फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Promotion of Shree Anna Yojana: Nirmala Sitharaman announced Shri Anna Yojana in the budget 2023

श्री अन्न योजना को बढ़ावा: विश्वामित्री अन्न को मिला श्री अन्न का उपहार

Fri, 03 Feb 2023 06:24 PM IST
Mohan singh मोहन सिंह
Updated Fri, 03 Feb 2023 06:24 PM IST
सार

भारत की पहल से गरीबों के इन अनाजों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा हासिल हुई। सन् 2023 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने 'मोटे अनाज दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय किया है। वहीं, इस साल भारत ग्रुप-20 देशों की अगुवाई कर रहा है।

विज्ञापन
Promotion of Shree Anna Yojana: Nirmala Sitharaman announced Shri Anna Yojana in the budget 2023
वित्त मंत्रू निर्मला सीतारमण ने बजट 2023-24 में श्री अन्न योजना की घोषणा की - फोटो : amar ujala

विस्तार

भारत के अमृतकाल के पहले बजट में वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 'श्री अन्न 'योजना को बढ़ावा देने के लिए 2200 करोड़ रुपये के बजट का प्रावधान किया। मोटे अनाज को देहात में 'विश्वामित्री अन्न' कहा जाता। तमाम तरह के पोषक तत्वों से युक्त ये मोटा अनाज हाल तक गरीब आदमी की थाली का निवाला हुआ करता था।

विज्ञापन


आजादी के अमृतकाल में ही सही मोदी सरकार की वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने 'श्री अन्न' की उपाधि देकर एक तरह से गरीबों के अन्न को गौरवान्वित किया है। सांवा, कोदो, टांगुन, मड़ुआ चीना, ज्वार, बाजरा , रामदाना जैसे अनाजों को आज की 'रेखिया उठान' वाली पीढ़ी शायद नाम से और देखकर भी पहचान न सके। पर कोरोना काल में विशेष रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले इन अनाजों को गजब की प्रसिद्धि और सम्मान प्राप्त  हुआ। 

विज्ञापन

पहली बार हासिल हुई अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा

भारत की पहल से गरीबों के इन अनाजों को पहली बार अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा हासिल हुई। सन् 2023 को संयुक्त राष्ट्र संघ ने 'मोटे अनाज दिवस' के रूप में मनाने का निर्णय किया है। भारत चूंकि इस साल ग्रुप-20 देशों की अगुवाई कर रहा है। भारत के कई शहरों में जी-20 के सम्मेलन होने हैं। भारत सरकार ने इन सम्मेलनों में आए विदेशी आगन्तुकों को मोटे अनाज से बने व्यंजनों से सत्कार का निर्णय कर इन मोटे अनाजों की 'इज्जत अफजाई' में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी है।

विज्ञापन
विज्ञापन


ये मोटे अनाज 'ग्लूटेन फ्री' और 'ग्लाइसेमिक फ्री' है। इस वजह से ये मधुमेह और हृदय रोगियों के भोजन के लिए खासकर मुफीद है। बाजरा का उत्पादन अपने देश में दुनिया में सबसे अधिक होता है। अब भारत सरकार मोटे अनाजों को दुनिया के बड़े हब के रूप में विकसित करने की घोषणा कर रही है।

वैसे भारत सरकार सन् 2018 से 'राष्ट्रीय मिलेट्स ईयर' घोषित कर इसकी शुरुआत पहले ही कर दी है। हैदराबाद स्थित बाजरा अनुसंधान केन्द्र से चौदह राज्यों को 'इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मिशन मिलेट्स रिसर्च' से सहायता मिल रही है। अब सरकार ने एक 'अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स इंस्टीट्यूट' खोलने की घोषणा कर उन आदिवासी और अक्सर सूखा प्रभावित इलाके के किसानों को कुपोषण से मुक्ति और कृषि आय बढ़ाने की उम्मीद जगा दी है। आदिवासी बहुल, बंजर और कम बरसात वाले इलाके में मोटे अनाजों की खेती में ज्यादा होती है।

बाजार में इन उत्पादों की मांग बहुत अधिक

एक सवाल यह उठाया जा रहा है कि जब तक सरकार इन मोटे अनाजों की न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित नहीं करेगी, फिर किसानों को इन अनाजों के पैदावार से लाभ कैसे हासिल होगा? इसके जबाब में यह सर्व विदित है कि बाजार में इन उत्पादों की मांग बहुत अधिक है।

इसलिए किसानों को आमतौर पर बाजार का मोहताज नहीं होना पड़ेगा। इसके अलावा सरकार 'आर्टिफिशियल इन- टेलिजेंस' 'मार्केट इनटेलीजेंस' और 'एग्रीटेक इंडस्ट्री' के जरिए ऐसा प्रबन्ध करने की योजना बना रही है, ताकि किसानों को महज न्यूनतम समर्थन मूल्य पर ही अपने उत्पाद बेचने के लिए निर्भर नहीं रहना पड़े। 

जाहिर है कि सरकार के इन प्रयासों से ना सिर्फ अमीरों की बल्कि अब गरीबों की थाली भी पोषण युक्त आहार से भरपूर होगी। इन अनाजों के उत्पादन से कुपोषण के शिकार आबादी को राहत मिलेगी। कुल मिलाकर गरीबों के अनाजों के दिन बहुरने वाले हैं। आप सभी थोड़ा इंतजार करें।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed