विश्व वन्यजीव दिवस: शहरों में संरक्षण की जीवन रेखा, पेड़ों पर आश्रित तमाम पक्षियों का जीवन
इस वर्ष, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सर्दियों के महीनों का तापमान रिकॉर्ड को पहले ही तोड़ चुका है। ऐसी तनावग्रस्त परिस्थितियों में, जैव विविधता पहले से ही दबाव में है। उन जानवरों की दुर्दशा की कल्पना कीजिए जिनके पास भोजन और छाया के कुछ ही स्रोत हैं।
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दुनियाभर में शहरीकरण तेजी से हो रहा है। संयुक्त राष्ट्र संघ के अनुसार 2050 तक विश्व के प्रत्येक 3 में से 2 नागरिक नगरीय क्षेत्रों में निवास करेंगे। इस शहरीकरण के कारण प्राकृतिक पारिस्थितिक तंत्र जैसे वन क्षेत्र सिकुड़ रहे हैं। इन वनों के स्थान पर हमें ऊंची-ऊंची इमारतें, सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचे की परियोजनाएं दिखाई देती हैं। भूमि उपयोग में यह परिवर्तन पहले से ही विभिन्न प्रजातियों की संख्या में गिरावट का कारण बना है।
इस विकास के बीच, शहरी हरित स्थान न केवल घटती जैव विविधता के संरक्षण का एक महत्वपूर्ण साधन है बल्कि शहरवासियों के लिए प्रकृति से जुड़े रहने का अंतिम साधन भी है। किसी भी शहरवासी को छत पर खड़े होकर उसके नीचे हरे रंग के क्षेत्रों को देखकर सुखद अनुभव होता है। यह हरियाली न केवल देखने में आराम देती है बल्कि इंसानों और अनेक जीवित प्राणियों को अनेक सेवा भी देती है।
परिपक्व पेड़ जल प्रवाह को नियंत्रित करते हैं और बाढ़ को रोकने में मदद करते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि पेड़ों की मदद से शहरी हरे स्थान आमतौर पर अपने परिवेश की तुलना में अधिक ठंडे होते हैं। ये पेड़ प्रवासी विक्रेताओं और गरीब सड़क पर रहने वालों को एक ठंडी जगह भी प्रदान करते हैं।
कई पक्षियों का आश्रय हैं पेड़
शहरों के सीमांकित परिसरों में, हम बड़े पार्कों, स्कूलों, कॉलेज परिसरों, आवासीय कॉलोनियों और बड़े कार्यालय स्थानों में हरियाली देख सकते हैं। इन हरित स्थानों की मुख्य कार्यात्मक इकाई वृक्ष हैं। ये पेड़ आवास को परिभाषित करते हैं और किसी भी परिसर में पाई जाने वाली जैव विविधता को प्रभावित करते हैं।
उदाहरण के लिए, शहरी हरे स्थानों में, नारियल, आम और नीम के पेड़ कुछ पक्षियों को वृक्षकोटर के रूप में घोंसला बनाने की जगह प्रदान करते हैं, इनमें चित्तीदार उल्लू, तोते, मैना और यूरेशियन हुदहुद (हूपो) जैसे पक्षी शामिल हैं।
यदि हम इन निर्दिष्ट हरित स्थानों से परे देखें तो हमें सड़कों के किनारे पेड़ दिखाई देंगे। इन पेड़ों को दो श्रेणियों में विभाजित किया जा सकता है, एक है राजमार्गों और बड़ी सड़कों के किनारे पाए जाने वाले पेड़ों की लंबी कतार। इनमें आमतौर पर ऊंचे यूकेलिप्टस जैसे पेड़ होते हैं। ये लाल-डब बाज़ा (रेड नेप्ड आइबिस) जैसे पक्षियों को बसेरा देने के लिए स्थान प्रदान करते हैं।
वृक्षों की दूसरी श्रेणी में पुराने वृक्ष हैं जिनका फैलाव व्यापक है। एक उदाहरण बरगद का पेड़ है। एक अकेला पेड़ कई बगुले की प्रजातियों के लिए घोंसला बनाने का स्थान हो सकता है। इन प्रजातियों के दर्जनों पक्षी इन पेड़ों पर एक साथ घोंसला बनाते हैं।
बरगद, आस्था और कई प्रजातियां का जीवन
तेजी से विकासशील शहरों में जहां इमारतों और सड़कों के लिए जगह बनाने के लिए बड़ी संख्या में पेड़ काटे जाते हैं, भारतीय बरगद को समृद्ध होने दिया जाता है। ऐसा इसलिए है क्योंकि यह पेड़ कई लोगों, विशेष रूप से हिंदुओं द्वारा पूजनीय है। इन बड़े पुराने पेड़ों के नीचे छोटे-छोटे मंदिर या पूजा स्थल पाए जाते हैं। यह पेड़ फल पैदा करता है जो ततैया, कस्तूरी बिलाव (सीवेट), धनेश, चींटियों और चमगादड़ों के लिए भोजन है। लोरिस जिनकी आबादी आवास के नुकसान के कारण घट रही है, वह भी इन फलों को खाते हैं।
भारतीय बरगद की तरह जामुन का पेड़ भी कई प्रजातियों के लिए एक खाद्य स्रोत है। जामुन को बाग के पेड़ के रूप में नहीं बल्कि सड़कों और पार्कों के किनारे उगाया जाता है। यह सदाबहार पेड़ शहरों में सड़क विक्रेताओं द्वारा बेचा जाता है। यह पूरे देश में पाया जाता है और यह शुष्क जलवायु और खराब मिट्टी की स्थिति में भी बढ़ता है। दिल्ली में जामुन शहरों में उगाया जाता रहा है और अंग्रेजों के जमाने से इसके टनों फल बिकते रहे हैं।
हमारे आसपास और भी कई आकर्षक और सुंदर पेड़ हैं। लेकिन हममें से कुछ ही लोग इनका महत्व समझ पाते हैं। चालू वर्ष 2023, उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में सर्दियों के महीनों का तापमान रिकॉर्ड को पहले ही तोड़ चुका है। ऐसी तनावग्रस्त परिस्थितियों में, जैव विविधता पहले से ही दबाव में है।
उन जानवरों की दुर्दशा की कल्पना कीजिए जिनके पास भोजन और छाया के कुछ ही स्रोत हैं। हममें से जिनके पास बगीचे की जगह और पिछवाड़े हैं, वे देशी लकड़ी के पेड़ लगाने पर विचार कर सकते हैं जो जैव विविधता संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस तरह, समय के साथ शहरों में हरे पेड़ अधिक जैव विविधता को बढ़ा और संरक्षित कर सकते हैं।
References
BirdLife International (2023) IUCN Red List for birds. Downloaded from http://www.birdlife.org on 01/03/2023.
eBird: a citizen-based bird observation network in the biological sciences. https://ebird.org/home
Nagendra, H. & Mundoli, S (2019). Cities and Canopies: Trees in Indian Cities. Penguin/Viking, an imprint of Penguin Random House, New Delhi
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