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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा माह 2021: देश मे बढ़ते सड़क हादसे...दोषी कौन?

Fri, 19 Feb 2021 08:46 AM IST
नरेंद्र भारती नरेन्द्र भारती
नरेन्द्र भारती Published by: नरेंद्र भारती Updated Fri, 19 Feb 2021 08:46 AM IST
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road accident in india in hindi how to prevent road accidents
मध्यप्रदेश के सीधी में एक बस के 22 फुट गहरी बाणसागर नहर में गिरने से 47 यात्रियों की दर्दनाक मौत से हर भारतीय गमगीन है - फोटो : ANI

प्रतिवर्ष सड़क सुरक्षा हेतू करोडों रुपया बहाया जाता है। मगर नतीजा वही ढाक के तीन पात ही निकलता है। अगर सही तरीके से पैसा खर्चा किया जाए तो देश में घटित होने वाले इन भीषण हादसों पर विराम लग सकता है। मगर ऐसा नहीं हो रहा है हर वर्ष लाखों लोग मारे जा रहे हैं।

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16 फरवरी 2021, मंगलवार को सुबह करीब साढे़ सात बजे मध्यप्रदेश के सीधी में एक बस के 22 फुट गहरी बाणसागर नहर में गिरने से 47 यात्रियों की दर्दनाक मौत से हर भारतीय गमगीन है। मृतको में 12 छात्र थे, जो रेलवे की परीक्षा देने सतना जा रहे थे। सात लोगों को बचा लिया है। 32 सीटर बस में 60 लोग सवार थे। हादसे का कारण तेज रफतार माना जा रहा है। बस का चालक तैरकर नहर से बाहर आ गया
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पुलिस से उसे हिरासत मे ले लिया है। सरकार ने मुआवजे का ऐलान कर दिया है। देश में बढ़ते सड़क हादसों को रोकने के लिए समय रहते संज्ञान लेना होगा। 1जनवरी 2021 से लेकर 16 फरवरी 2021 तक दो महीनों में हजारों सड़क हादसे हो चुके हैं। वर्ष 2021 के पहले सप्ताह से ही लोग सड़क हादसों में मारे जा रहें है। प्रतिदिन हादसों में लोग मारे जा रह हैं।
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11 से 20 जनवरी 2021 तक पूरे भारतवर्ष में सड़क सुरक्षा सप्ताह मनाया गया। मगर ऐसे आयोजन औपचारिकता भर रह गए हैं। क्योकि प्रशासन द्वारा लोगों को इन सात दिनों में यातायात नियमों के बारे में बताया जाता है फिर पूरा वर्ष लोग अपनी मनमानी करते हैं और यातयात नियमों का उल्लंघन करते हैं और मौत के मुंह में समाते जा रहे हैं। देश में हर चार मिनट में एक व्यक्ति सड़क हादसे में मारा जाता है। प्रतिदिन देश की सडकें रक्तरजित हो रही हैं। नौजवानों से लेकर बुजुर्ग काल का ग्रास बन रहे हैं।

आंकडें बताते है कि सड़क दुर्घटनाओं में भारत अन्य देशों के मुकाबले से शीर्ष पर है। 28 जुलाई 2018 को महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में शनिवार दोपहर को चालक के नियंत्रण खोने से एक बस 500 फुट खाई में गिर गई। हादसे में 33 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। मारे गए लोग विश्वविद्यालय के कर्मचारी थे। बस कोकण क्षेत्र में एक कृषि विश्वविद्यालय के इन कर्मचारियों को पिकनिक के लिए महाबलेश्वर ले जा रही थी।

पल भर में ही मौत की नींद सो गए। अभागे लोगों ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी इतनी दर्दनाक मौत होगी। अभी बीते 1 जुलाई 2018 को उतराखंड के गढ़वाल मंडल के पौड़ी जिले के नैनीडांडा विकास खंड के पिपली भौन मोटर मार्ग पर धूमाकोट के नजदीक यात्रियों से भरी एक बस के 70 फुट गहरी खाई में गिर जाने से 50 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई थी। बस में मरने वालों में 22 पुरुष तथा 17 महिलाएं और आठ बच्चे शामिल थे।

कुछ माह पहले एक भीषण हादसा पश्चिम बंगाल में हुआ था। मुर्शिदाबाद जिले के इस्माइलपुर में एक सरकारी बस के नदी में गिरने से 36 यात्रियों की मौत हो गई थी। यह बस नदी पर बनी रेलिंग तोड़कर नदी में जा गिरी थी। 9 यात्रियों ने तैर कर अपनी जान बचा ली तथा 9 लोग घायल हो गए। बस में 60 यात्री सफर कर रहे थे। शराब पीकर वाहन चलाना ही हादसों का मुख्य कारण माना जा रहा है। इसके कारण ही लाखों लोग सड़क हादसों में मौत का शिकार हुए हैं।

हादसों की सूची बढ़ती ही जा रही है। 26 अप्रैल को कुशीनगर में चालक की घोर लापरवाही से हुए एक हादसे में कई घरों के चिराग चिरनिंद्रा में सो गए थे। 2018 को एक भीषण हादसा कांगड़ा के नूरपुर के चेली में घटित हुआ था, जहां एक निजी स्कूल की बस के खाई में गिरने से 26 बच्चों समेत कुल 30 लोगों की मौत हो गई थी। अधिकतर बच्चे नर्सरी में पढ़ने वाले थे। इस हादसे में मरने वालों में बस का चालक ,एक शिक्षक व एक युवती शामिल थी। एक तेज रफ्तार मोटर साईकल सवार को बचाने के चलते यह हादसा हुआ था।

हादसा इतना भंयकर था कि 24 बच्चों ने घटनास्थल पर ही दम तोड दिया था। यह दर्दनाक हादसा सुबह छह बजे के करीब हुआ। यात्रियों ने सपने में भी नहीं सोचा था कि यह उनका आखिरी सफर होगा। लापरवाही के कारण हजारों सड़क हादसे हो रहे हैं। सडक हादसे अभिशाप बनते जा रहे हैं। पिछले दिनों पंजाब में एक जीप व ट्रक की आपसी टक्कर में दर्जनों स्कूली अध्याापक बेमौत मारे गए थे।

सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि...

road accident in india in hindi how to prevent road accidents
सड़क हादसों को रोकने के लिए एक नीति बनानी होगी - फोटो : ANI

बीते साल 2020 में कुछ महीनों में तो हादसों पर पुरी तरह लगाम रह पर लॅाकडाउन के खुलते ही हादसों में वृद्वि हो गई। सड़क हादसों का सिलसिला पूरा साल अनवरत चलता रहा और लाखों लोग हादसों का शिकार होते रहे। हजारों लोग अपंग हो गए जो ताउम्र हादसों का दंश झेलेंगे। 2021 में भी सड़क हादसे थमने का नाम नहीं ले रहे हैं तथा प्रतिदिन दुर्घटनाओं का आंकड़ा बढ़ता ही जा रहा है। इसे सरकारों की लापरवाहीे की संज्ञा देना गलत नहीं होगा।

ज्यादातर सड़क हादसे सर्दियों में होते हैं क्योकि धुंध के कारण आपसी टक्कर में दुर्घटनाएं होती हैं। देश की सड़को पर लाशों के चिथड़े बिखर रहे हैं। पंजाब, दिल्ली व उतरप्रदेश व हिमाचल प्रदेश में दर्जनों हादसों में सैकड़ों लोग मारे जा रहे हैं। मगर राज्यों की सरकारों को इससे कोई सरोकार नहीं है। देश के प्रत्येक राज्यों में हादसों की दर बढ़ती जा रही है। दुर्घटना के बाद मुआवजे की राशि बांटने में व समाचार पत्रों में सुखिर्यों में रहने में प्रशासन व नेता लोग आगे रहते हैं। नेताओं द्वारा घड़ियाली आंसू बहाए जातें है।

