मोहम्मद अरमान कहते हैं कि कोरोना के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है। साल भर से आर्थिक हालात पर असर पड़ा है। इलाके के मुद्दों की बात करें तो मुफ्त राशन, बिजली, पानी, मुफ्त , स्वास्थ्य साथी में पांच लाख रुपए तक मुफ्त इलाज की सुविधा मिल रही है। यहां सवाल सांप्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता को लेकर है।
क्या कहते हैं राजनीतिक समीकरण
राजनीतिक समीकरण की बात करें तो इस विधानसभा के तीन हिस्सों में कमरहट्टी में तृणमूल-माकपा, बेलघरिया में तृणमूल-माकपा और आरियादह में तृणमूल-भाजपा के बीच टक्कर है। माकपा का उम्मीदवार युवा है, लेकिन इलाके में पैठ नहीं होने और लोगों का मानना है कि संयुक्त मोर्चा की हालत कमजोर होने के कारण मुकाबला मदन-राजू के बीच है।
आरियादह में एक डिपार्टमेंट स्टोर के मालिक नाम बताने से इंकार करते हुए कहते हैं कि बुनियादी नागरिक सुविधाएं हमें हासिल हैं, लेकिन इस बार परिवर्तन होगा। इलाके के लोग बदलाव चाहते हैं बदलाव होगा। पेशे से शिक्षक सुखवंत सिंह का कहना है कि किसान आंदोलन की गूंज यहां भी है और वोट डालने से पहले दिल्ली की सरहद पर बैठे किसानों की बात जरूर सोचेंगे।
राज्य में राजनीतिक माहौल को देखते हुए इलाके में लोग खुलकर बोलने से हिचकिचा रहे हैं। कई लोग तो अपने विचार प्रकट करने के लिए तैयार नहीं तो कई लोग नाम बताने से कतराते हैं। कमरहट्टी नगरपालिका के नजदीक एक कार्यालय के बाहर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार का पोस्टर लगा था और कुछ लोग बैठे थे। जब उन लोगों से मुद्दों के बारे में पूछा तो कुछ कहने के लिए तैयार नहीं हुए। बाद में बोलने के लिए एक दूसरे व्यक्ति को बुलाकर लाए, उसने कहा यह पार्टी का कार्यालय नहीं, हम लोग यहां आने वाले जरुरतमंद लोगों को राशन और दवाइयां समेत जरुरत का सामान मुहैया करवाते हैं। वह भी अपना नाम बताने के लिए तैयार नहीं हुआ।
यहीं, बस स्टैड के पास एक युवक टोटों की प्रतीक्षा में खड़ा था, खालसा स्कूल, डनलप में उसके बच्चे की दूसरी कक्षा में प्रवेश परीक्षा थी। पहले तो वह कुछ बोलने के लिए तैयार नहीं हुआ। जब कहा कि चिंता की बात नहीं, अपने मन की बात बता दें, नाम वगैरह मत बताएं। तो उसका कहना था कि वाममोर्चा के राज्य में शांति थी और हम चाहते हैं कि माकपा उम्मीदवार विजयी रहे। भले ही इस बार माकपा की सरकार नहीं बनेगी, लेकिन अगली बार 2026 में बंगाल में वाममोर्चा की सरकार ही आएगी।
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