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देश की सबसे बड़ी पक्षी त्रासदी, सांभर झील बनी क़ब्रिस्तान

Thu, 21 Nov 2019 12:57 PM IST
Devendra Suthar देवेंद्र सुथार
Updated Thu, 21 Nov 2019 12:57 PM IST
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sambhar lake death of migratory birds
राजस्थान के सांभर लेकर में रहस्यमयी कारण से मर रहे पंछी - फोटो : PTI

पक्षियों का स्वर्ग कही जाने वाली व देश की सबसे बड़ी नमक झील सांभर झील में अज्ञात बीमारी से पक्षियों के मरने का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। रविवार को राजस्थान के नागौर जिले में झील के नावां एरिया से 5309 मृत पक्षी निकाले गए और 67 पक्षी रेस्क्यू किये गए। वहीं, जयपुर जिले की सीमा से 386 पक्षी मृत मिले हैं। यहां 33 पक्षियों को जिंदा निकाला गया, जिनका इलाज जारी है। अनुमान लगाया जा रहा है कि झील क्षेत्र में मृत पक्षियों की संख्या और बढ़ सकती है।

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जहां भी वन विभाग की टीम पहुंच रही है, वहां जगह-जगह मरे पक्षी मिल रहे हैं। अब तक सांभर झील में 17, 270 पक्षी मारे जा चुके हैं। मारे गये पक्षियों में करीब 25 प्रजातियों के प्रवासी पक्षी शामिल है। इनमें सबसे ज्यादा करीब 40 प्रतिशत नॉरहन शॉवलर और 20 प्रतिशत नॉरहन पिटेंल हैं। इसके अलावा कॉमन हील, गोडवेल, ब्लैक ब्राउनहैडेड गल, पलास गल, गल बीनर्टन, पायड एवोसेड, रफ, कॉमन रेड सैक, मार्स सेड पाइपर, बुडसेड पाइपर, कॉमन सेड पाइपर, लेसर सेड प्लाओर, कॉमन कुट, ब्लैक विड स्टील, रूडी सेल डक, लेसर विसलिग डक, टमनिक स्टीट, क्रीक, सिल्वर बील, मलार्ड और नोबिल डक भी शामिल है।
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sambhar lake death of migratory birds
जहां भी वन विभाग की टीम पहुंच रही है, वहां जगह-जगह मरे पक्षी मिल रहे हैं। - फोटो : PTI
झील का 20-25 किमी का क्षेत्र इससे प्रभावित है। हालांकि स्थानीय लोगों के मुताबिक, पूरी झील ही इसकी चपेट में है। बीकानेर के एपेक्स सेंटर फॉर एनिमल डिजीज के प्रोफेसर एके कटारिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि जयपुर में बड़ी संख्या में पक्षियों की मौत एवियन बॉटलिज्म की वजह से हुई है। यह न्यूरोमस्कुलर बीमारी एक ऐसे जहर की वजह से होती है जो क्लॉस्ट्रोडियम बैक्टीरिया में पाया जाता है।

गौरतलब है कि जयपुर से 80 किलोमीटर दूर स्थित ये झील राजस्थान के नमक उत्पादन का मुख्य जरिया है। सांभर झील हर साल 196000 टन शुद्ध नमक पैदा करता है। नमक उत्पादन का प्रबंधन सांभर साल्ट्स लिमिटेड (एसएसएल) द्वारा किया जाता है, जो हिन्दुस्तान साल्ट्स लिमिटेड और राज्य सरकार का एक संयुक्त उद्यम है। सांभर झील को 'थार रेगिस्तान का उपहार' भी माना जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल के दौरान पुजारी सुक्राचार्य यहां रहते थे। उन्होंने अपनी बेटी देवयानी का भारत के सम्राट राजा ययती से उसका विवाह किया था। देवयानी मंदिर अभी तक यहां स्थित है।

 

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मृत पक्षियों को झील के पास ही गहरे गड्ढा खोदकर दबाया जा रहा - फोटो : PTI

सांभर का ऐतिहासिक महत्त्व इस बात का भी है कि अकबर और जोधाबाई की शादी यहीं पर हुई थी। सर्दियों की शुरुआत होते ही हजारों मील दूर से उड़ान भरकर विदेशी पक्षी मेहमान बनकर विश्वविख्यात सांभर झील की ओर आते हैं, लेकिन इस बार लंबा सफर तय कर यहां आए इन बेजुबान पक्षियों को क्या पता था कि भोजन-पानी की तलाश में इस ओर रुख करने के बाद वापसी नामुमकिन होगी। सांभर झील में बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो आते हैं जिसमें मुख्य रूप से ग्रेटर फ्लेमिंगो व लेसर फ्लेमिंगो आते हैं और इस साल बड़ी संख्या में फ्लेमिंगो आए हैं लेकिन इनमें फ्लेमिंगो मरे नहीं मिले हैं। हालांकि कुछ फ्लेमिंगो बीमार हालत में जरूर पाए गए हैं जिनकी जांच की जा रही है।

ऐसे में पक्षीविदों का कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में पक्षियों के मरने का एक कारण पानी में विषैला पदार्थ मिलना हो सकता है। जिससे पक्षियों की मौत हो रही हो। वहीं कोई रोग भी फैल सकता है, जिससे पक्षी मर रहे हैं लेकिन वह रोग ऐसा है जो कि फ्लेमिंगो पर असर नहीं कर पा रहा। सांभर झील में प्रवास कर रहे हंसावरों का झुंड यहां अपने आप को इतना सुरक्षित रखते हैं कि आम आदमी का इनके पास जाना संभव नहीं है।

यह झील में ऐसे स्थान पर रहते हैं जो कि गीले कीचड़ में लगभग पांच किलोमीटर अन्दर है। वहां पक्षियों की मौत हुई है लेकिन टीम का पहुंचना बेहद चुनौतीपूर्ण है। दलदल के क्षेत्र में अंदर पांच किलोमीटर में भी कुछ पक्षी तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे हैं लेकिन उन्हें निकालना मुश्किल है। सांभर झील में इतनी बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आते हैं लेकिन वन विभाग की ना तो यहां पर कोई चौकी है और ना ही इन पक्षियों की सुरक्षा के कोई उपाय किए गए हैं। वन विभाग के कर्मचारी भी कभी कभार ही यहां आते हैं जिससे झील में विदेशी पक्षियों का शिकार भी होता है।

बहरहाल, सांभर झील में मातम पसरा हुआ है। मीलों की दूरी तय करके आने वाली पक्षियों को मौत का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासान मृत्यु का वास्तविक कारण जानने के लिए रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है। पक्षियों की इतनी बड़ी संख्या में हुईं मौतें कई सवाल खड़े करती हैं कि अब और इस तरह की कितनी मौतें देखनी बाकी है। यदि पक्षी इसी तरह से मरते रहे तो इतिहास में नमकीन पानी के कारण मशहूर मानी जाने वाली सांभर झील पक्षियों की सबसे बड़ी मरणगाह के रूप में बदनाम होते देर नहीं करेगी। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 

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