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दूसरा पहलू: भूलभुलैया जिसका कोई अंत नहीं; एल्गोरिदम और इनफिनिट स्क्रॉल के जाल में फंसता इंसान
Tue, 07 Apr 2026 07:23 AM IST
Pavan
शेरोन हॉरवुड
शेरोन हॉरवुड
Published by: Pavan
Updated Tue, 07 Apr 2026 07:23 AM IST
सार
‘इनफिनिट स्क्रॉलिंग’ एक भूलभुलैया बन गई है, जिसमें एक बार फोन पर स्क्रॉल शुरू करने के बाद खुद को रोकना मुश्किल हो जाता है। एल्गोरिदम और इनफिनिट स्क्रॉल मिलकर ऐसा माहौल तैयार करते हैं, जहां कंटेंट कभी खत्म ही नहीं होता। और यह लत का रूप ले लेता है। इससे बचने के लिए खुद से सवाल पूछें कि क्या आप सोशल मीडिया का उपयोग किसी उद्देश्य के लिए कर रहे हैं, जैसे सीखना, नेटवर्किंग या काम? या फिर यह बस एक आदत बन चुकी है?
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भूलभुलैया जिसका कोई अंत नहीं
- फोटो : FreePik
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विस्तार
क्या आपने कभी गौर किया है कि सोशल मीडिया देखते-देखते कब घंटों का समय बीत जाता है, पता ही नहीं चलता? दरअसल, इसे तकनीकी दुनिया में ‘इनफिनिट स्क्रॉल’ कहते हैं। यह डिजाइन जितना स्मार्ट है, उतना ही चालाक भी। यह फीचर शॉपिंग से लेकर वीडियो एप्स तक हर जगह मौजूद है, जो पेज खत्म होने ही नहीं देता और लगातार नया कंटेंट आपके सामने परोसता रहता है। यही वह कारण है कि एक बार स्क्रॉल शुरू करने के बाद उसे रोकना मुश्किल हो जाता है।
इस फीचर की असली ताकत इसके मनोविज्ञान में छिपी है। पहले ऐसा होता था कि जब आप अपने सभी फॉलो किए गए अकाउंट्स के पोस्ट देख लेते थे, तो एक साफ संकेत मिल जाता था कि आज के लिए इतना काफी है। पर अब एल्गोरिदम और इनफिनिट स्क्रॉल मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां कंटेंट कभी खत्म ही नहीं होता। दूसरा, यह आपको एक ऐसी उम्मीद में बांधे रखता है कि शायद अगला पोस्ट और भी मजेदार होगा। धीरे-धीरे यह लत का रूप ले लेता है। अच्छी बात यह है कि इससे बाहर निकलना मुश्किल जरूर है, पर नामुमकिन नहीं।
सबसे पहले, अपने फोन के ‘स्क्रीन टाइम’ फीचर्स का इस्तेमाल करें-जैसे एंड्राइड का डिजिटल वेलबीइंग या एपल का स्क्रीन टाइम। कुछ थर्ड-पार्टी एप्स भी हैं, जो आपको बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने से रोकने में मदद करते हैं। एक और असरदार तरीका है-सोशल मीडिया एप्स को फोन से हटा देना। अगर पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है, तो स्क्रॉल करने के लिए एक तय समय निर्धारित करें। उस समय के अतिरिक्त सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें। हालांकि, अक्सर ये तरीके कुछ वक्त बाद असर खो देते हैं, खासकर तब, जब जीवन में तनाव या व्यस्तता बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप खुद से ईमानदार सवाल पूछें कि आप इतना स्क्रॉल क्यों करते हैं? क्या यह सिर्फ आदत है, या आप किसी चीज से बचने की कोशिश कर रहे हैं? क्या यह किसी भावनात्मक दबाव या अधूरे कामों से भागने का तरीका है? स्क्रॉलिंग खुद समस्या नहीं है, बल्कि किसी बड़ी समस्या का लक्षण हो सकती है।
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एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इससे फायदा किसे हो रहा है? क्या आप सोशल मीडिया का उपयोग किसी उद्देश्य के लिए कर रहे हैं, जैसे सीखना, नेटवर्किंग या काम? या फिर यह बस एक आदत बन चुकी है? अगर आपको इसका कोई ठोस लाभ नहीं दिखता, तो यह सोचने का सही समय है कि किन प्लेटफॉर्म्स को अलविदा कहना चाहिए। जब आप स्क्रीन से बाहर निकलते हैं, तभी असली जिंदगी आपके सामने खुलती है और वही सबसे ज्यादा मायने रखती है। -द कन्वर्सेशन
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इस फीचर की असली ताकत इसके मनोविज्ञान में छिपी है। पहले ऐसा होता था कि जब आप अपने सभी फॉलो किए गए अकाउंट्स के पोस्ट देख लेते थे, तो एक साफ संकेत मिल जाता था कि आज के लिए इतना काफी है। पर अब एल्गोरिदम और इनफिनिट स्क्रॉल मिलकर ऐसा माहौल बनाते हैं, जहां कंटेंट कभी खत्म ही नहीं होता। दूसरा, यह आपको एक ऐसी उम्मीद में बांधे रखता है कि शायद अगला पोस्ट और भी मजेदार होगा। धीरे-धीरे यह लत का रूप ले लेता है। अच्छी बात यह है कि इससे बाहर निकलना मुश्किल जरूर है, पर नामुमकिन नहीं।
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सबसे पहले, अपने फोन के ‘स्क्रीन टाइम’ फीचर्स का इस्तेमाल करें-जैसे एंड्राइड का डिजिटल वेलबीइंग या एपल का स्क्रीन टाइम। कुछ थर्ड-पार्टी एप्स भी हैं, जो आपको बिना सोचे-समझे स्क्रॉल करने से रोकने में मदद करते हैं। एक और असरदार तरीका है-सोशल मीडिया एप्स को फोन से हटा देना। अगर पूरी तरह छोड़ना संभव नहीं है, तो स्क्रॉल करने के लिए एक तय समय निर्धारित करें। उस समय के अतिरिक्त सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखें। हालांकि, अक्सर ये तरीके कुछ वक्त बाद असर खो देते हैं, खासकर तब, जब जीवन में तनाव या व्यस्तता बढ़ जाती है। इसलिए जरूरी है कि आप खुद से ईमानदार सवाल पूछें कि आप इतना स्क्रॉल क्यों करते हैं? क्या यह सिर्फ आदत है, या आप किसी चीज से बचने की कोशिश कर रहे हैं? क्या यह किसी भावनात्मक दबाव या अधूरे कामों से भागने का तरीका है? स्क्रॉलिंग खुद समस्या नहीं है, बल्कि किसी बड़ी समस्या का लक्षण हो सकती है।
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एक और महत्वपूर्ण सवाल यह है कि इससे फायदा किसे हो रहा है? क्या आप सोशल मीडिया का उपयोग किसी उद्देश्य के लिए कर रहे हैं, जैसे सीखना, नेटवर्किंग या काम? या फिर यह बस एक आदत बन चुकी है? अगर आपको इसका कोई ठोस लाभ नहीं दिखता, तो यह सोचने का सही समय है कि किन प्लेटफॉर्म्स को अलविदा कहना चाहिए। जब आप स्क्रीन से बाहर निकलते हैं, तभी असली जिंदगी आपके सामने खुलती है और वही सबसे ज्यादा मायने रखती है। -द कन्वर्सेशन