फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Narendra Modi Birthday 2026: From Vadnagar to Prime Minister, Know His Remarkable Political Journey

जन्मदिन विशेष पीएम नरेंद्र मोदी: सहमति-असहमति के बीच भारत का प्रधानमंत्री होना कितना मुश्किल?

Thu, 17 Sep 2026 11:25 AM IST
Vinod Patahk विनोद पाठक
Updated Thu, 17 Sep 2026 11:25 AM IST
सार

PM Modi Birthday Special : प्रधानमंत्री बनना निश्चित रूप से कठिन है, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार खुद को साबित करते रहना शायद उससे भी ज्यादा कठिन है। सोचिए, एक ऐसा व्यक्ति जिसकी हर बात पर करोड़ों लोग प्रतिक्रिया देते हों, जिसके एक फैसले का असर पूरे देश पर पड़ सकता हो, जिसकी हर विदेश यात्रा, हर भाषण और हर निर्णय की चर्चा देश के साथ-साथ विदेशों में भी होती हो। ऐसी जिंदगी में निजी समय कितना बचता होगा?

विज्ञापन
Narendra Modi Birthday 2026: From Vadnagar to Prime Minister, Know His Remarkable Political Journey
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

Narendra Modi Birthday 2026: भारत में नरेंद्र मोदी को लेकर शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति हो, जिसकी कोई राय न हो। कोई उन्हें देश बदलने वाला नेता मानता है तो कोई उनकी नीतियों और काम करने के तरीके का कड़ा विरोध करता है। उनके चाहने वालों में उनके लिए गहरा लगाव दिखाई देता है। विरोध करने वालों की नाराजगी भी उतनी ही तीखी होती है। यही नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की खास बात है।

विज्ञापन


वे भारतीय राजनीति के ऐसे नेता बन चुके हैं, जिनसे लोग केवल राजनीतिक रूप से सहमत या असहमत नहीं होते, बल्कि भावनात्मक रूप से भी जुड़ते हैं। आज उनके जन्मदिवस पर इसलिए एक सवाल पूछा जा सकता है, आखिर नरेंद्र मोदी हैं क्या? सबसे बड़ा सवाल यह कि नरेंद्र मोदी बनना कितना मुश्किल है? इस सवालों का जवाब केवल चुनावी जीत, प्रधानमंत्री पद या राजनीतिक उपलब्धियों में नहीं मिलेगा। इसके लिए उनकी पूरी जीवन यात्रा को देखना होगा।
विज्ञापन


नरेंद्र मोदी बनना कितना मुश्किल है?

नरेंद्र मोदी की कहानी गुजरात के वडनगर से शुरू होती है। एक सामान्य परिवार का बालक, जिसने जीवन की शुरुआत किसी राजनीतिक विरासत के साथ नहीं की। न कोई बड़ा राजनीतिक परिवार, न सत्ता में कोई मजबूत सहारा और न ही ऐसा आर्थिक आधार, जो उसे सीधे राजनीति के शीर्ष तक पहुंचा देता।
विज्ञापन
विज्ञापन


युवा अवस्था में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ने के बाद उनका जीवन बदलता गया। प्रचारक के रूप में उन्होंने देश के अलग-अलग हिस्सों में घूमकर लोगों के बीच काम किया। साधारण जीवन, सीमित साधन और लगातार यात्रा उनके जीवन का हिस्सा रहे। यह जीवन आसान नहीं था।

प्रचारक के तौर पर किए ये काम

एक प्रचारक का काम मंच पर खड़े होकर भाषण देने भर का नहीं होता। लोगों के घर जाना, उनके साथ बैठना, उनकी समस्याएं सुनना, संगठन के लिए काम करना और जरूरत पड़ने पर अपनी सुविधा को पीछे रखना पड़ता है। शायद यही वह समय था, जिसने नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व को सबसे ज्यादा आकार दिया।

जब कोई व्यक्ति वर्षों तक कठिन परिस्थितियों में रहता है तो उसमें मुश्किलों से लड़ने की आदत बन जाती है। उसे आराम की उतनी जरूरत महसूस नहीं होती और वह लगातार काम करने का अभ्यस्त हो जाता है। नरेंद्र मोदी के जीवन का यही दौर बाद के वर्षों में उनके लिए बड़ी ताकत बना।

