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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Politics and Policy: Have the hearts of two ministers met with the CM?

राज और नीति : क्या मिल गए सीएम से दो मंत्रियों के दिल!

Fri, 20 Mar 2026 06:15 AM IST
Suresh Tiwari सुरेश तिवारी
Updated Fri, 20 Mar 2026 06:15 AM IST
सार

भोपाल में कैबिनेट बैठक में दो वरिष्ठ मंत्रियों की वापसी से सियासी हलचल थमी दिखी। उनकी मौजूदगी को अमित शाह से चर्चा और सीएम मोहन यादव से मुलाकात का असर माना जा रहा है।

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Politics and Policy: Have the hearts of two ministers met with the CM?
राज और नीति : मप्र में सियासी और प्रशासनिक हलचल बताता कॉलम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

प्रदेश के दो कद्दावर नेता और वरिष्ठ मंत्री मंगलवार को भोपाल में आयोजित कैबिनेट बैठक में शामिल हुए। इसके पहले हुई दो कैबिनेट बैठकों में वे लगातार नदारद रहे थे। ये दोनों मंत्री जब तीसरी बैठक में नजर आए तो इसे सरकार के लिए सुखद ही माना जाएगा। कैबिनेट में दोनों की मौजूदगी को दिल्ली में केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के संग बैठकों, समझाइशों या सियासी संघर्ष विराम का नतीजा भी कहा जा सकता है। गत सप्ताह सीएम डॉ. मोहन यादव के साथ दोनों मंत्रियों की अलग मुलाकात भी बर्फ को पिघलाने में सहायक रही है। माना जाता है कि इन ‘तीनों पक्षों’ की अपने स्तर पर कुछ मामलों को लेकर चर्चा भी हुई है। ऐसे में अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आगे भी सब ठीक-ठाक रहेगा। हालांकि, राजनीति कब और क्या मोड़ लेती है, कहा नहीं जा सकता।
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कलेक्टरों की तबादला सूची तैयार, जारी होने का इंतजार
प्रदेश में पिछले कई दिनों से चर्चा में रही कलेक्टरों की तबादला सूची अब तैयार बताई जा रही है। अब यह सूची कभी भी जारी हो सकती है। सूत्रों के अनुसार इस सूची को लेकर मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव के बीच फाइनल चर्चा हो चुकी है। पता चला है कि तीन कमिश्नर और करीब 20 कलेक्टर इस सूची में प्रभावित हो सकते हैं। इनमें कुछ जिला कलेक्टर का फेरबदल तो निश्चित है और इसके कारण भी अलग हैं। इनमें भोपाल कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह के अलावा इंदौर, धार, मंडला, ग्वालियर और रीवा तक के कलेक्टरों के नाम शामिल हैं। इसके अलावा बैतूल, नर्मदापुरम, शिवपुरी, शहडोल, उमरिया, झाबुआ, मंदसौर, सीधी, दमोह और मैहर कलेक्टर का नाम भी तबादला सूची में दिखाई दे सकता है। इनमें से कुछ कलेक्टर निगम, मंडलों में प्रबंध निदेशक बनाए जा सकते हैं और कुछ मंत्रालय में अपर या उपसचिव बनेंगे।
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मुख्य सचिव अनुराग जैन के फिर पीएमओ में जाने की चर्चा 
दिल्ली के पावर कॉरिडोर में चर्चा है कि मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव अनुराग जैन अगस्त में अपने विस्तारित कार्यकाल को पूरा करने के बाद फिर पीएमओ में जा सकते हैं। अनुराग जैन प्रधानमंत्री के चहेते अधिकारियों में रहे हैं। वे पूर्व में भी प्रधानमंत्री कार्यालय में संयुक्त सचिव के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। अनुराग 3 अक्टूबर 2024 से मध्य प्रदेश के मुख्य सचिव के रूप में कार्यरत हैं। 1 सितंबर 2025 से उनका विस्तारित कार्यकाल चल रहा है, जो अगस्त 2026 में पूरा होगा। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या उनके मुख्य सचिव के रूप में विस्तारित कार्यकाल में वृद्धि होगी या वे पीएमओ में जाएंगे या कहीं ओर!
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डीआईजी बने, लेकिन हैं वहीं के वहीं 
प्रदेश में नौ आईपीएस अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें 1 जनवरी 2026 से डीआईजी पद पर पदोन्नत किया जा चुका है, लेकिन उन्हें अभी तक पदोन्नत पद के अनुसार पदस्थ नहीं किया गया है। वे अभी भी वहीं के वहीं एसपी बने हुए हैं। ये अधिकारी हैं: खंडवा के एसपी मनोज राय, एसपी रेल भोपाल राहुल लोढ़ा, एसपी रेल जबलपुर सिमाला प्रसाद, भिंड के एसपी असित यादव, धार के एसपी मयंक अवस्थी, रीवा के एसपी शैलेंद्र सिंह चौहान, भोपाल के डीसीपी विवेक सिंह, इंदौर के डीसीपी कुमार प्रतीक और झाबुआ के एसपी डॉ. शिवदयाल। यह तय है कि अगले कुछ दिनों में आईपीएस अधिकारियों की तबादला सूची में इन अधिकारियों को भी नई जिम्मेदारियां सौंपी जाएंगी। इन अधिकारियों के अलावा भी संभावित तबादलों के चलते प्रदेश में पुलिस प्रशासन में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है। 2020 के सीधी भर्ती के आईपीएस अधिकारियों के अलावा कुछ प्रमोटी अधिकारियों को भी एसपी बनाए जाने की चर्चा है। गृह विभाग की ओर से सूची जारी होते ही कई जिलों में नए पुलिस कप्तान नजर आएंगे।

गैस समस्या के उपाय बताने पर ट्रोल हुईं कलेक्टर
रसोई गैस समस्या को लेकर प्रदेश की एक कलेक्टर सोशल मीडिया पर बुरी तरह ट्रोल हुई हैं। मीडिया से बातचीत में बड़वानी की कलेक्टर जयति सिंह ने गैस की बचत करने के लिए ‘रोटी और पराठे की जगह कुछ और' बनाने की सलाह दे डाली। माना जा सकता है कि गैस संकट को देखते हुए कलेक्टर ने इंडक्शन चूल्हे और अन्य विकल्पों का उदाहरण देते हुए एक सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की होगी, लेकिन कलेक्टर के बयान की प्रस्तुति और उसकी भाषा ऐसी रही कि वह लोगों को असंवेदनशील लगी। प्रशासनिक दृष्टि से यह सलाह व्यवस्था बनाए रखने के लिए हो सकती है, पर सामाजिक दृष्टि से यह आम लोगों की दिनचर्या और जरूरतों से मेल नहीं खाती। उनके बयान को लोगों ने विवादास्पद माना और सोशल मीडिया पर इसकी काफी आलोचना हुई।

अस्वीकरण: यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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