टाइटन सबमरीन हादसा: समंदर की गहराई में टूरिज्म की सनक और कुदरत की चुनौतियां
पिछले कुछ वर्षों से टाइटन पनडुब्बी टाईटैनिक मलबे को दिखाने के लिए टूर का आयोजन कर रही थी, जिसमें एक यात्री का ही किराया करोड़ों में था। इस दुर्भाग्यशाली पनडुब्बी के इस बार के सभी पांच यात्री अरबपति थे और इसमें ओशेनगेट कंपनी के सीईओ स्टॉकटन रश खुद थे जो पनडुब्बी के कैप्टन भी थे।
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पिछले दिनों अटलांटिक महासागर में टाइटैनिक जहाज का मलबा दिखाने गई ओशेनगेट कंपनी की छोटी सी पनडुब्बी ‘टाइटन’ हादसे का शिकार हो गई और इसमें यात्रा कर रहें 5 लोग असमय काल के गाल में समा गए।
टाइटैनिक दुनिया का सबसे बड़ा वाष्प आधारित यात्री जहाज था। वह साउथम्पटन (इंग्लैंड) से अपनी पहली ही उद्घाटन यात्रा पर, 10 अप्रैल 1912 को रवाना हुआ था, किन्तु महज चार दिन की यात्रा के बाद, 14 अप्रैल 1912 को वह एक विशाल हिमखंड से टकराकर डूब गया था। इसमें 1,517 लोगों की मृत्यु हुई थी, जो इतिहास की सबसे बड़ी समुद्री आपदाओं में से एक है।
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अब मनुष्य की खोजी प्रवृत्ति और जिजीविषा तो देखिए कि उसी टाइटैनिक के मलबे की खोज खबर की नई दुस्साहसिक घटना में एक "पनडुब्बी पर्यटन" में सभी पांच यात्री काल के गाल में समा गए हैं। ये लोग टाइटैनिक जहाज का मलबा देखने के लिए गहरे समुद्र में चार हज़ार मीटर नीचे गए थे, जहां सतह की तुलना में कई गुना अधिक दबाव होता है।
प्रथम दृष्टया माना गया है कि पनडुब्बी इंप्लोज़न का शिकार हुई होगी। मानें पानी के दबाव के चलते अचानक बिखर गई। यात्रा शुरू होने के चंद घंटे बाद टाइटन से संपर्क टूट गया था। 18 जून को ही ओशेनगेट कंपनी की यह पनडुब्बी टाइटैनिक के मलबा दर्शन के अपने सफर पर रवाना हुई थी, लेकिन 2 घंटे के भीतर मुख्य जहाज (मदरशिप) से उसका संपर्क टूट गया था।
टाइटैनिक के मलबे की खोज सितंबर 1985 में यूएस नेवी के अफ़सर रॉबर्ट बलार्ड और उनकी टीम ने की थी। उसके बाद वैज्ञानिकों और एक्सप्लोरर्स ने रिसर्च के मकसद से कई बार दौरा किया। फिर 2010 के दशक में नई रेस शुरू हुई। टाइटैनिक मलबे तक पहुंचने और मलबे का दीदार करने की, कुछ कंपनियों ने टाइटैनिक टूरिज्म की शुरुआत की, ओशनगेट उन्हीं में से एक है। उसके पास टाइटन जैसी कुछ और पनडुब्बियां भी हैं।
पिछले कुछ वर्षों से टाइटन पनडुब्बी टाइटैनिक मलबे को दिखाने के लिए टूर का आयोजन कर रही थी, जिसमें एक यात्री का ही किराया करोड़ों में था। इस दुर्भाग्यशाली पनडुब्बी के इस बार के सभी पांच यात्री अरबपति थे और इसमें ओशेनगेट कंपनी के सीईओ स्टॉकटन रश खुद थे जो पनडुब्बी के कैप्टन भी थे, साथ ही यात्रियों में शहजादा दाऊद और उनके बेटे सुलेमान दाऊद, हामिश हार्डिंग, और पॉल-हेनरी नार्जियोलेट भी शामिल थे।
डीप-सी टूरिज्म का बढ़ता चलन
1943 में स्कूबा के आविष्कार के साथ ही समुद्र के अंदर पर्यटन की शुरुआत हुई। इस वक्त दुनिया में 60 लाख ट्रेंड एक्टिव स्कूबा डाइवर्स हैं, जो समुद्र के नीचे 1,000 फीट नीचे तक ले जा सकते हैं। पिछले कुछ सालों में हेलमेट डाइविंग का चलन बढ़ा है। इसमें स्विमिंग या स्कूबा ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती। आप तलहटी में चल सकते हैं। समुद्री जीवों के बीच घूम सकते हैं। हाल के दिनों में गहरे समुद्र को एक्सप्लोर करने के लिए सबमर्सिबल सवारी का चलन बढ़ा है। इसमें बड़ी पनडुब्बियों से लेकर छोटी लग्जरी पनडुब्बियां तक शामिल हैं ये ज्यादा गहराई तक जा सकती हैं।
1521 ईस्वी में फर्डिनेंड मैगलन ने प्रशांत महासागर की गहराई नापने का फैसला किया। उन्होंने 2400 फीट लंबी रस्सी को भारी ऑब्जेक्ट में बांधकर छोड़ना शुरू किया, लेकिन वो सतह तक नहीं पहुंच सकी। 19वीं सदी तक माना जाता था कि समुद्र में 1800 फीट से नीचे कोई जीवन नहीं है, लेकिन 1850 में माइकल सार्स ने खोजा कि समुद्र के 2600 फीट नीचे भी इको सिस्टम है। यहां तक कि समुद्र की तलहटी में भी जीवन है।
1930 के दशक में बाथिस्फेयर का आविष्कार हुआ। इन पनडुब्बियों के जरिए समुद्र की गहराई में जाने का सिलसिला शुरू हुआ। फ्रांस के एक्सप्लोटर जैक कॉस्तू ने 1943 में एक्वा लंग यानी स्कूबा का आविष्कार किया। इसकी मदद से कोई शख्स समुद्र की गहराई में जा सकता है।
1949 में जैक पिकर्ड पनडुब्बी की मदद से चैलेंजर डीप तक पहुंच गए। इसने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा। 21वीं सदी में कॉमर्शियल डीप सी सबमर्सिबल्स की शुरुआत हुई। इनके जरिए पर्यटक समुद्र के रहस्यों को अपनी आंखों से देख सकते हैं।
डीप सी टूरिज्म कितना खतरनाक?
अमेरिका स्थित नेशनल ओशियनिक एंड एटमॉस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन के मुताबिक महासागर का 80 फीसदी से ज्यादा हिस्से की मैपिंग नहीं हो सकी है और इसे एक्सप्लोर नहीं किया जा सका है। समुद्र तल काफी अव्यवस्थित है। यह पृथ्वी की सतह का 70 फीसदी हिस्सा कवर करता है। इसकी औसत गहराई 3,682 मीटर है।
वैज्ञानिकों का कहना है-
आप जितना नीचे जाएंगे हाइड्रोस्टेटिक दबाव (किसी वस्तु पर तरल द्वारा प्रति इकाई क्षेत्र में लगाया गया बल) उतना ही ज्यादा होगा। महासागर का सबसे गहरा बिंदु जिसे मारियाना ट्रेंच के तौर पर जानते हैं 11,034 मीटर गहरा है। यह प्रशांत महासागर के पश्चिमी भाग में स्थित है और समुद्री खाई का 1,580 मील लंबा (2,542 किलोमीटर) है।
अर्थ-साइंस रिव्यूज जर्नल में प्रकाशित एक स्टडी के मुताबिक दुनिया भर में समुद्र के कम से कम चार और गहरे हिस्से हैं। इसमें आर्कटिक महासागर में मोलॉय होल भी शामिल है। यह सतह से 5,669 मीटर नीचे स्थित है। यहां सुंडा ट्रेंच भी है, जिसे जावा ट्रेंच भी कहा जाता है, जो पानी के नीचे 7,290 मीटर की गहराई पर स्थित है।
दक्षिणी महासागर का सबसे गहरा हिस्सा, जो अंटार्कटिका को घेरता है, दक्षिण सैंडविच ट्रेंच के अंदर 7,385 मीटर की गहराई पर है। अंत में, मिल्वौकी डीप नामक प्यूर्टो रिको ट्रेंच साइट, अटलांटिक महासागर का सबसे गहरा हिस्सा है, जिसकी गहराई 8,408 मीटर है।
डिस्कवरी चैनल के एक्सपीडिशन अननोन शो के कैमरा ऑपरेटर ब्रायन वीड ने मई 2021 में टाइटन से एक ड्राइव की थी। उन्होंने बताया कि ड्राइव शुरू होते ही चीजें गलत होने लगी थीं। एक और यात्री के मुताबिक थोड़ी देर में सतह पर खड़े जहाज से संपर्क टूट गया था। इस तरह के डीप सी एडवेंचर जिसमें लिखा होता है कि वो अपनी मर्जी से जा रहे हैं और अगर इस दौरान उनकी जान भी चली जाती है तो इसके जिम्मेदार वो खुद होंगे।
इस तरह की ट्रिप पर जाने से पहले लोगों से कंसेंट फॉर्म पर साइन कराए जाते हैं, इसलिए कोई पुख्ता रेगुलेशन भी नहीं होते और कंपनियां सुरक्षा को ताक पर रखकर सिर्फ पैसे कमाने पर फोकस करती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की ज्यादातर एक्टिविटी इंटरनेशनल पानी में होती है, जहां किसी एक देश की सरकार का सीधा दखल नहीं होता है।
कुल मिलाकर बिना किसी रेगुलेशन और सुरक्षा उपायों के डीप सी टूरिज्म खतरनाक है और सिर्फ पैसा कमाने के उद्देश्य से इसे प्रोत्साहित नहीं किया जाना चाहिए ।
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में डायरेक्टर और टेक्निकल टूडे पत्रिका के संपादक हैं )
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