फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   west bengal assembly elections 2021 ground report of haldia

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2021: हल्दिया के बदलते सियासी रंग में राजनीतिक रसूख बचाने की जंग

Tue, 30 Mar 2021 05:08 PM IST
Bidisha Biswas बिदिशा बिस्वास
Updated Tue, 30 Mar 2021 05:08 PM IST
विज्ञापन
west bengal assembly elections 2021 ground report of haldia
हल्दिया पिछले एक दशक में तृणमूल की गतिविधियों का केन्द्र बन गया। - फोटो : अमर उजाला

पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े बंदरगाह शहर हल्दिया में राजनीतिक रंग तेजी से बदल रहा है। हल्दी और हुुगली नदी के त्रिकोण में बसे इस शहर में पिछले तीन दशकों के दौरान जमकर विकास हुआ। तेल कंपनियों की रिफाइनरी तैयार हुई। बंदरगाह से जुड़ी गतिविधियों ने हजारों रोजगार दिए। कभी लाल झंडे का अटूट गढ़ रहा हल्दिया पिछले एक दशक में तृणमूल की गतिविधियों का केन्द्र बन गया। इसके बावजूद वर्ष 2016 में यहां से माकपा की प्रत्याशी ही जीतीं जो इस चुनाव में भाजपा की उम्मीदवार हैं। चुनाव से ऐन पहले टूट सिर्फ माकपा में हुई हो ऐसा नहीं है।

विज्ञापन


तृणमूल कांग्रेस के भी कई स्थानीय क्षत्रप भाजपा में शामिल हो चुके हैं। तृणमूल में बड़े पैमाने पर हुई टूट का कारण पूछने पर हल्दी नदी के किनारे स्थित सनसेट प्वाइंट पर घूमने आए निशिकांत दास कहते हैं-कोरोना के कारण यहां बेरोजगारी बढ़ी। पोर्ट के ठेके के काम कम हुए। युवा रोजगार के लिए परेशान हैं। उन्हें तृणमूल सरकार से कोई राहत की उम्मीद नहीं दिखती। फ्री राशन से यहां के युवा प्रभावित नहीं हो सकते। उन्हें अच्छा खासा वेतन चाहिए जिसकी उन्हें आदत है।
विज्ञापन


भीतरघात की आशंका
हल्दिया नगरपालिका के सामने वाहन का इंतजार कर रहे अचिन्त्यो सरकार बताते हैं- कभी माकपा के नेता रहे बाहुबली लक्ष्मण सेठ की इलाके में तूती बोलती थी। नंदीग्राम आंदोलन की सफलता के बाद लक्ष्मण सेठ हाशिए पर जाते गए, इस बीच उन्होंने रसूख बरकरार रखने के लिए कई बार दल भी बदले, आज भी वे कई इलाकों में समीकरण बदल सकते हैं। हालांकि पोर्ट से जुड़े कामकाज में उनकी दखल अब नगण्य है लेकिन दशकों पुराना उनके हित समूह आज अलग अलग पार्टियों में हैं। इसलिए कहां से भीतरघात हो जाए यह कहना मुश्किल है।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

west bengal assembly elections 2021 ground report of haldia
नंदीग्राम में ममता बनर्जी और अमित शाह का रोडशो - फोटो : एएनआई

अधिकारी परिवार ने लगाया दमखम
जिले के रसूखदार अधिकारी परिवार जिसमें सुुुुुुुवेंदु, उनके पिता सांसद शिशिर अधिकारी व भाई शामिल हैं, के लिए हल्दिया नाक की लड़ाई है। चुनाव से ऐन पहले माकपा विधायक तापसी मंडल को अपने पाले में कर भाजपा इस सुरक्षित सीट पर एक कदम आगे निकल आई है। लेकिन माकपा के मतदाता इससे इत्तेफाक नहीं रखते।

खुदीराम मार्केट के पास खरीदारी करने आए आशीष दास कहते हैं-ट्रेड यूनियन आंदोलन के सहारे इस उद्योगनगरी में माकपा प्रत्याशी मनिका कर पाइक का भविष्य उज्जवल दिखता है। यहां केवल बड़ी कंपनियों, प्राइवेट शिक्षण संस्थानों, पोर्ट ट्रस्ट के अधिकारी ही नहीं रहते हैं यहां मेहनतकश मजदूर भी हैं जो किसी नेता के साथ नहीं है बल्कि उनकी बात करने वाली विचारधारा के साथ हैं।

कटमनी, सिंडीकेटराज की बात उठती है
उद्योगनगरी यानि दादा भाइयों के लिए सोने के अंडे देने वाली मुर्गी। हजारों वाहनों में दैनिक लोडिंग-अपलोडिंग, बड़े-बड़े गोदाम, परिवहन के भीमकाय बेड़े राजनीतिक दलों के समर्थकों के लिए उगाही का बड़ा माध्यम हैं। इंडियन ऑयल निगम कॉलोनी के पास लॉरी के साथ खड़े सरदार गुरजीत सिंह कहते हैंं-यहां बिना मुट्ठी गरम किए लोडिंग- अनलोडिंग की बात सोचना सपने जैसा है। पूरी व्यवस्था बनी हुई है। मुस्कुराते हुए कहते हैं कि लंका में जो आएगा वो रावण ही होगा।  

नंदीग्राम इस तरफ तो उस पार डायमंड हार्बर
हल्दिया सीट की पड़ोसी सीटों में एक तरफ नंदीग्राम है तो दूसरी तरफ डायमंड हार्बर। नंदीग्राम में जहां ममता और सुुुुुुुवेंदु आमने-सामने हैं वहीं हुगली नदी पार करते ही डायमंड हार्बर की सीमा शुरू हो जाती है, जिसे ममता के सांसद भतीजे अभिषेक बनर्जी का गढ़ कहा जाता है।  

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed