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सतीश कौशिक की यादें: दुख में भी सतीश ने खुशियां ही बांटी और ये हमेशा हमारे दिलों में कायम रहेंगी

Thu, 09 Mar 2023 09:26 PM IST
Raza Murad रजा मुराद
Updated Thu, 09 Mar 2023 09:26 PM IST
सार

मैंने उन्हें कभी मायूस और तनाव में नहीं देखा। भले ही वो जिस्मानी तौर पर चले गए हैं लेकिन जब तक यह इंडस्ट्री रहेगी उनकी खुशगवार यादें हमेशा रहेगी। उनकी दी हुई खुशियां हमेशा हमारे दिलों में कायम रहेंगी।

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Satish Kaushik Death: Raza Murad remembers actor director writer Satish Kaushik
अलविदा सतीश कौशिक - फोटो : Twitter

विस्तार

सतीश कौशिक जैसे कलाकार भले सिनेमा ने बहुत देखे हों लेकिन उनके जैसा इंसान बिरले ही नजर आता है। सतीश का जीवन बताता है कि जिंदा रहने और जिंदादिली में कितना फर्क है। कुछ लोग जिंदा रहते हैं और कब आते हैं, कब चले जाते हैं पता ही नहीं चलता। कुछ लोग सतीश कौशिक जैसी मजबूत जिंदगी जीते हैं। वह अकेले मुंबई आए। उनके पास कोई सिफारिशी खत नहीं था। अपने बूते धीरे-धीरे करके उन्होंने अपनी मेहनत से इस शहर में जगह बनाई और एक समय ऐसा भी आया जब हिंदी सिनेमा में उनका सिक्का चलता था।

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खुशमिजाज और हंसमुख सतीश

सतीश कौशिक हमेशा ही दूसरों के चेहरे पर मुस्कान देते रहे हैं। ये उनकी प्रतिभा और आत्मविश्वास ही था, जिसके बलबूते सतीश कौशिक ने इंडस्ट्री में अपनी एक अलग जगह बनाई। बतौर अभिनेता, लेखक, निर्देशक उनमें सबसे खास बात जो थी, वह ये कि वह इतने खुशमिजाज और हंसमुख थे कि जब सेट पर आते थे तो माहौल ही एकदम बदल जाता था। हंसी के फव्वारे छूट जाते थे। उनकी आंखों में हमेशा एक शरारत और चमक होती थी। चेहरे पर मुस्कुराहट होती थी।

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सतीश कौशिक ने अपना दुख कभी किसी के साथ साझा नहीं किए। उनकी जिंदगी में बहुत बड़ी ट्रैजेडी हुई जब उनका दो साल का बेटा गुजर गया था। किसी मां-बाप के लिए इससे बड़े सदमे की बात नहीं हो सकती थी कि उनकी पहली औलाद उनकी आंखों के सामने इस दुनिया से चली जाए। उन्होंने अपना दुख किसी से नहीं बांटा।
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अगर कुछ उन्होंने बाटा है तो अपनी खुशियां ही बांटी है। अपने सेंस ऑफ ह्यूमर के बल पर उन्होंने अपने आसपास जो भी आया, सबको खुश किया।

नशा पिलाकर तो सबको गिराना आता है,
मजा तो तब है जब गिरतों को थाम लें...

Satish Kaushik Death: Raza Murad remembers actor director writer Satish Kaushik
'रूप की रानी चोरों का राजा', 'तेरे नाम', 'मुझे कुछ कहना है' जैसी फिल्में हमें सालों साल उनकी याद दिलाती रहेंगी। - फोटो : अमर उजाला

ये शेर सतीश कौशिक की शख्सियत के लिए ही मानो लिखा गया। हमेशा उन्होंने मायूस चेहरों पर मुस्कुराहटें बिखेरीं। सबको खुश किया और बड़े अच्छे-अच्छे किरदार निभाए। आज भी हमें पप्पू पेजर, कलंदर, मामा जी जैसे किरदार याद हैं।

सालों तक याद रहेंगी उनकी फिल्में

उन्होंने अच्छी-अच्छी फिल्में बनाईं। 'रूप की रानी चोरों का राजा', 'तेरे नाम', 'मुझे कुछ कहना है' जैसी फिल्में हमें सालों साल उनकी याद दिलाती रहेंगी। उनकी कुछ फिल्में चली और कुछ फिल्में नहीं भी चलीं। लेकिन फिल्में नहीं भी चली तो भी उनके व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया। मुस्कराते रहना ही उनकी आदत थी। मुझे उनके साथ 'राम लखन' जैसी फिल्म में काम करने का मौका भी मिला।

सतीश कौशिक जिंदगी में हर तरह से कामयाब रहे। उन्होंने जो भी अपनी जिंदगी में हासिल किया, अपनी मेहनत, व्यवहार और प्रतिभा के बल पर हासिल किया। मेरे बहुत ही अच्छे दोस्त थे। मिमिक्री भी वह बहुत अच्छी करते थे।

मैंने उन्हें कभी मायूस और तनाव में नहीं देखा। भले ही वो जिस्मानी तौर पर चले गए हैं लेकिन जब तक यह इंडस्ट्री रहेगी उनकी खुशगवार यादें हमेशा रहेगी। उनकी दी हुई खुशियां हमेशा हमारे दिलों में कायम रहेंगी।

 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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