फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Trimming the Light: Materialistic and Artistic Expressions of Light

ट्रिमिंग द लाइट: प्रकाश की भौतिकवादी और कलात्मक अभिव्यक्ति

Wed, 19 Apr 2023 10:07 PM IST
Atul sinha अतुल सिन्हा
Updated Wed, 19 Apr 2023 10:07 PM IST
सार

कलाकार कल्लोल बोस बताते हैं कि पश्चिम बंगाल की जानूस आर्ट गैलरी की पहल पर इतने कलाकार अपनी अपनी रचनात्मकता के साथ लोगों के बीच आ सके हैं। ये सभी युवा हैं। कहीं न कहीं और किसी न किसी आर्ट कॉलेज में पढ़ते हैं या पढ़ चुके हैं।

विज्ञापन
Trimming the Light: Materialistic and Artistic Expressions of Light
Trimming The Light - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

कोरोना महामारी के बेहद मुश्किल दो सालों ने कलाकारों, शिल्पकारों के अलावा तमाम रंगकर्मियों को संकट में डाल दिया। कई कलाकार हताशा के शिकार होने लगे। जो थोड़े समृद्ध थे, उनपर भले ही कोई फर्क न पड़ा हो लेकिन युवा और संघर्षशील कलाकारों के लिए ये बेहद मुश्किल भरा वक्त था। लेकिन इस दौरान कलाकारों ने काम भी खूब किया। नए-नए प्रयोग किए और अपनी कला साधना को जारी रखने की कोशिश की।

विज्ञापन


क्यूरेटर और पेंटर माणिक बर्मन भी इसकी एक मिसाल हैं। ऐसे कलाकारों में माणिक के साथ खोकोन गिरी, कुमार कृष्णा, रनोजॉय सरकार, सूरज गोराई, फारुख अहमद, पार्था साहा, देबी प्रसाद भूनिया, शुभंकर चक्रवर्ती, सुरजीत मुडी, राजा बोरा, दिबेन्दु राय, शांतनु डे और अमित डे को भी आप देख औऱ महसूस कर सकते हैं। इनकी बेहतरीन कला और मूर्तिशिल्प में नए प्रयोगों को दिल्ली की श्रीधरनी आर्ट गैलरी में 21 अप्रैल तक देखा जा सकता है।
विज्ञापन


कलाकार कल्लोल बोस बताते हैं कि पश्चिम बंगाल की जानूस आर्ट गैलरी की पहल पर इतने कलाकार अपनी अपनी रचनात्मकता के साथ लोगों के बीच आ सके हैं। ये सभी युवा हैं। कहीं न कहीं और किसी न किसी आर्ट कॉलेज में पढ़ते हैं या पढ़ चुके हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


खास बात यह है कि इसकी थीम है ट्रिमिंग द लाइट। इन कलाकारों ने प्रकाश या लाइट को एक ऑब्जेक्ट के तौर पर लिया है जिसे देखा जा सकता है, लेकिन छुआ या महसूस नहीं किया जा सकता। एक कलाकार के लिए प्रकाश के अपने मायने हैं, वह इसे भौतिक दुनिया से जोड़ते हैं और अपनी कला के जरिये ये अभिव्यक्त करने की कोशिश करते हैं। प्रकाश के इस भौतिक मनोविज्ञान और जीवन से जुड़ने की यात्रा को इन कलाकारों ने अपने शिल्प, कलाकृतियों और मूर्तिकला के माध्यम से सामने लाने की कोशिश की है।

क्यूरेटर माणिक बर्मन का मानना है कि कलाकारों ने पारंपरिक और गैर-पारंपरिक साधनों जैसे प्रिंटमेकिंग, पेंटिंग, सिरेमिक, मूर्तिकला और अन्य माध्यमों से प्रकाश को भौतिक शरीर में बदल दिया है। जाहिर है इसे देखना एक नया अनुभव है।


'ट्रिमिंग द लाइट' प्रदर्शनी का उद्घाटन जाने माने चित्रकार शक्ति बर्मन और मशहूर मूर्तिकार के एस राधाकृष्णन ने किया। इस दौरान मुकेश शर्मा, शुभ्रचंद, शीला चमरिया, शिवाजी सामंत जैसे कला के जानकार मौजूद थे।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed