ऋषि सुनक और अक्षता: कितने ही रंग धनक के मन पर भी खिल सकते हैं..!
एक सहज तस्वीर, बिना उद्देश्य के जिसमें राजनेता की राजनीति नहीं थी, और ना ही किसी पीआर की तलब। वे एक विदेशी मेहमान से अधिक प्रेमी नज़र आए, कुछ कुछ वैसे ही जैसे कोई लड़का ठंड में अपनी जैकेट उतारकर अपनी प्रेमिका को पहना देता है, किसी फ़िल्म का सीन लगता है लेकिन असल में भी होना क्या मुश्किल है।
एक सहज तस्वीर, बिना उद्देश्य के जिसमें राजनेता की राजनीति नहीं थी, और ना ही किसी पीआर की तलब। वे एक विदेशी मेहमान से अधिक प्रेमी नज़र आए, कुछ कुछ वैसे ही जैसे कोई लड़का ठंड में अपनी जैकेट उतारकर अपनी प्रेमिका को पहना देता है, किसी फ़िल्म का सीन लगता है लेकिन असल में भी होना क्या मुश्किल है।
विस्तार
एक प्रेमी का सपना क्या? कि किसी बारिश में प्रेमिका के साथ एक छतरी के नीचे खड़ा रहे, उसे देखता रहे। कितने गीत तो इस पर लिखे गए और कितने ही दृश्य फ़िल्माए गए और क्या कमाल कि सब कम पड़ता है।
हर बार ये दृश्य वैसे ही ताज़ा लगते हैं जैसे क्षितिज से हर दिन कोई नया ही सूरज उगता हो। हर बार बारिश भी कुछ अलग ही संदेशे लेके आती है, वो होती भी इसलिए है कि लोग ऊपर की ओर आंख उठाकर देखें और महसूस करें कि कितने आयामों में और जिया जा सकता है, कितने रंग धनक के मन पर भी खिल सकते हैं आसमान पर ही नहीं।
फ़िलवक़्त, इजा़ज़त का गाना याद आ रहा है-
'एक अकेली छतरी में जब आधे-आधे भीग रहे थे,
आधे सूखे, आधे गीले...।’
बात ठीक है जब छतरी एक और लोग दो हों तो आधे-आधे भीगेंगे ही लेकिन जब ऋषि सुनक अपनी पत्नी अक्षता के साथ आधे भीग रहे थे तो देखने वाले पूरा-पूरा आनंद रहे थे। हाल ही में ये युगल भारत आया, अक्षरधाम मंदिर गए और बारिश शुरु हो गई। वे छतरी थामे बाहर निकल रहे थे और कैमरामैन ने तस्वीर ले ली। तस्वीर अब अलग-अलग कैप्शन और नज़रिए के साथ वायरल है। लोगों को श्वेत-श्याम जमाने के राज कपूर और नरगिस भी याद आ गए–
प्यार हुआ इक़रार हुआ..!
अवसर था जब वसुधैव कुटुम्बकम के ध्येय वाक्य के साथ शुरु हुए जी20 की मेजबानी भारत ने इस साल की। 3 दिन तक कार्यक्रम की तस्वीरें, वीडियो और उन पर बने मीम सोशल मीडिया पर छाए रहे। सबसे ज़्यादा ध्यान खींचा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक और उनकी पत्नी अक्षता ने।
दरअसल, ऋषि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही चर्चा में बने हुए हैं। उनके कुछ बयान विवादित भी रहे हैं। भारत यूं तो उनकी ससुराल भी है। जब वे यहां पहुंचे तो प्लेन से एक तस्वीर और वायरल हुई थी जिसमें अक्षता अपने पति की टाई ठीक कर रही हैं। उस पर लिखा जाने लगा कि-
'दामाद जी अंगना हैं पधारे।'
एक तस्वीर जो इतिहास के उस पार संजो ली गई-
ऋषि और अक्षता पर वैसे भी लोगों का ख़़ास ध्यान बना हुआ था। वे विदेशी होकर भी अपने से लगे। फिर जब उन्होंने कहा-
मुझे हिन्दू होने पर बहुत गर्व है- तो उन सबको सांप सूंघ गया जो इस देश में रहकर भी इसे खुलकर स्वीकार करने में संकोच करते हैं। ऋषि ने ये भी कहा कि अभी मैंने अपनी बहनों से राखी बंधवाई है और मुझे अफसोस है कि यहां आने की भागदौड़ में मैं जन्माष्टमी नहीं माना पाया। उनके ये बयान ध्यान खींच ही रहे थे कि वो दिल्ली की बरसती बारिश में अपनी पत्नी के साथ अक्षरधाम मंदिर पहुंच गए। फिर बारिश की तस्वीर ने सबका ध्यान खींचा।
एक सहज तस्वीर, बिना उद्देश्य के जिसमें राजनेता की राजनीति नहीं थी, और ना ही किसी पीआर की तलब। वे एक विदेशी मेहमान से अधिक प्रेमी नज़र आए, कुछ कुछ वैसे ही जैसे कोई लड़का ठंड में अपनी जैकेट उतारकर अपनी प्रेमिका को पहना देता है, किसी फ़िल्म का सीन लगता है लेकिन असल में भी होना क्या मुश्किल है।
जीवन की साधारण घटनाएं हैं पर लंबा असर छोड़ जाती हैं, इसलिए इस तस्वीर के साथ भी हर प्रेमी ने अपनी भावनाओं को जोड़ लिया होगा। फिर वो दुनिया के दो ताकतवर लोगों की एक आम तस्वीर है पर कई मायनों में ख़ास। भारतीय गरिमा पर हर तरह से ख़री उतरती हुई। सूट पहनी हुई एक लड़की जो दिल्ली में एक जगह पर अपने पति के साथ बारिश से निकलने की कोशिश में है या शायद कभी नहीं निकलने की कोशिश में?
ज़िंदगी अगर यूं ही प्रेम की मोहलत देती रहेगी तो फिर उससे बचना भी कौन चाहेगा। एक पूरे देश का कार्यभार संभाले हुए राजनेता बारिश में अपनी पत्नी के साथ खड़ा छाता थामे हुए हैं तो लोग भी अपने दिल को थामेंगे ही।
मीडिया को पुराने गाने याद आ गए, लोगों को कैप्शन, किसी बिछड़े हुए को अतीत और कोई कल्पना में खोया होगा। जी20 तब कहां रहेगा ज़हन में, फिर भी वो इस अवसर की सबसे सुखद तस्वीर है।
कोई राष्ट्राध्यक्ष हो या फिर कोई अरबों रुपयों की मालकिन। दिल तो दोनों का यक सां धड़कता है। ये प्यार ही तो है जो उन्हें रोमांचित करता है। दुनिया के ताकतवर देशों के इस मिलन समारोह में प्यार ने अपनी ताकत दिखा ही दी। सबसे सौम्य पर सबसे ताकतवर।
तमाम राजनीतिज्ञों की मीटिंग में, बड़े-बड़े फैसले, भूगोल पर चर्चा, धरती के चिंतन और तमाम बुद्धिमत्ता के बीच प्रेम ही था जो वायरल हुआ। प्रेम ही है जो वायरल होना चाहिए। यूं भी इस दुनिया में सादगी से बड़ा श्रृंगार नहीं है, सहजता से दीर्घ आकर्षण और प्रेम से विशाल ऊर्जा।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकताु, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।