टाइम मशीन: हम कहानी के बिना जी नहीं सकते...आख्यानों में अनंत काल से दोहराई जा रही हैं दास्तानें
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विस्तार
किस्सागोई की जादुई दुनिया निराली है। बचपन में सुने बाबा-दादी या नाना-नानी के किस्से-कहानियां तो सभी की यादों में बसे होते हैं। आखिर क्या खास होता था, उन कहानियों में? दरअसल, उन कहानियों को सुनाने का अंदाज इतना दिलचस्प होता था, मानो दृश्य आखों के सामने चल रहे हों। ये किस्से ही बाद में यादों के स्टेशन बन जाते हैं, जो जिंदगी में सुकून ढूंढने वालों को पनाह देते हैं। ये कहानियां मनुष्य की शुरुआती सभ्यताओं से जुड़ी हैं। कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि भाषा की उत्पत्ति दो करोड़ साल से भी ज्यादा वक्त पहले हुई थी, जबकि लेखन का अस्तित्व करीब 3,200 ईसापूर्व का है। सदियों पुराने गुफा चित्र, प्राचीन चर्म पत्रों में उल्लिखित प्राचीनतम कहानी/कविताओं से विकसित होता हुआ साहित्य वर्तमान दौर में पहुंच गया है। तो इस सवाल का जवाब, कि हम कहानियां क्यों सुनते हैं, ये होगा कि क्योंकि हम इंसान हैं। हम कहानियां सुनाते हैं, जिससे हम ज्यादा मानवीय बनते हैं। कहानी सुनाना उस प्राचीन बटन को दबाने जैसा होता है, जिससे हम उस प्राचीन मूल मनुष्य की तरह बनते हैं, जो कारणों और उद्देश्यों की तलाश करते हुए खुद की खोज करने वाला है।
पूरा ब्रह्मांड एक कहानी है
मनुष्य का मन चीजों को संबंध के आधार पर समझता है। मन में आया हुआ हर विचार मनुष्यता का हायपरलिंक होता है, जो हमें वास्तविकता का विश्लेषण करने की अनुमति देता है। कोई कहानी एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक की प्रगति है, जो इसमें शामिल तथ्यों व घटनाओं को समझाती है। आप अपनी पसंदीदा पुस्तक का कोई पृष्ठ एकाएक खोलें और जो पहला वाक्य आपको दिखे, उस पर गौर करें। आप तुरंत समझ जाएंगे कि आप कहानी के किस बिंदु पर हैं, कौन-सी घटनाएं घट चुकी हैं और कहानी कहां खत्म होगी। इसी तरह संपूर्ण अस्तित्व को एक ही बिंदु में समाहित किया जा सकता है। यह पूरा ब्रह्मांड एक कहानी है, जो शुरू से अंत तक एक ही समय में मौजूद है। आप जिस पल का अनुभव कर रहे हैं, वह पृष्ठ खुल चुका है। हर बिंदु में पूरी कहानी समाहित है। हम सभी एक ही कहानी के हिस्से हैं। इससे कहानियों की गहरी प्रकृति का पता चलता है।
विचारों की एक प्रयोगशाला
कहानियां सुनाना वास्तविकता से बाहर आभासी दुनिया बनाने के लिए कल्पना का उपयोग करने की एक महत्वपूर्ण और अद्वितीय मानवीय क्षमता है। अभी तक इस बात का सबूत नहीं है कि पृथ्वी पर किसी अन्य प्रजाति के पास यह शक्ति है। कहानियों द्वारा बनाई गई आभासी दुनिया विचारों की प्रयोगशाला की तरह होती है, जिसमें प्रकृति विभिन्न चरम स्थितियों में काम कर सकती है। जब कई लोग एक कहानी सुन रहे होते हैं, तो वे एक साथ एक आभासी ब्रह्मांड में प्रवेश करते हैं।
जब तक सांस रहेंगी, तब तक कहानियां
