सानिया मिर्जा: भारतीय टेनिस की वह पोस्टर गर्ल, जो चुनौतियों के इंतजार में रहतीं हैं
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भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा का यूक्रेन की नादिया किचेनोक के साथ होबार्ट इंटरनेशनल महिला युगल का खिताब जीतना भारतीय खेलों और खासकर भारतीय टेनिस के लिए एक बेहद उम्दा खबर है। मां बनने के बाद टेनिस कोर्ट पर लौटने वाली सानिया के लिए ये वापसी किसी फिल्मी स्किप्ट की तरह ही है। सानिया मां बनने के बाद दो साल टेनिस से दूर थीं। पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से निकाह करने वाली सानिया ने 2018 में इजहान को जन्म दिया। उन्होंने अक्तूबर 2017 में आखिरी टूर्नामेंट खेला था।
दरअसल, 34 साल की सानिया की पूरी जिंदगी की कहानी असल होने की बजाए काल्पनिक ही लगती है। करीब एक साल पहले सानिया ने एलान किया कि उनकी जिंदगी पर भी फिल्म बनने का काम शुरु हो चुका है और इसके लिए उनका करार रॉनी स्क्रूवाला के साथ भी हो चुका है।
भारत में मिल्खा सिंह, मैरी कॉम और महेंद्र सिंह धोनी समेत कई खिलाडियों के जीवन पर फिल्में बन चुकी हैं और साइना नेहवाल समेत कपिल देव और कई तमाम खिलाड़ियों के जीवन पर फिल्में बन भी रहीं हैं। लेकिन, सानिया मिर्जा के करीब डेढ़ दशक के करियर को देखें तो कोर्ट के अंदर से ज्यादा उन्होंने कोर्ट के बाहर सुर्खियां बटोरीं और उनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आए, जिन्हें कोई भी निर्देशक रुपहले पर्दे पर बहुत पहले ही शानदार तरीके से उतार सकता था।
2016 में रियो ओलंपिक्स के दौरान सानिया और रोहन बोप्पना का मैच देखने के लिए स्टेडियम में हजारों की संख्या में भारतीय पहुंचे थे। मैं भी प्रेस बॉक्स में मौजूद था। उम्मीद थी कि ये जोड़ी भारत को एक पदक दिला सकती है। पूरे मैच के दौरान सानिया-सानिया का शोर ऐसे मच रहा था मानो वानखेडे स्टेडियम में सचिन-सचिन का नारा गूंज रहा हो। सानिया मिर्जा भले ही क्रिकेटर नहीं है, लेकिन भारत में उनकी हस्ती किसी क्रिकेटर से कम भी नहीं है।
अगर सानिया को समझना हो तो उनकी आत्म-कथा 'एस अगेन्स्ट ऑड्स' को जरूर पढ़ना चाहिए। कोर्ट के भीतर और बाहर अपने संघर्षों को सानिया ने जिस बेबाकी से बयान किया है, उसकी मिसाल भारतीय खेलों में बहुत कम है। 29 साल की उम्र में छह ग्रैंडस्लैम खिताब (तीन महिला युगल, तीन मिश्रित युगल) जीत चुकीं सानिया ने 16 साल की उम्र में ही विंबलडन जूनियर युगल खिताब जीता था। इसके बाद से ही भारतीय मीडिया ने उन्हें आने वाले भविष्य के लिए टेनिस की सबसे बड़ी उम्मीद बताई।
सचिन तेंदुलकर की ही तरह सानिया कभी भी उम्मीदों के दबाव में झुकी नहीं बल्कि उन्होंने अपना खेल ही बेहतर किया। उन्हें पता था कि भारत में क्रिकेट के दबदबे के बीच अपनी पहचान बनाने के लिए काफी कुछ करना पड़ेगा और उन्होंने बखूबी इसे किया। उस दौर में देश के कई टॉप न्यूज चैनलों में काम करते हुए मैनें देखा कि कैसे संपादक सानिया के ऊपर बनने आधे घंटे वाले खास कार्यक्रम के आइडिया को कितनी जल्दी हरी झंडी दे देते थे। सानिया न सिर्फ अपने खेल बल्कि अपने व्यक्तित्व के चलते स्टार थीं। स्टार क्रिकेट खिलाड़ियों की तरह सानिया के भी अपने जलवे ते जो बेहद आसानी से इंटरव्यू के लिए तैयार नहीं होती थी.
कुछ साल पहले सानिया ने अपनी युगल जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस के साथ लगातार 41 मैच जीते, और युगल टेनिस की रैंकिंग में अव्वल पायदान तक पहुंचीं। सानिया की आत्मकथा में प्रस्तावना लिखने वालीं मार्टिना हिंगिंस ने सानिया को खतरनाक फोरहैंड वाली बेहतरीन खिलाड़ी बताया था। भारत के एक और टेनिस स्टार और मिश्रित युगल में उनके जोड़ीदार रहे महेश भूपति ने भी उसी किताब में लिखा है कि भारतीय खेलों का चेहरा बदलने में सानिया का अहम योगदान है और ये बातें सिर्फ अपने साथी खिलाड़ियों की तारीफ में कसीदे जाने वाली महज बातें नहीं है। हकीकत हैं।
हां, ये भी सच है कि टेनिस के अलावा सानिया की निजी जिंदगी भी हमेशा बहुत चर्चा में रही, चाहे वह उनके खिलाफ फतवा जारी होने के बारे में हो, उनके ऑपरेशन से जुड़ी बात हो, उनकी पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी की बात हो, या शादी से पहले सेक्स को लेकर उनकी टिप्पणी का मामला हो। सानिया मिर्जा ने खुद माना कि पूरी दुनिया ने उन्हें सिर्फ एक टेनिस खिलाड़ी के तौर पर नहीं देखा।
विंबलडन में मेरी टीशर्ट पर चर्चा हुई तो अमेरिकी ओपन में नथ पर... मैं जो कुछ भी पहनती, उसे बगावत का प्रतीक मान लिया जाता...शायद विदेशी मीडिया ने एक युवा भारतीय लड़की को पहले इस मुकाम पर नहीं देखा था या मैं एक पारंपरिक भारतीय लड़की के अमेरिकियों के मानदंड पर खरी नहीं उतरती थी...
एक वक्त ऐसा भी रहा कि सानिया फैशन आइकॉन भी बनीं। सानिया की नथ (नोज रिंग) जल्द ही भारत में काफी लोकप्रिय हुई और बाजार में सानिया नोज रिंग के नाम से बिकने लगी...युवा लड़कियों में इसका काफी क्रेज था, लेकिन इस शोहरत के सिक्के का एक दूसरा पहलू भी था। खुद सानिया ने एक किस्सा बयान किया, जब उनकी बचपन की एक दोस्त विम्बल्डन में रोजर फेडरर या येलेना यांकोविच से बात करने के बावजूद उन्हें पहचान नहीं सकी, क्योंकि उसकी टेनिस में कोई रुचि नहीं थी! सानिया मिर्जा ने अपने करियर के दौरान कई विवादास्पद मुद्दों पर बड़े स्टैंड लिए। आप उनसे सहमत हों या असहमत, लेकिन एक खिलाड़ी होने के बावजूद साफ-साफ एक स्टैंड लेना भारत में बहादुरी से कम नहीं हैं। खासकर ओलंपिक्स से ठीक पहले टेनिस के भीष्म-पितामह लिएंडर पेस के खिलाफ सानिया ने जिस तरीके से अपनी बातें रखीं, वो सिर्फ एक बोल्ड और कामयाब खिलाड़ी ही कर सकती थी।
टेनिस के अलवा सानिया ने कई सामाजिक सुधार से जुडें कार्यक्रमों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया है। सुषमा स्वराज ने उन्हें अखबारों में कॉलम लिखने को प्रेरित किया ताकि वो जन्म से पहले लिंग के पहचान करने वाली कुरीतियों के खिलाफ लोगों को जागरुक कर सके। पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब मलिक से शादी के बाद सानिया को निजी तौर पर कई बार तानों का सामना करना पड़ा, लेकिन वो कभी भी अपनी भारतीयता को लेकर डिफेंसिव नहीं हुई।
सोशल मीडिया पर जब भी लोग भारत-पाक क्रिकेट मैचों के दौरान उन्हें खींचने की कोशिश करतें तो वो अपने ही निराले अंदाज में उनका जवाब देती। पाकिस्तानी मीडिया भी उन्हें भारत की बेटी होने के चलते ठीक-ठाक परेशान करता, लेकिन उनका सब्र तब टूटता जब लगातार शोएब मलिक से उनके तलाक की अटकलें की प्लांट कराई जाती थी। सानिया की कामयाबी सिर्फ उनकी कामयाबी नहीं है। उनके पिता इमरान मिर्जा और मां नसीमा ने भी अपने बेटी को इस मुकाम तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई है।
1993 में जुलाई के पहले हफ्ते में टीवी पर स्टेफी ग्राफ को विंबलडन का खिताब जीतते देख इमरान मिर्जा ने अपनी 6 साल की बेटी की पीठ थपथपाते हुए ये कहा कि कितना मजा आएगा अगर सानिया भी
पेशवर टेनिस खिलाड़ी बनें और विंबलडन में खेलें। 90 के दशक में किसी पिता का ऐसा सोचना भी एक बड़ी बात थी, लेकिन अमेरिका से लौटकर हैदराबाद में बसने वाली सानिया की मां नसीमा ने ठाना कि अगर बेटी को टेनिस खिलाड़ी बनाना है तो वो कुछ भी करेंगी।
2005 में जब प्रतिष्ठित टाइम मैगजीन ने सानिया को एशिया की एक हीरो में से एक बताया तो ये साफ हो गया था कि इस लड़की ने अकेले अपने बूते महिला टेनिस की पूरी तस्वीर बदल डाली। अब 15 साल बाद मां बनने के बाद टेनिस कोर्ट पर शानदार वापसी करने वाली सानिया भारत की उन तमाम मां के लिए रोल मॉडल बनेंगी, जिन्हें अक्सर ये कह दिया जाता है करियर को छोड़ों, घर पर ध्यान दो।
सानिया ने खुद माना है कि उन्हें प्रेरणा किम क्लाइस्ट्जर्स और सेरेना विलियम्स जैसे खिलाड़ियों से मिली कि कैसे मां बनने के बावजूद शानदार वापसी की जा सकती है। राजीव गांधी खेल रत्न, पद्म भूषण और अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित सानिया ने मां बनने के बाद 26 किलो वजन बढ़ गया था, लेकिन खिलाड़ी के तौर पर फिर से मैदान में उतरने के लिए सानिया ने इस अतिरिक्त वजन को भी जल्द खत्म किया। सोशल मीडिया पर वो लगातार इस बात की अपडेट देती रहीं कि किस तरह से वो अपनी फिटनेस पर जोरदार तरीके से काम कर रहीं हैं।
सानिया अगर इस साल वापसी नहीं भी करतीं और रिटायर हो जातीं तो भारतीय खेलों के इतिहास में उनकी विरासत पर कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन वापसी कर नाकाम होने से एक स्वर्णिम यात्रा पर थोड़ी धूल पड़ सकती थी। ये एक जोखिम भरा फैसला हो सकता था, लेकिन पूरे करियर में जोखिम की परवाह सानिया ने कब की थी जो अब करतीं।
2007 में 20 साल की उम्र में सानिया मिर्जा पहली भारतीय महिला बनीं जो टेनिस रैंकिग के सिंगल्स में टॉप 30 में थी। पिछले 13 सालों में अब भी कोई उनके करीब नहीं पहुंचा हैं। पिछले एक दशक से भारतीय मीडिया ये सवाल ढूंढ रहा है कि सानिया के बाद कौन जिसका जवाब अभी तक नहीं मिल पाया है। शायद, मां बनने के बाद ऑस्ट्रेलिया में जीती गई ये ट्रॉफी उन गुमनाम युवा खिलाड़ियों को भी प्रेरित करने के काम आए जो अगली सानिया बन पाए।
मां बनने के बाद भी सानिया के आक्रामक तेवर नहीं बदलें हैं। हाल ही में जब किसी ने एयरपोर्ट में उनसे ये पूछा कि उनका बच्चा कहां हैं तो उन्होंने तपाक से जवाब दिया कि जब शोएब वेस्टइंडीज में खेल रहें होतें है तो उनसे ये सवाल क्यों नहीं पूछा जाता है?
साल 2020 का आगाज सानिया ने शानदार तरीके से किया है, लेकिन वो यहीं रुकने वाली नहीं हैं। उनका सपना ओलंपिक में पदक जीतने का है। अगले 6 महीने में अगर सानिया टोक्यो में पहुंचतीं है और मेडल जीतती हैं तो समझिए कि 2021 में पर्दे पर उनकी फिल्म भी आ जाएगी!
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