फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   NT Rama Rao first flag bearer of Congress free politics Know how a cinema superstar became the king of politic

एनटी रामाराव: कांग्रेस मुक्त राजनीति का पहला ध्वजवाहक, सिनेमा का सुपरस्टार यूं बना सियासत का शहंशाह

Wed, 31 May 2023 04:37 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 31 May 2023 04:37 PM IST
सार

एनटीआर की राजनीति का आधार कांग्रेस का विरोध ही रहा। आजादी के बाद से आंध्र प्रदेश की सत्ता पर लगातार काबिज कांग्रेस को हटाने के लिए एनटीआर ने जो रणनीति बुनी, उसी राह पर चलकर बहुत बाद में अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी खड़ी की।

विज्ञापन
NT Rama Rao first flag bearer of Congress free politics Know how a cinema superstar became the king of politic
दादा नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

इस साल ऑस्कर विजेता गीत ‘नाटू नाटू’ की धुन पर दुनिया भर में नाच आए अभिनेता तारक उर्फ जूनियर एनटीआर के दादा नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) आज होते तो सौ साल के होते। उनके जन्मशती उत्सव को लेकर उनकी कर्मभूमि में उनकी एक प्रतिमा के अनावरण का मामला विवादों में है। धार्मिक फिल्मों में सबसे ज्यादा 16 बार भगवान कृष्ण का चरित्र निभाने वाले रामाराव की एक कृष्णस्वरूपा प्रतिमा के अनावरण पर तेलंगाना उच्च न्यायालय ने रोक लगा दी है। यह रोक उस याचिका पर लगी, जिसमें कुछ यादव संगठनों ने इस प्रतिमा से अपनी भावनाएं आहत होने का आरोप लगाया है।

विज्ञापन


28 मई 1923 को तत्कालीन मद्रास प्रेसीडेंसी के गांव निम्माकुरु (अब आंध्र प्रदेश) में जन्मे नंदमूरि तारक रामाराव जन्म के बाद पढ़ाई के लिए अपने चाचा के साथ रहे और बाद में अपने गांव के पहले ऐसे युवक बने, जिसे पढ़ने के लिए विजयवाड़ा भेजा गया। देश की आजादी के साल 1947 में उनका चयन राज्य सेवा आयोग में हुआ, लेकिन सरकारी नौकरी से उनका मन तीन हफ्ते में ही उचट गया। उन्होंने सरकारी नौकरी छोड़ दी और दो साल बाद परदे पर पहली बार लोगों ने उन्हें फिल्म ‘माना देसम’ में देखा। अपने पूरे करियर में उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया।
विज्ञापन


गरीबों के मसीहा की इमेज ने दिखाया कमाल 

नंदमूरि तारक रामाराव का फिल्मी करियर अपने ही समकालीन एम जी रामचंद्रन की तरह ऐसा प्रभावी रहा कि उनके प्रशंसक जल्द ही उनके भक्त भी बन गए। 16 फिल्मों में एनटीआर कृष्ण के रूप में दिखे। इसके अलावा राम, अर्जुन, भीष्म और युधिष्ठिर का चोला भी उन्होंने अलग-अलग फिल्मों में पहना और सिनेमा के वह इकलौते अभिनेता हैं जिसने राम और रावण दोनों के किरदारों को बड़े परदे पर जिया। अभिनय यात्रा के अंतिम चरण में उन्होंने गरीबों के मसीहा का अवतार धरा और इन्हीं छवियों के चलते बने अथाह प्रशंसक वर्ग ने उन्हें राह दिखाई राजनीति में आने की। एनटीआर ने राजनीति में 41 साल पहले जो लोकप्रिय प्रयोग किए, उस लीक पर तमाम राजनीतिक दल आज तक चल रहे हैं। उनकी बनाई तेलुगू देशम पार्टी लोकसभा में पहला ऐसा क्षेत्रीय दल बनी जिसे सबसे बड़े विपक्षी दल का तमगा मिला। तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जब कांग्रेस ने पूरे देश में सभी विपक्षी दलों का सूपड़ा साफ किया तो उस लहर में भी आंध्र प्रदेश की जनता ने एनटीआर के नेतृत्व में कांग्रेस को धूल चटाई।
विज्ञापन
विज्ञापन

 

NT Rama Rao first flag bearer of Congress free politics Know how a cinema superstar became the king of politic
नंदमूरि तारक रामाराव - फोटो : Amar Ujala

ईमानदार लोगों को राजनीति में आने का आह्वान
एनटीआर की राजनीति का आधार कांग्रेस का विरोध ही रहा। आजादी के बाद से आंध्र प्रदेश की सत्ता पर लगातार काबिज कांग्रेस को हटाने के लिए एनटीआर ने जो रणनीति बुनी, उसी राह पर चलकर बहुत बाद में अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी खड़ी की। एनटीआर ने तेलुगू देशम के गांव-गांव, मोहल्ले-मोहल्ले सदस्य बनाए, इन सदस्यों ने अपने अपने ग्राम अथवा वार्ड के नेता चुने और इन नेताओं ने क्रमश: जिले और राज्य के नेता चुने। पहले चुनाव में एनटीआर ने ईमानदार और कुशल उम्मीदवार चुनने को अपना तुरुप का पत्ता बनाया और पहले ही चुनाव में विधानसभा की 294 सीटों में से 202 सीटें जीत लीं। इस चुनाव में संजय विचार मंच का भी उन्हें साथ मिला और वह राज्य के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने।

राजनीति की पहली रथयात्रा
एनटीआर से ही भारतीय राजनीति में रथ यात्रा की शुरुआत हुई। अपने पहले चुनाव में ही उन्होंने जो टोटका अपनाया, उसे बाद में लालकृष्ण आडवाणी ने राम जन्मभूमि आंदोलन में कॉपी किया। एनटीआर से पहले खुली कार से प्रचार की शुरुआत एमजी रामचंद्रन ने की तो थी, लेकिन अपने शेवरले कार को ‘चैतन्य रथ’ में बदलकर पीतवर्ण ध्वजों के साथ पूरे प्रदेश को कारों के काफिले के साथ मथने का काम एनटीआर ने ही शुरू किया। इस रथ के सारथी थे, उनके बेटे नंदमूरि हरिकृष्ण जिनकी अभी पांच साल पहले एक सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई। जूनियर एनटीआर इन्हीं के बेटे हैं। इस रथयात्रा को लेकर देश की राजनीति में इतनी हलचल रही है कि दिल्ली के तमाम पत्रकारों को खासतौर से इसकी कवरेज करने भेजा गया। मामला और बड़ा होता दिखा तो तमाम अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी बढ़-चढ़कर इसे कवर किया।

NT Rama Rao first flag bearer of Congress free politics Know how a cinema superstar became the king of politic
एनटीआर - फोटो : Amar Ujala

जब इंदिरा को बदलना पड़ा राज्यपाल
आमतौर पर केंद्र में काबिज सरकार अपने विपक्षी दलों की सरकारों वाले राज्यों में ऐसे राज्यपाल भेजती है, जिन पर कई बार पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। अभी महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार के गिरने के मामले में सर्वोच्च न्यायालय की तत्कालीन राज्यपाल को लेकर की गई टिप्पणी भी इसी संदर्भ में है। लेकिन, इंदिरा गांधी सरकार के समय में आंध्र प्रदेश में तैनात राज्यपाल राम लाल की रामाराव ने ईंट से ईंट बजा दी थी।

हुआ यूं था कि मुख्यमंत्री बनने के बाद एनटी रामाराव दिल के इलाज के लिए अमेरिका में थे और उनकी पार्टी में कांग्रेस से आए भास्कर राव को राज्यपाल ने ये कहते हुए मुख्यमंत्री बना दिया कि तेलुगू देशम पार्टी के अधिकतर विधायक उनके साथ हैं। रामाराव लौटे और भारतीय राजनीति में पहली बार विधायकों की परेड हुई। दिल्ली में हंगामा हुआ।

विधायकों को खरीद फरोख्त से बचाने के लिए होटल में सुरक्षित रखने का पहला प्रयोग भी एनटीआर के समय में ही हुआ। तब कर्नाटक के तत्कालीन मुख्यमंत्री रामकृष्ण हेगड़े ने मैसूर के एक होटल में टीडीपी के विधायकों को रखने में एनटीआर की मदद की थी। इंदिरा गांधी को हठ छोड़ना पड़ा। राज्य में नए राज्यपाल को भेजना पड़ा और एनटीआर फिर से मुख्यमंत्री बन गए।

1984 की लहर में भी करिश्मा कायम
जिस साल एनटीआर दोबारा मुख्यमंत्री बने उस साल 1984 को देश की राजनीति की दिशा बदलने वाला साल कहा जाता है। पड़ोसी राज्य तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमजी रामचंद्रन को इलाज के लिए विदेश जाना पड़ा और उनका गठबंधन कांग्रेस के साथ होने के बावजूद एनटीआर ने अपने मित्र की पार्टी के लिए तमिलनाडु जाकर डीएमके उम्मीदवारों का प्रचार किया।

इसी साल इंदिरा गांधी की हत्या हुई। कांग्रेस के पक्ष में पूरे देश मे सहानुभूति लहर दिखी, लेकिन आंध्र प्रदेश में टीडीपी का परचम ही लोकसभा में भी लहराया। बाद के दिनों में एनटीआर गैर कांग्रेसी पार्टियों की एकता के सूत्रधार बने और राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी धमक बनाने में कामयाब रहे।

NT Rama Rao first flag bearer of Congress free politics Know how a cinema superstar became the king of politic
नंदमूरि तारक रामाराव (एनटीआर) - फोटो : Amar Ujala

दो रुपये किलो चावल वाली लोकप्रिय योजना
गरीबों को हर महीने दो रुपये प्रति किलो की दर से 25 किलो चावल मुहैया कराने की एनटीआर की योजना देश के दूसरे तमाम दलों ने कॉपी की और अब भी सस्ता अनाज बांटने की इस अकाट्य रणनीति से कई राजनीतिक दल अपने वोट बैंक को साधते रहते हैं। गरीबों को घर बनाने के लिए आर्थिक मदद करने की योजना भी एनटीआर की ही देन मानी जाती है।

अपने कार्यकाल के पहले ही साल में उन्होंने 10 हजार घर गरीबों के लिए बना दिए थे, यही नहीं हर गांव में पीने के पानी का कम से कम एक स्वच्छ स्रोत बनाने की एनटीआर की योजना भी अब देश की राजनीति में अक्सर परिलक्षित होती रहती है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed