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जल संकट: स्वच्छ पानी न मिलने की वजह से हर साल 2 लाख लोग गंवा देते हैं जान

shanker singhडॉ.शंकर सुवन सिंह Updated Thu, 19 Sep 2019 08:33 AM IST
शुद्ध पेयजल मानव जाति एवं जीव जंतु सभी के लिए एक आवश्यक है।
शुद्ध पेयजल मानव जाति एवं जीव जंतु सभी के लिए एक आवश्यक है। - फोटो : social media
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शुद्ध पेय जल मानव जाति एवं जीव जंतु सभी के लिए एक आवश्यक है। इसे प्रकृति द्वारा एक नियत समय पर, नियत मात्रा में हम प्राप्त करते हैं। अतः इसका संरक्षण करना हमारे लिए अति आवश्यक प्रक्रिया होनी चाहिए।
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प्रधानमंत्री नरेंद मोदी जी ने देशभर के ग्राम प्रधानों एवं मुखियाओं को पत्र लिखकर वर्षा जल संग्रहित करने की अपील की है। यह पहला मौका है जब ग्राम प्रधानों को किसी प्रधानमंत्री ने जल संचयन के लिए पत्र लिखा है। संरक्षण के आभाव में वर्षा से प्राप्त जल बह जाता है या वाष्पित होकर उड़ जाता है।

देश में है पर्याप्त पानी लेकिन फिर भी है जलसंकट 
हमारे देश में वर्षा पर्याप्त मात्रा में होती है, फिर भी हम पानी का संकट झेलते हैं। एक अनुमान के मुताबिक दुनिया के लगभग 1.4 अरब लोगों  के पास शुद्ध-पेयजल उपलब्ध नहीं है। पिछले साल नीति आयोग द्वारा जारी समग्र जल प्रबंधंन सूचकांक रिपोर्ट के अनुसार देश में 60 करोड़ लोग पानी की गंभीर किल्लत का सामना कर रहे हैं। वहीं करीब दो लाख लोग स्वच्छ पानी ना मिल पाने के वजह से हर साल जान गवां देते हैं।

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2030 ई. तक देश में पानी की मांग, उपलब्ध  जल वितरण से दोगुना हो जाएगा। जिसका मतलब है कि करोड़ों लोगों में पानी का गंभीर संकट पैदा हो जाएगा और देश की जीडीपी में छह प्रतिशत की कमी देखी जाएगी।

स्वतंत्र संस्थाओं द्वारा जुटाए गए डाटा का उद्धरण देते हुए रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि करीब 70 प्रतिशत प्रदूषित पानी के साथ भारत जल गुणवत्ता सूचकांक में 122 देशों में 120 नंबर पर  है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक स्थितियां अलग हैं।

वर्षाकाल में जहां भारत के एक हिस्से में बाढ़ के हालात होते हैं, वहीं दूसरे हिस्से में भयंकर सूखे की स्थिति होती है। कई क्षेत्रों  में मूसलाधार वर्षा होने के बावजूद भी लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरसते हैं। कई स्थानों में तो संघर्ष की स्थिति हो जाती है। 

इसका प्रमुख कारण है वर्षा के जल का सही प्रकार से संचयन न करना,  जिससे पानी बहकर प्रदूषित हो जाता है। प्रकृति के संसाधनों को लेकर हम यह सोचते हैं की यह कभी ख़त्म नहीं होगा, जिससे जल भण्डारण धीरे-धीरे ख़त्म होने की कगार पर है, इसलिए यह आवश्यक हो गया है की हम जितना पानी प्रकृति से जल भंडारण के रूप में लेते हैं उतना उसको वापस भी करें।

गांवों व शहरों में जल भण्डारण ख़त्म होने की कगार पर है। लगातार हो रहे औद्योगिक निर्माण और शहरीकरण से जल का स्तर बहुत नीचे पहुंच गया है। जल के स्तर को उसकी उपलब्धता के आधार पर कई ज़ोन में बांटा गया है, जिससे यह अनुमान लगाया जा सके कि किस एरिया का पानी किस स्तर पर जा चुका है, जिस हिस्से में शहरीकरण जितना ज्यादा हुआ है, उस हिस्से की भूमि का जल उतना ही निचले स्तर पर चला जाता है, इसलिए जितनेभी मेट्रो- पोलिटन सिटी हैं, उनको वाटर हार्वेस्टिंग की आवश्यकता पड़ती है। 
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