2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनें मोदी 

वर्ष 2001 में नरेंद्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया। यह कोई सामान्य समय नहीं था। गुजरात भूकंप की बड़ी त्रासदी से गुजर रहा था। हजारों परिवार प्रभावित थे और राज्य के सामने पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती थी। नरेंद्र मोदी के पास मुख्यमंत्री के रूप में लंबा प्रशासनिक अनुभव नहीं था, लेकिन जिम्मेदारी बहुत बड़ी थी। यहीं से उनकी राजनीतिक और प्रशासनिक यात्रा की एक नई परीक्षा शुरू हुई।

गुजरात के पुनर्निर्माण के साथ उन्होंने प्रशासन में अपनी अलग शैली बनाई। इसके बाद गुजरात में उनकी राजनीतिक पकड़ लगातार मजबूत होती गई और वे राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का बड़ा चेहरा बन गए।

मोदी के राजनीतिक जीवन का विवादित अध्याय

फिर आया वर्ष 2002। गुजरात दंगों की घटनाओं ने नरेंद्र मोदी के राजनीतिक जीवन को हमेशा के लिए एक विवादित अध्याय से जोड़ दिया। उन घटनाओं को लेकर आज भी राजनीतिक और सामाजिक बहस जारी है। मोदी के समर्थक उनके नेतृत्व का बचाव करते हैं, जबकि उनके आलोचक उनकी भूमिका और सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाते रहे हैं। यह भी उनके जीवन का वह दौर था, जब उन्हें देश के भीतर और बाहर भारी आलोचना का सामना करना पड़ा।

ऐसे समय में कोई व्यक्ति टूट सकता है, रास्ता बदल सकता है या लगातार दबाव के कारण अपने फैसलों से पीछे हट सकता है। नरेंद्र मोदी ने ऐसा नहीं किया। उन्होंने अपनी राजनीति को विकास और जनसंपर्क के मुद्दों पर और अधिक केंद्रित किया। गुजरात में लगातार चुनाव जीतने के बाद उनका कद राष्ट्रीय राजनीति में बढ़ता गया।

वरिष्ठ नेताओं के बीच पीएम पद की दावेदारी 

2014 में नरेंद्र मोदी जब प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार के रूप में सामने आए, तब दिल्ली की राजनीति में कई पुराने और स्थापित चेहरे मौजूद थे। मोदी की पृष्ठभूमि उनसे अलग थी। उन्होंने दिल्ली की राजनीतिक संस्कृति में घुलने-मिलने के बजाय सीधे जनता तक पहुंचने का रास्ता चुना। उनकी भाषा सरल थी और उनका संदेश सीधा- विकास, सुशासन, मजबूत भारत और आम आदमी के जीवन में बदलाव।

2014 में भाजपा को लोकसभा में पूर्ण बहुमत मिला। 2019 में पार्टी ने उससे भी बड़ी जीत दर्ज की। 2024 में नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इस बार सरकार गठबंधन के सहयोग से बनी। 

तीन बार बनें देश के प्रधानमंत्री

तीन लगातार लोकसभा चुनावों के बाद प्रधानमंत्री पद पर बने रहना भारतीय राजनीति में अपने आप में एक महत्वपूर्ण घटना है, लेकिन नरेंद्र मोदी की कहानी यहीं खत्म नहीं होती। एक समय गुजरात के वडनगर की गलियों में रहने वाला व्यक्ति आज दुनिया के बड़े राजनीतिक मंचों पर भारत का प्रतिनिधित्व करता है।

पिछले वर्षों में नरेंद्र मोदी की सक्रिय विदेश नीति और विभिन्न देशों के नेताओं के साथ उनके लगातार संवाद ने उन्हें वैश्विक राजनीति में भारत के प्रमुख चेहरों में शामिल किया है। अमेरिका से रूस तक, यूरोप से खाड़ी देशों तक और एशिया से अफ्रीका तक भारत के संबंधों को लेकर प्रधानमंत्री की सक्रियता दिखाई देती है। जी-20, ब्रिक्स, क्वाड, शंघाई सहयोग संगठन जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी भारत की भूमिका को आगे बढ़ाने की कोशिश उनके नेतृत्व की प्रमुख विशेषता रही है।

