फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   one year of india's lockdown in covid 19 and coronavirus vaccine program in second wave of pandemic

लॉकडाउन का एक साल और कोरोना की दूसरी लहर: वैक्सीन की गंभीरता को समझ रहे हैं लोग?

Thu, 25 Mar 2021 04:20 PM IST
Hari Verma हरि वर्मा
Updated Thu, 25 Mar 2021 04:20 PM IST
विज्ञापन
one year of india's lockdown in covid 19 and coronavirus vaccine program in second wave of pandemic
16 जनवरी से जब तीन करोड़ योद्धाओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया तो रफ्तार काफी धीमी रही। - फोटो : PTI

लॉकडाउन को एक साल बीत चुका है। ठीक एक साल पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब राष्ट्र के नाम संदेश में संपूर्ण लॉकडाउन की घोषणा की थी तो सभी सन्न रह गए थेेे। बहरहाल एक साल की उठापटक और कोरोना सेे जंग के बीच महामारी की रफ्तार धीमी पड़ी है और इस समय रक्षाकवच के तौर पर हमारे पास वैक्सीन है। हालांकि टीका अब भी पूरी आबादी तक नहीं पहुंचा है और इस बीच कोरोना की दूसरी लहर दस्तक दे रही हैैै।  

विज्ञापन


मोदी का मास्टर स्ट्रोक
16 जनवरी से जब तीन करोड़ योद्धाओं के टीकाकरण का लक्ष्य रखा गया तो रफ्तार काफी धीमी रही। दूसरे चरण में प्रधानमंत्री मोदी ने खुद टीका लेकर भरोसा जताया। नतीजा, अब तक पांच करोड़ से अधिक को टीका लग चुका है। कुछ ने दूसरी डोज भी ली है। हालांकि योद्धाओं को टीकाकरण का लक्ष्य अब भी पूरा नहीं हो पाया है।

विज्ञापन

one year of india's lockdown in covid 19 and coronavirus vaccine program in second wave of pandemic
कोरोना की दूसरी लहर मेें आज दवाई भी है लेकिन कड़ाई नहीं। - फोटो : PTI

अब सरकार ने 1 अप्रैल से 45 पार के सामान्य लोगों के लिए टीकाकरण का दायरा बढ़ाया है। आंकड़े यह दर्शाते हैं कि जितनी मौत हुई हैं, उनमें से करीब 88 फीसदी 45 पार की उम्र वाले ही थे। ऐसे में 45 पार की उम्र के सामान्य लोगों को टीकाकरण के दायरे में लाना भी एक बड़े वर्ग को रक्षा कवच प्रदान करने का फैसला है। टीके की कमी नहीं है, फिर भी भविष्य में दिनोंदिन दायरा और बढ़ाने के मकसद से सरकार ने आज से कोविशील्ड के निर्यात पर फिलहाल रोक लगाने का फैसला लिया है। 

इस चिंता और चुनौती के बीच टीका को लेकर सियासत और शंका कहीं न कहीं स्वस्थ भारत मुहिम को झटका लगा रहा है। उससे भी ज्यादा चिंताजनक तो इस बेशकीमती वैक्सीन का यूं ही बर्बाद होना। आंकड़ों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, पंजाब में वैक्सीन की बर्बादी ज्यादा हुई है। राज्यों के मुख्यमंत्रियों से बैठक में प्रधानमत्री भी वैक्सीन की इस बर्बादी पर चिंता जता चुके हैं। हम दो बूंद जिंदगी की तरह दो डोज की कीमत पहचाननी होगी। सरकार ने भले जरूरतमंदों के लिए सरकारी केंद्रों पर मुफ्त और निजी केंद्रों पर महज

ढाई सौ रुपये में वैक्सीन उपलब्ध करा दी है लेकिन जब वैक्सीन नहीं बनी थी तो कीमत को लेकर अटकलें लगती रहीं। यह भी सही है कि ढाई सौ रुपये में तो सजी-जुकाम तक का इलाज नहीं हो पाता। ऐसे में वैक्सीन की कीमत भले कम है लेकिन जीवन रक्षा कवच के नजरिये से यह बेशकीमती है, वह भी तब जब इस महामारी से पूरी दुनिया लड़ रही है।

ऐसे में वैक्सीन की बर्बादी रोककर इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना होगा। यह कदम वैक्सीन की कमी को दूर करेगा, साथ ही उम्र सीमा का दायरा घटाने की ओर भी बढ़ता कदम है। कई राज्यों के सीएम पहले ही टीकाकरण की उम्र सीमा की पाबंदी हटाकर 18 साल से ऊपर वालों के लिए करने की मांग की है। अभी बच्चों के टीके का ट्रॉयल जारी है।आंकड़े बताते हैं 16 जनवरी से योद्धाओं का टीकाकरण शुरू हुआ। फिर दूसरे चरण में 60 पार बुजुर्गों का और 45 पार बीमारों का। इसके बाद भी 24 मार्च को सुबह 10 बजे तक महज 5 करोड़,08 लाख, 41 हजार 286 को ही वैक्सीन लग पाई। 

थम नहीं रहा कोरोना का संक्रमण
कई चरणों में लॉकडाउन व अनलॉक के एक साल बाद आज हालात फिर उसी ओर इशारा कर रहे हैं। महाराष्ट्र के दो जिलों बीड और नांदेड़ में 26 मार्च से 4 अप्रैल 2021 तक फिर से संपूर्ण लॉकडाउन लगाने की नौबत आ गई। महाराष्ट्र और पंजाब में भयावह स्थिति है। 18 राज्यों में नए स्ट्रेन ने पांव पसार रहा है। देश के संक्रमित अव्वल दस जिलों में अकेले महाराष्ट्र के ही नौ जिले हैं। एक कर्नाटक का।  आंकड़ों पर नजर डालें तो  25 मार्च 2021 को फिर 53 हजार 476 नए मामले आ गए जबकि 251 की मौत हो गई। इस समय कुल संक्रमित 1 करोड़,17 लाख, 87 हजार, 534 हैं जबकि 1 करोड़, 12 लाख, 31 हजार 650 स्वस्थ भी हुए हैं। 

संक्रमण तो बढ़ रहा है लेकिन सावधानी कम हो रही
कोरोना की दूसरी लहर मेें आज दवाई भी है लेकिन कड़ाई नहीं। लापरवाही हद पार करती जा रही है। आलम यह है कि मुंह पर मास्क, सैनिटाइजर, बार-बार हाथ धोने और आपस में दूरी का पालन गंभीरता से नहीं हो रहा है। सार्वजनिक आयोजन से लेकर परिवहन तक गाइडलाइन की अनदेखी हो रही है। जिस तेजी से दूसरी लहर की ओर देश बढ़ रहा है, वैसे में स्वास्थ्य मंत्रालय की चिंता वाजिब है।
 

one year of india's lockdown in covid 19 and coronavirus vaccine program in second wave of pandemic
अभी भी कई ऐसे संक्रमित हैं जिन्होंने टीका नहीं लगवाया है। - फोटो : PTI

दवाई के साथ ढिढ़ाई नहीं, कड़ाई जरूरी
आज दवाई आने के बाद ढिढ़ाई बढ़ती ही जा रही है। जो संक्रमित हुए, उनमें से ज्यादातर ने पहले डर से वैक्सीन नहीं लगवाई। मोदी के टीका लगाने के बाद जब भरोसा बढ़ा तो टीकाकरण मुहिम में तेजी आई लेकिन दवाई के साथ कड़ाई के मोर्चे पर लोग सुस्त पड़ते चले गए। अभी भी कई ऐसे संक्रमित हैं जिन्होंने टीका नहीं लगवाया, जबकि योद्धाओं, बुजुर्गों और 45 पार बीमारों के लिए टीकाकरण जारी है। अब तो 45 पार वालों की बारी आनेवाली है।

ऐसे में दो डोज जिंदगी जरूरी है तो साथ-साथ दो गज की दूरी, मास्क और बार-बार हाथ धोने वाली कड़ाई भी। कोरोना संक्रमण में फिर पुराने ढर्रे की ओर जाना खतरे से खाली नहीं है। कई राज्यों में नाइट कर्फ्यू, शिक्षण संस्थान, सार्वजनिक आयोजनों पर रोक लगाने की नौबत आ गई है। महाराष्ट्र के दो जिलों में संपूर्ण लॉकडाउन की ओर कदम बढ़ गया है। ऐसे में दवाई भी, कड़ाई का मंत्र ही जान और जहान दोनों के बचाव के लिए जरूरी है। हमें एकजुट होकर अफवाहों, सियासत, धर्म और भ्रम की बेड़ियों को तोड़ना ही होगा। दवाई भी, कड़ाई भी।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।



 

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed