इस देश में लैंगिक समानता की अनोखी मिसाल, लड़के-लड़कियों को संबोधित किया जाता है इस नये शब्द से
लैंगिक समानता के मामले में पहले पायदान पर खड़े स्वीडन में हाल के दिनों में यह माना जाने लगा है कि भगवान की चर्चा लैंगिक संबोधन के साथ नहीं होनी चाहिए। वे सब में हैं और सभी के लिए हैं। भगवान के स्त्री या पुरुष रूप में अवतरित होने से उनकी महत्ता ज्यादा या कम नहीं हो जाती, इसलिए जब भी किसी पवित्र आत्मा की चर्चा हो तो उन्हें स्त्री-पुरुष के संबोधन की जगह केवल भगवान (God) कहकर संबोधित किया जाए।
स्वीडन के कुछ चर्च भी ईसा मसीह के लिए अंग्रेज़ी शब्द ‘ही’के संबोधन की जगह ‘हेन’शब्द के प्रयोग को ज़्यादा सकारात्मक मानते हैं। ईसामसीह के लिए हेन शब्द को स्वीकार करने वाले मानते हैं कि उनकी शख़्सियत को लैंगिक पहचान देने की ज़रूरत नहीं है। लोगों को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि उनकी लैंगिक पहचान क्या है? वे केवल पुरुषों में नहीं बल्कि सभी मनुष्य में शामिल हैं। इसलिए इन्हें पुलिंग संबोधित करना ज़रूरी नहीं है।
स्वीडन ने हाल के वर्षों में लैंगिक भेदभाव दूर करने के लिए नए शब्द ‘हेन’का प्रयोग करना शुरू किया है। इस शब्द का उपयोग किसी व्यक्ति विशेष की लैंगिक पहचान कराए बग़ैर उसके संबंध में बात करने या जानकारियों के आदान प्रदान के लिए होता है। यह शब्द स्वीडन की आधिकारिक डिक्शनरी का सबसे नया शब्द है जिसका चलन यहां तेज़ी से बढ़ रहा है।
आपके लिए यह जानना भी दिलचस्प होगा कि यहां बच्चों को अंग्रेज़ी शब्द ‘ही’या ‘शी’की जगह अब ‘हेन’शब्द से पुकारना सबसे उचित और तार्किक माना जा रहा है। लेकिन स्वीडन में बच्चों के लिए हेन शब्द का प्रयोग क्यों बेहतर माना जा रहा है? यह प्रश्न आपके दिमाग में उठ रहा होगा।
दरअसल, चौंकिए नहीं, मैं मुर्ग़ियों की बात नहीं कर रही हूं। ना ही किसी तरह से यहां आपके लड़के-लड़कियों की तुलना मुर्ग़ी से हो रही है, बल्कि स्वीडन में बच्चों की लैंगिक पहचान के लिए अंग्रेज़ी के शब्द ही या शी की जगह नए शब्द हेन का उपयोग किया जा रहा है। इस देश ने लैंगिक भेदभाव मिटाने की दिशा में एक क़दम आगे बढ़कर इस नए शब्द का ईजाद किया है। और इस शब्द को अपनी आधिकारिक डिक्शनरी में जगह भी दी है।
आपको बता दूं कि स्वीडिश भाषा में होन (HON)शब्द लड़की और हन (HAN)शब्द लड़के के संबोधन के लिए होता है। लेकिन स्वीडन के लोग यह मानते हैं कि अगर किसी वक्तव्य में लैंगिक पहचान बताने की ज़रूरत नहीं है तो ज़बरन इन शब्दों का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।
अगर आप किसी से बातचीत के दौरान या लिखित तौर पर अपने बच्चों के बारे में जानकारी दे रहे हैं तो यह ज़रूरी नहीं कि उनकी लैंगिक पहचान भी कराई जाए। ऐसा करने से लोगों के मन में लड़के और लड़की को लेकर अलग-अलग छवि या विचार बनने लगते हैं जो कि लैंगिक समानता की राह में बाधा बनती है।
ठीक इसी तरह किसी नामीगिरामी शख़्सियत का क़द उसके लैंगिक पहचान से बड़ा होता है। इनके संबोधन में स्त्रीलिंग या पुलिंग संबोधन की ज़रूरत नहीं होती, इसलिए स्वीडिश भाषा की आधिकारिक डिक्शनरी में एक नये शब्द को जोड़ा गया है। इसे हेन(HEN)नाम दिया गया है। जो कि gender-neutral pronoun के तौर पर अपनाया जा रहा है।
इस शब्द का उपयोग यहां स्त्री या पुरुष दोनों के लिए होता है। जबकि ट्रांसजेंडर भी इससे संबोधित हो सकते हैं। कुछ साल पहले तलाशे गए इस नए शब्द पर भले ही कुछ लोगों को आपत्ति है, लेकिन इसकी लोकप्रियता यहां दिनों दिन बढ़ रही है। अब अगर किसी व्यक्ति से आप यहां यह पूछेंगे कि आपके कितने बच्चे हैं? या वे कौन सी कक्षा में पढ़ते हैं तो जवाब में यह नहीं मालूम होगा कि अभिभावक लड़के के बारे में बता रहे हैं या लड़की के बारे में। वे बच्चों को संबोधित करते समय हमेशा हेन का इस्तेमाल करते हैं। वे मानते हैं कि जब तक ज़रूरत नहीं हो लैंगिक पहचान कराने की ज़रूरत नहीं होनी चाहिए। यह शब्द ट्रांसजेंडर बच्चों को भी राहत देता है।
दरअसल, स्वीडिश अकादमी की डिक्शनरी को प्रत्येक दस साल में अपडेट किया जाता है। इनमें ऐसे नये शब्दों को शामिल किया जाता है जो मौजूदा समय के हिसाब से सरल और ज़्यादा प्रासंगिक हों। अब जबकि दुनिया भर में लैंगिक समानता की बात हो रही है तो ऐसे नये शब्द जोड़ने की ज़रूरत दुनिया को महसूस हो रही है। आपको जानकर हैरानी होगी कि स्वीडन के कुछ चर्च ईसा मसीह के लिए भी हेन के इस्तेमाल को स्वीकार रहे हैं। वे मानते हैं कि उनकी शख़्सियत को लैंगिक पहचान देने की ज़रूरत नहीं है।
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