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राजनीति और राजनेता किसी के सगे नहीं होते

Sat, 02 Jan 2021 07:29 PM IST
Namrata Kacholia नम्रता कचोलिया
Updated Sat, 02 Jan 2021 07:29 PM IST
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Politics and politicians must be credible and clearly accountable
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी - फोटो : PTI

बंगाल में चल रही राजनीतिक उथल पुथल ने ममता बनर्जी को हिला कर रख दिया है। भाजपा की राजनैतिक तैयारी से दीदी परेशान हैं। दरअसल यह भाजपा की आदत बन चुकी है कि पहले कुर्सी हिलाओ, फिर गिरा दो।

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अपने वफादार साथियों द्वारा साथ छोड़ने से नाराजगी तो होती है। ऐसे में उग्र होना स्वाभाविक है और सत्ता जाने की आशंका भी बढ़ जाती है। प्रायः देखने में आता है कि जब-जब दशक बदले हैं राजनीतिक गलियारों की व्यवस्थाएं एवं तौर तरीके भी बदले हैं। 2010-11 की शुरुआत में यह देखा गया कि राजनीति के पुराने नेताओं की जन स्वीकार्यता धीरे धीरे कम होने लगी थी।
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यही वजह थी कि राजनीतिक पार्टियां नए एवं युवा चेहरों पर अपना दांव लगा रही थीं। अब राजनीतिक दल भी समझ चुके हैं कि जनसंख्या में युवा मतदाताओं की संख्या बढ़ चुकी है। उन युवाओं को आकर्षित करने के लिए युवा चेहरों की जरूरत है। अब जब दशक फिर से बदल रहा है तो राजनीतिक पार्टियां स्वयं को बदलने के बजाय दूसरी पार्टी के नेताओं को अपनी ओर खींच रही हैं।
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राजनीति में नैतिक मूल्यों, नैतिकता और नियमों का अभाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। अब नेता स्वयं विपक्षी दल के पास जाकर उनके साथ शामिल होने का प्रस्ताव देते हैं। इस प्रस्ताव को देते समय न तो राजनीतिक दल और न ही नेता ज्यादा कुछ सोचता है। यही वजह है कि जो नेता और दल पहले किसी को कोसने में नहीं चूकते हैं वे ही सबकुछ भूलकर दल बदल कर लेते हैं। इसीलिए कहा जाता है राजनीति में सब कुछ संभव है।


फिलहाल बंगाल में तो ऐसे ही हालात दिख रहे हैं। भाजपा के कई दिग्गज नेताओं के जुमलों ने ममता को उनके ही घर से बेघर करने की तैयारी कर ली है। इस बात की पुरजोर कोशिश की जा रही है कि ममता के विश्वसनीय नेताओं को उनसे दूर कर दिया जाए। इसके बाद जनता खुद ब खुद ममता से दूर हो जाएगी। इसीलिए कहा जाता है कि राजनीति और राजनेता किसी के सगे नहीं होते।

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