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वसंत ऋतु: आम के बौर और उनकी मनमोहक खुशबू, एक अजीब सा जीवनचक्र

Sun, 05 Feb 2023 01:03 PM IST
Sandip Naik संदीप नाईक
Updated Sun, 05 Feb 2023 01:03 PM IST
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vasant ritu and mango tree, how beautiful malihabad is
आम के पेड़ पर लदे बौर - फोटो : amarujala

अचानक कहीं से आम के बौर याद आ गए, जब लखनऊ से हरदोई जाता था तो मलिहाबाद रास्ते में पड़ता था संडीला के ठीक पहले। रास्ते भर आम के विशाल पेड़ खड़े रहते थे, उनकी देखभाल करने वाले अपने बच्चों के समान उनकी देखभाल करते, पानी डालते, पत्तियां संवारते और शाखाओं को छांटते, नए उग आए बौरों को राहगीरों के पत्थरों से बचाते। 

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फरवरी-मार्च के आते -आते आम के पेड़ पर बौर उग आते, उसकी मदमस्त करने वाली खुशबू के लालच में मैं हरदोई का दौरा करने निकल लेता। घंटो रास्ते में खड़ा रहकर उस दिव्य सुवास को सूंघा करता, पागलपन की हद तक इस सुवास से मुझे प्यार था। 
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थोड़े समय बाद खट्टी- मीठी कच्ची केरिया लगतीं, मैं उन्हें देखता, निहारता, हरे रंग के जितने स्वरूप मैंने आम की इन कच्ची केरियों में देखें हैं, उतने कहीं नही। इन शैतान केरियों के लिए मैं अपनी जान दे सकता हूं। इनके अमृत स्वाद का दीवाना हूं, इन्हें बढ़ते देखना और पके आम में परिवर्तित होते देखने के लिए ही हम सब जन्में हैं। 
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थोड़े दिन बाद आम अपने शबाब पर आते पर अफसोस, उन्हें पालने-पोसने वाले दूर खड़े रहते। ठेकेदार पूरी अमराई ठेके पर उठा लेता, उसके मजदूर आते और एक- एक आम बेरहमी से तोड़ लेते और ट्रक में भरकर ले जाते, वे छोटी केरियों को भी नही छोड़ते कम्बख़्त।

मैं रुकता और कुछ नहीं सोचता, बस टुकुर- टुकुर देखता रहता, कभी आम और कभी उसके पालनहारों को। दिन ढलने के पहले ही लौट आता लखनऊ और छोटे- बड़े इमामबाड़ों, भूलभुलैया, किसी मजार पर या शहीद पथ से उतरकर गोमती के किनारे जा बैठता उदासी में। 

आम की खटास मन में घुल- घुलकर उतरती और मैं धीरे से रात होने का इंतज़ार करता। लखनऊ छोड़ने का दुख नहीं था, दुख था तो उन आम के बागानों का जो आज भी फल दे रहें होंगे। उनके पालनहार पानी छींट रहे होंगे, कचरा बीन रहें होंगे और शाखाओं पर आ रहे बौर को राहगीरों से बचा रहे होंगे।

ठेकेदार फिर आएगा और सारे कच्चे- पक्के आम तोड़कर ले जाएगा, अफसोस मेरे इस शहर में कोई नदीं नही - जिसके किनारे जाकर मैं लहरों में उन आमों का दर्द उकेर सकूं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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