सड़क हादसों को रोकने के लिए एक नीति बनानी होगी। जागरूकता अभियान चलाने होगें। सरकार को यातयात नियमों से संबधित शिविरों का आयोजन करना चाहिए। आज करोड़ों के हिसाब से वाहन पंजीकृत हैं, मगर सही ढंग से वाहन चलाने वालो की संख्या कम है। क्योंकि आधे से ज्यादा लोगों को यातयात के नियमों का ज्ञान तक नहीं होता।

पुलिस प्रशासन चालान काटकर अपना कर्तव्य निभा रही है, मगर चालान इसका हल नहीं है। इसका स्थाई समाधान ढूंढना होगा। बिना हैलमैट के नाबालिग से लेकर अधेड़ उम्र के लोग वाहनों को काफी तेज रफ्तार में चलाते हैं और दुर्घटनाओं का शिकार होते हैं। जानबूझकर व नशे की हालत में दुर्घटना करने वाले चालकों के लाईसैंस रद्द करने चाहिए। ज्यादातर हादसे में नाबालिग चालक ही मारे जाते हैं।

प्रशासन की लापरवाही के कारण भी इसमें साफ झलकते हैं। आज ज्यादातर युवा व लोग शराब पीकर व अन्य प्रकार का नशा करके वाहन चलाते है, नतीजन खुद ही मौत को दावत देते हैं। भले ही पुलिस यंत्रों के माध्यम से शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर शिकंजा कस रही है, मगर फिर भी लोग नियमों का उल्लघन करने से बाज नहीं आ रहे हैं। राज्यों की सरकारों द्वारा पुलिस को दी गई हाईवे पैट्रोलिंग की गाड़ियां भी यातायात को कम करने में नाकाम साबित हो रही हैं।

बढ़ती सड़क दुर्घटनाओें के अनेक कारण हैं। सर्वेक्षण में यह बात सामने आई है कि 80 प्रतिशत हादसे मानवीय लापरवाही के कारण होते हैं। लापरवाह लोग सीट बैल्ट तक नहीं लगाते और तेज रफतार में वाहन चलाते हैं। देश में सड़क हादसों में स्कूली बच्चों के मारे जाने के हादसे भी समय- समय पर होते रहते हैं। लापरवाह चालको को सजा देनी चाहिए ताकि मासूम बेमोत न मारे जा सकें। अक्सर देखा गया है कि वाहन चालकों के पास प्राथमिक चिकित्सा बाक्स तक नहीं होता है। 

ओवरलोडिंग से भी ज्यादातर हादसे होते हैं। बेलगाम हो रहे यातायात पर लगाम लगाना सरकार व प्रशासन का कर्तव्य है। लोगों को भी इसमें सहयोग करना होगा तभी इस समस्या का स्थाई हल हो सकता है। यदि लोग सही तरीके से यातायात नियमों का पालन करते हैं तो सड़को पर हो रहे मौत के तांडव को रोका जा सकता है। लापरवाही के कारण देश में दुर्घटनाओं का कहर बरपता रहेगा।

मावन जीवन को बचाना होगा क्योंकि मानव जीवन दुर्लभ है। केंद्र सरकार को इस पर गौर करना होगा तथा देश में बढ रही सड़क दुर्घटनाओं पर रोक के लिए कारगर कदम उठाने होगें नहीं तो देश के प्रत्येक महानगरों व शहरों से लेकर गांवों तक हर रोज लाशें बिछती रहेंगी लोग मरते रहेंगें। सरकार को इन हादसों से सबक लेना चाहिए और व्यवस्था की खामियों को दूर करना चाहिए। सरकारों को अपना दायित्व निभाना चाहिए ताकि सड़क हादसों पर पूरी तरह रोक लग सके। यदि सरकारें ऐसे ही सोती रहेंगी तो देश की सड़कें मानव खून से लाल होती रहेंगी।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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