जब तक लोग सांस लेंगे, बोलेंगे, लिखेंगे तब तक, कहानियां सुनाएंगे। कहानियां तब से मौजूद हैं, जब मनुष्य के पास उन्हें सुनाने की क्षमता भी नहीं थी। आदिम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी की जटिलताओं और उनके बीच भावनाओं के आदान-प्रदान ने कहानियों का निर्माण किया होगा। जब मनुष्यों ने बातचीत करना और सामाजिक संबंध बनाना शुरू कर दिया, तब कहानियों में जीवंतता आती गई और ये मनोरंजन और शिक्षा देने के उद्देश्यों को भी पूरा करने लगीं। मनुष्य सभ्यता के हर अंग में कहानियां उसकी सबसे भरोसेमंद साथी बनती आई हैं। बच्चों को जो कहानियां सुनाई जाती हैं, उनमें परिवार, पड़ोसी, खेत, पुस्तकें, न्याय, संस्कार, विश्वास, अच्छाई, बुराई, बुद्धि, अज्ञान, प्रकृति इत्यादि विषय हमेशा से मौजूद रहे हैं। समय के साथ इन कहानियों को सुनाने का तरीका बेशक बदल जाता हो, लेकिन कहानियों में छिपा संदेश हमेशा एक जैसा ही रहता है। अनगिनत व्यक्तिगत कहानियां एक साथ मिलकर मानवीय ज्ञान और भावनाओं की सामूहिक कहानी बनती हैं। कुछ कहानियां छोटी, तो कुछ लंबी, कुछ अस्पष्ट, तो कुछ अधूरी होती हैं। लेकिन ये सभी कहानियां हमारे विकास का हिस्सा हैं।
कहानियां जीवन की विरासत हैं
दुनिया का हर व्यक्ति एक कहानी है, जो जिंदगी को समझने का एक नया नजरिया देती है। जिंदगी दरअसल इसलिए ही अबूझ है, क्योंकि इसे समझने का नजरिया हर व्यक्ति का अलग-अलग होता है। इसके अलावा, हर एक व्यक्ति की कहानी, दूसरी तमाम कहानियों से गुंथी होती है। ऐसे में, हर एक कहानी कहीं न कहीं आपकी कहानी का ही हिस्सा होती है। ये कहानियां हमें जिंदगी का उद्देश्य खोजने और हमारे जीवन में परिपूर्णता लाने में मदद कर सकती हैं, अगर कोई उनसे सीखना चाहे तो। शायद इसीलिए कहानियाें को पीढ़ियों तक संजोकर रखे जाने का रिवाज मिलता है। कहानियां हमें खुद की दुनिया से बाहर निकलने और नई वास्तविकताओं का नए जोश के साथ सामना करने की सामर्थ्य देती हैं।
जिंदगी दरअसल एक बुफे की तरह है, जिसमें तरह-तरह के व्यंजन हमारे सामने पेश होते हैं। कुछ हम खाते हैं, कुछ खाकर छोड़ देते हैं और कुछ हम अपनी प्लेट में लेते ही नहीं हैं। रेस्तरां में शायद हम कभी इतने व्यंजनों का ऑर्डर न दें। यही जिंदगी की खूबसूरती है कि यह विकल्प देती है। लेकिन दुर्भाग्य से, हम अक्सर बड़ी तस्वीर पर ध्यान केंद्रित करने में इतने मशगूल हो जाते हैं, कि उन छोटे, लेकिन उतने ही कीमती क्षणों को भूल जाते हैं, जो हमारी कहानियों को आकार देते हैं। कहानियां जीवन की विरासत हैं, जो हर दिन, हर मिनट और हर सेकंड प्रकट होती हैं। कहानियां हमारे लिए सामूहिक अनुभवों का खजाना छोड़ती हैं। अगर हम इन अपरिहार्य विरासतों के लिए दिल और दिमाग को खोलते हैं, तो ये हमारी जिंदगी को गहराई से समृद्ध करती हैं।
संगीत और गति सार्वभौमिक हैं। मिथक और किवदंतियां भी सार्वभौमिक हैं। कहानियों के जरिये मिथकों व किवदंतियों में निहित गहरी सच्चाइयां समझ में आने लगती हैं। हालांकि, मनुष्य का गहनतम हिस्सा इन सच्चाइयों को पहले से जानता है। कहानियां मनुष्य को पुन: स्मरण कराती हैं, और, इसी में उसे संतुष्टि मिलती है।
कहानी सुनाना एक कला है, विज्ञान भी
हम कहानियां इसलिए सुनाते हैं, क्योंकि हम चीजों में, और इस बहाने जिंदगी में पैटर्न ढूंढते हैं। कहानी सुनाना एक कला भी है और विज्ञान भी। अव्यवस्थित दिखने वाली चीजों में पैटर्न ढूंढ लेता है, वह कलाकार है और वैज्ञानिक भी है। ये पैटर्न दरअसल भौतिक व आध्यात्मिक दुनिया के तर्क हैं। कहानियां इन दोनों दुनियाओं के तर्कों को एक-दूसरे के सामने स्पष्ट करती हैं। ये पैटर्न समझाते हैं, जोड़ते हैं, रिक्त स्थानों को भरते हैं और चीजों को समझने की दिशा में एक कदम देते हैं। कहानियां बताती हैं कि हम खुद को पूर्ण कैसे बना सकते हैं।