जिस 'टेस्ट ऑफ अर्थ' कुल्हड़ में फ्रांस के प्रेसिडेंट ने ली चाय की चुस्की, उसका इतिहास 5000 साल का
गुलाबी नगरी की चाय पीकर इमैनुएल मैक्रों अभिभूत दिखे और यह निश्चित है कि उनको भारतीय आतिथ्य सत्कार और कुल्हड़ की चाय पसंद आई।
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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने जब जयपुर के प्रसिद्ध हवा महल के सामने चाय की थड़ी पर चुस्कियां लेते हुए मिट्टी के कुल्हड़ के विषय में अपनी जिज्ञासा जताई तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तपाक से कहा, मोस्ट एनवायरमेंटल फ्रेंडली एंड टेस्ट ऑफ अर्थ।
नरेंद्र मोदी की सॉफ्ट डिप्लोमेसी की बदौलत पिछले करीब एक दशक में कई राष्ट्राध्यक्ष भारत के अलग-अलग शहरों में रोड शो में शामिल हो चुके हैं। भारत की परंपरागत वस्तुओं का लुफ्त उठाते रहे हैं। फ्रेंच प्रेसिडेंट मैक्रों ने भी दुनिया में गुलाबी शहर के नाम से प्रसिद्ध जयपुर में कुछ इसी अंदाज में न केवल रोड शो किया, बल्कि उन्होंने दुकानों पर भारतीय परंपरागत चीजों की शॉपिंग भी की, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा टेस्ट ऑफ अर्थ यानी मिट्टी के कुल्हड़ की हो रही है।
भारत और दक्षिण एशियाई हमारे कुछ पड़ोसी देशों में चाय की दुकानों पर कुल्हड़ देखा जा सकता है। भारत में खासकर उत्तर भारत में चाय मिट्टी के कुल्हड़ में देने का चलन रहा है। ग्रामीण भारत में ब्याह-शादी और अन्य समारोह में मिट्टी के कुल्हड़ में दूध-चाय-पानी दिया जाता है। पिछले कुछ वर्षों में जरूर कागज और प्लास्टिक के कप ने मिट्टी के कुल्हड़ का स्थान लेने का असफल प्रयास किया, लेकिन कुल्हड़ दोबारा प्रचलन में आ गया है। इसका बहुत बड़ा श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी जाता है।
कुल्हड़ का इतिहास
मिट्टी के कुल्हड़ के प्रमाण 5000 साल पहले तक मिलते हैं। सिंधु घाटी सभ्यता की खुदाई में मिट्टी के बर्तन मिले हैं, जिनमें कुल्हड़ शामिल है, यानी भारत में कुल्हड़ का चलन सैकड़ों साल पुराना है। कुछ दशक पहले तक देश में कुम्हार ही मिट्टी के बर्तन और कुल्हड़ बनाया करते थे, लेकिन पिछले कुछ सालों से मिट्टी के बर्तन और कुल्हड़ बनाने के कई स्टार्टअप शुरू हुए हैं। कई पढ़े-लिखे युवा भी मिट्टी के बर्तन बनाने के बिजनेस शुरू कर चुके हैं। मिट्टी के बर्तनों के कुछ बिजनेस ऐसे हैं, जिनका टर्नओवर सालाना करोड़ों रुपए का है। मिट्टी के बर्तन और कुल्हड़ ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट्स पर अच्छी कीमत में बिक रहे हैं।
मिट्टी के बर्तनों के उपयोग के पीछे साइंस
दरअसल, भारत में हर चीज के पीछे साइंस रहा है। मिट्टी के बर्तनों में खान-पान जैसे चाय के उपयोग के पीछे भी साइंस है। मिट्टी के कुल्हड़ में चाय पीने या पानी पीने के स्वास्थ्य से जुड़े कई प्रकार के लाभ होते हैं। रिसर्च गेट में प्रकाशित एक शोध के अनुसार मिट्टी के बर्तन में खाना-पीना सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मिट्टी के बर्तन में खाने का स्वाद भी बढ़ जाता है।
जहां प्लास्टिक ग्लास में गर्म चाय डालने से उसमें मौजूद केमिकल चाय में घुल जाते हैं और कैंसर जैसी बीमारियों की संभावना को बढ़ा देते हैं, वहीं मिट्टी के कुल्हड़ में मौजूद कैल्शियम खाने के साथ मिलकर हमारे शरीर में कैल्शियम की पूर्ति करता है। मिट्टी के बर्तन खाने के माइक्रोन्यूट्रिएंट्स को सुरक्षित रखते हैं। चाय के जरूरी पोषक तत्व कुल्हड़ में प्रिजर्व रहते हैं। मिट्टी का कुल्हड़ तांबे या चांदी के बर्तन से भी कई गुना ज्यादा फायदेमंद बताया गया है।
कुल्हड़ का फायदा
कुल्हड़ का एक फायदा यह भी है कि ये हानिकारक बैक्टीरिया से हमें बचाता है, जबकि प्लास्टिक के गिलास या कांच के गिलास में मौजूद बैक्टीरिया हमारे भोजन के साथ शरीर में चले जाते हैं। मिट्टी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते। कुल्हड़ की चाय पाचन के लिए भी फायदेमंद है। सबसे बड़ी बात जैसा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से कहा, यह एक मोस्ट एनवायरमेंटल फ्रेंडली पात्र है, जो हमारे पर्यावरण को नुकसान नहीं पहुंचता है।
गुलाबी नगरी की चाय पीकर इमैनुएल मैक्रों अभिभूत दिखे और यह निश्चित है कि उनको भारतीय आतिथ्य सत्कार और कुल्हड़ की चाय पसंद आई। यह भी संभव है कि आने वाले दिनों में फ्रांस की किसी कॉफी या टी-शॉप पर मिट्टी के कुल्हड़ में चाय मिलती दिख जाए।
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