लगातार काम करना पीएम मोदी की विशेषता

नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व की सबसे बड़ी बात क्या है? शायद इसका सबसे सरल जवाब है- लगातार काम करते रहना। उनकी राजनीति से सहमत हों या असहमत, लेकिन यह स्वीकार करना पड़ेगा कि नरेंद्र मोदी लंबे समय तक लगातार काम करने वाले नेताओं में रहे हैं। उनका सार्वजनिक जीवन लगातार यात्राओं, बैठकों, भाषणों और फैसलों से भरा रहा है। वे आलोचना से घिरे रहे, लेकिन सार्वजनिक रूप से अपनी सक्रियता बनाए रखी। उनकी एक और खासियत जोखिम लेने की रही है।

नोटबंदी हो, सर्जिकल स्ट्राइक हो, अनुच्छेद 370 से जुड़े फैसले हों या स्वच्छ भारत जैसा बड़ा अभियान, उन्होंने ऐसे फैसले लिए जिनका राजनीतिक असर भी हुआ और जिन पर देश में तीखी बहस भी हुई। इन फैसलों के समर्थकों ने इन्हें साहसिक निर्णय बताया, जबकि आलोचकों ने इनके तरीके और परिणामों पर सवाल उठाए।

देश-विदेश तक पीएम मोदी का प्रभाव

आखिर नरेंद्र मोदी बनना कितना मुश्किल है? यह शायद इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण सवाल है। प्रधानमंत्री बनना निश्चित रूप से कठिन है, लेकिन प्रधानमंत्री बनने के बाद लगातार खुद को साबित करते रहना शायद उससे भी ज्यादा कठिन है। सोचिए, एक ऐसा व्यक्ति जिसकी हर बात पर करोड़ों लोग प्रतिक्रिया देते हों, जिसके एक फैसले का असर पूरे देश पर पड़ सकता हो, जिसकी हर विदेश यात्रा, हर भाषण और हर निर्णय की चर्चा देश के साथ-साथ विदेशों में भी होती हो। ऐसी जिंदगी में निजी समय कितना बचता होगा?

सार्वजनिक जीवन को अधिक महत्व

नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन को देखें तो ऐसा लगता है कि उन्होंने निजी सुविधा की तुलना में काम को अधिक महत्व दिया है। वर्षों तक लगातार यात्राएं, बैठकों का सिलसिला और चुनावी तथा सरकारी जिम्मेदारियां उनके जीवन का हिस्सा रही हैं, लेकिन नरेंद्र मोदी की यात्रा को समझने का एक और तरीका है। उन्होंने अपने जीवन में खुद को धीरे-धीरे एक बड़े उद्देश्य से जोड़ दिया। संघ के प्रचारक के रूप में संगठन के लिए काम किया। गुजरात में मुख्यमंत्री के रूप में प्रशासन संभाला। फिर राष्ट्रीय राजनीति में आए और प्रधानमंत्री बने। आज वे विश्व मंच पर भारत की बात रखते हैं। 

लगातार खुद को किया साबित

यह यात्रा एक दिन में नहीं बनी। इसके पीछे कई दशक हैं। संघर्ष हैं। आलोचनाएं हैं। असफलताओं और विवादों के दौर हैं। लगातार खुद को साबित करने की कोशिश है। नरेंद्र मोदी को चाहने वाले उनके जीवन को प्रेरणा की तरह देखते हैं। उनके विरोधी उनकी नीतियों और कार्यशैली पर सवाल उठाते हैं। दोनों दृष्टिकोण लोकतांत्रिक राजनीति का हिस्सा हैं। इतिहास किसी भी नेता का अंतिम मूल्यांकन बहुत बाद में करता है, लेकिन आज जन्मदिवस पर नरेंद्र मोदी की यात्रा को केवल प्रधानमंत्री के रूप में देखना शायद अधूरा होगा।


--------------------------------------
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed