निवेश मंत्रा: इस साल बाजार से ज्यादा फायदा दे सकता है सोना, कीमतों में तेजी के कई प्रमुख कारण
चालू वर्ष की पहली छमाही यानी जनवरी-जून के बीच सोने ने 13.37 फीसदी रिटर्न दिया है। यह निफ्टी-50 शेयरों की तुलना में ज्यादा है, जिन्होंने 10.50 फीसदा का फायदा दिया है। सोने और बाजार के रिटर्न का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सोने और चांदी ने इस साल जबरदस्त तेजी हासिल की है। दोनों बहुमूल्य धातुओं ने कई बार नए रिकॉर्ड बनाए हैं। रुपये के आधार पर एमसीएक्स गोल्ड कांट्रैक्ट ने हर 10 ग्राम पर 8,400 रुपये का फायदा दिया है। सेंसेक्स ने इसी दौरान 2,279 अंकों की बढ़त हासिल की है। वैसे दोनों के निवेश में फायदा और घाटा संभव है, लेकिन सोना कई कारणों से जोखिम से सुरक्षा प्रदान करता है। साथ ही, महंगाई के दौर में भी यह प्रदर्शन करता है। हालांकि, निवेश के दोनों साधनों ने लंबे समय में अच्छा फायदा निवेशकों को दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ब्याज दरें इस साल नहीं घटती हैं तो सोने का रिटर्न 15 फीसदी के ऊपर जा सकता है, जबकि बाजार का मुनाफा इससे कम रहने का अनुमान है।
सोने में तेजी के कई प्रमुख कारण
हाल में सोने की कीमतों में तेजी के कई प्रमुख कारण हैं। इसमें मुख्य रूप से दुनियाभर के केंद्रीय बैंकों ने सोने की खरीदारी बढ़ाई है। वैशि्वक स्तर पर गोल्ड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड्स (ईटीएफ) में निवेश का रुझान भी बढ़ा है।
- वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल के मुताबिक, जून में लगातार दूसरे माह गोल्ड ईटीएफ में निवेश आया है, जो करीब 1.4 अरब डॉलर का रहा है।
- गोल्ड में यह तेजी ऐसे दौर में देखने को मिल रही है, जबकि दुनिया के अधिकांश देशों की वृद्धि दर में कमजोरी का माहौल है।
घरेलू-वैश्विक बाजारों में आगे बढ़ेंगे दाम
सोने की कीमतें फिलहाल घरेलू और ग्लोबल, दोनों बाजारों में रिकॉर्ड हाई के करीब चल रही हैं। कई देशों के बीच तनाव सोने में निवेश तेजी से बढ़ा है। आगे खासकर अमेरिका और चीन के बीच आपसी तनाव बने रहने के आसार हैं। इस्राइल का फिलिस्तीन पर हमला हो या यूक्रेन और रूस की जंग, उनके भी बहुत जल्द थमने के संकेत नहीं हैं।
ब्याज दरें घटने पर कम हो सकता है मुनाफा
आगे कई देशों के केंद्रीय बैंक महंगाई कम होने पर ब्याज दरों में कटौती कर सकते हैं। अगर ऐसा होता है तो सोने की कीमतें भी घट सकती हैं। फेडरल ओपन मार्केट कमेटी की अगली बैठक 31 जुलाई को होनी है। पिछले हफ्ते अमेरिका के मैक्रो इकनॉमिक डाटा में खराब आर्थिक प्रदर्शन के संकेत मिलने से इन उम्मीदों को ताकत मिली है कि सितंबर तक ब्याज दरों में राहत मिल सकती है।
सोने में निवेश में दिलचस्पी रखने वालों को अमेरिकी केंद्रीय बैंक के फैसलों और उसके चेयरमैन जेरोम पॉवेल के बयानों पर नजर रखनी चाहिए।
अर्चना पांडे, निवेश सलाहकार