राजस्थान चुनाव 2023: वसुंधरा राजे युग से आगे बढ़ी भाजपा, सत्ता मिली तो नए चेहरा पर लगेगा दांव
वसुंधरा राजे वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। प्रदेश की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनकी फैन फॉलोइंग राजस्थान में जबरदस्त है। पूर्व राजघराने से आने वाली वसुंधरा के नेतृत्व में दो बार भारतीय जनता पार्टी सत्ता से कुछ दूर रह चुकी है।
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राजस्थान में भारतीय जनता पार्टी की पहली लिस्ट आ चुकी है। 41 उम्मीदवारों की घोषणा भी हो चुकी है, जिनमें लोकसभा के 6 सांसदों को टिकट दिया गया है और राज्यसभा से एक सांसद को मैदान में उतारा गया है। इन 41 सीटों में से केवल एक सीट विद्याधर नगर पर वर्ष 2018 के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी जीती थी। विद्याधर नगर सीट पर भी पार्टी ने मौजूदा विधायक का टिकट काट राजसमंद से सांसद दीया कुमारी को मैदान में उतार दिया है। पिछले कुछ महीनो से पार्टी इसी कवायद में लगी है कि किस तरह नए चेहरों को मौका मिले और पार्टी संदेश दे कि वो सत्ता में वापसी के लिए गंभीर है।
बात साल 2018 की है
वर्ष 2018 में राजस्थान में एक नारा जोर-शोर से चला था कि मोदी तुझसे बैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं... तो पार्टी की यही कोशिश है कि किसी भी तरह वो यह संदेश भी दे कि वसुंधरा राजे को इस बार पार्टी नेतृत्व नहीं देने जा रही है। शायद यही कारण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बार-बार राजस्थान आ रहे हैं व खुद की गारंटी दे रहे हैं और उन्हीं के चेहरे पर राजस्थान में चुनाव भी लड़ा जा रहा है।
फिर भी कई ऐसे दिग्गज नेता हैं, जिनको भावी मुख्यमंत्री की दौड़ में माना जा रहा है, यानी साफ है कि राजस्थान में इस बार यदि भारतीय जनता पार्टी सत्ता में आती है तो एक नए चेहरे को नेतृत्व दिया जाएगा।
बीजेपी दो बार रह चुकी है सत्ता से दूर
वसुंधरा राजे वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष हैं। प्रदेश की दो बार मुख्यमंत्री रह चुकी हैं। उनकी फैन फॉलोइंग राजस्थान में जबरदस्त है। पूर्व राजघराने से आने वाली वसुंधरा के नेतृत्व में दो बार भारतीय जनता पार्टी सत्ता से कुछ दूर रह चुकी है। वर्ष 2008 और 2018, दोनों बार पार्टी वसुंधरा राजे के मुख्यमंत्री रहते हुए चुनाव हारी थी।
इस बार ऐसा प्रतीत हो रहा है कि पार्टी वसुंधरा की छाया से दूर जा चुकी है। जो 41 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट आई है, उसमें वसुंधरा राजे के खास लोगों का भी टिकट काट दिया गया है। पहली लिस्ट के बाद कुछ जगहों पर विरोध-प्रदर्शन हो रहा है, लेकिन पार्टी इसे भी एक सुखद संदेश के रूप में ले रही है, क्योंकि जितना विरोध होगा, उतना पार्टी के प्रति जनता का आकर्षण बढ़ेगा। यह संदेश जाएगा कि पार्टी के प्रति रुझान बढ़ रहा है, इसलिए टिकटों के लिए मारामारी है।
क्या ये हो सकते हैं मुख्यमंत्री के चेहरे?
जहां तक मुख्यमंत्री के चेहरे की बात है तो दौड़ में जोधपुर सांसद व केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय रेल मंत्री व जोधपुर से ही आने वाले अश्विनी वैष्णव का नाम प्रमुखता से लिया जा रहा है। विद्याधर नगर से जब दीया कुमारी को टिकट दिया गया तो समर्थक उनका नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में चलाने लगे हैं।
अलवर सांसद बाबा बालकनाथ को तिजारा से टिकट दिया गया है और मुख्यमंत्री की रेस में उनका नाम भी चल रहा है। बाबा बालकनाथ उसी नाथ संप्रदाय से आते हैं, जिससे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आते हैं। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुनराम मेघवाल, नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ और उप नेता प्रतिपक्ष सतीश पूनिया के नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में चर्चाओं में हैं।
किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा?
वहीं, जैसा भारतीय जनता पार्टी में एक सरप्राइज देने का फैक्टर है तो अभी कोई भी इस बात को लेकर 100 प्रतिशत आश्वस्त नहीं है कि पार्टी सत्ता में लौटी तो सेहरा किसके सिर बंधेगा? अधिकांश जानकारी यही मान रहे हैं कि जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चौंकाने वाले निर्णय लेते हैं तो यह भी संभव है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बैकग्राउंड से आने वाले किसी अनजान चेहरे को सत्ता की चाबी सौंप दी जाए, जैसे गुजरात में नरेंद्र मोदी को सत्ता दी गई थी।
फिलहाल राजस्थान में सभी को भारतीय जनता पार्टी की दूसरी लिस्ट का बेसब्री से इंतजार है। यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि चार-पांच और सांसदों को मैदान में उतारा जा सकता है। इस बात को भी कहा जा रहा है कि दूसरी लिस्ट भी पहली लिस्ट की तरह बेहद चौंकाने वाली होगी। एक तरह से भारतीय जनता पार्टी ने पहले उम्मीदवारों के नामों का एलान कर कांग्रेस से कुछ माइलेज तो ले ही लिया है। जहां कांग्रेस नवरात्रों में 18 अक्तूबर को अपनी पहली लिस्ट जारी करने की बात कह रही है तो भारतीय जनता पार्टी दो-तीन दिन में दूसरी लिस्ट भी लेकर आ सकती है।
चुनाव बेहद दिलचस्प
मरुधरा में इस बार का चुनाव बेहद दिलचस्प और रोमांचित करने वाला रहने वाला है, क्योंकि भारतीय जनता पार्टी बिना चेहरे और प्रधानमंत्री मोदी का चेहरा दिखाकर चुनाव लड़ रही है तो कांग्रेस पार्टी में वैसे तो चेहरा मुख्यमंत्री अशोक गहलोत स्वयं हैं, लेकिन पार्टी कहीं न कहीं इशारों में यह संकेत दे रही है कि चुनाव के बाद निर्णय लिया जाएगा।
कांग्रेस का एक वर्ग यह भी चाहता है कि सचिन पायलट के नाम को आगे बढ़ाया जाए। मुद्दों से ज्यादा भावनाओं पर लड़े जाने वाले इस चुनाव का नतीजा 3 दिसंबर को आएगा और उसके अगले एक सप्ताह में नई सरकार बन जाएगी। भाजपा यदि सत्ता में आई तो किसके सिर मुख्यमंत्री का ताज होगा और कांग्रेस अगर सत्ता में बनी रही तो क्या अशोक गहलोत ही मुख्यमंत्री बने रहेंगे, इस बात की बहस इन दिनों राजस्थान में जोर-जोर से हो रही है।
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