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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   New Year and old books: Clean as much as you like, but don't throw away old books; they change your thinking

नया साल और पुरानी किताबें: जितनी मर्जी सफाई करें, पुरानी किताबों को खुद से दूर न कीजिए; इनसे बदलती है सोच

Thu, 01 Jan 2026 07:43 AM IST
पवन पांडेय रोजर रोजेनब्लैट, द न्यूयॉर्क टाइम्स
रोजर रोजेनब्लैट, द न्यूयॉर्क टाइम्स Published by: पवन पांडेय Updated Thu, 01 Jan 2026 07:43 AM IST
सार

नए साल पर अगर आपने घर की सफाई का रेजॉल्यूशन लिया है, तो जितनी मर्जी सफाई करें, लेकिन पुरानी किताबों को खुद से दूर न कीजिए। जब आप किसी को कोई किताब सुझाते हैं, तो वह किताब संदेश ले जाने वाली एक दूत बन जाती है, जो उन लोगों के सोचने का तरीका बदल सकती है।

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New Year and old books: Clean as much as you like, but don't throw away old books; they change your thinking
किताब (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : एक्स

विस्तार

बेशक किताबें कितनी ही जगह घेरती हों, कितनी ही धूल की परतें उन पर क्यों न चढ़ी हों, उनको खुद से दूर न कीजिए। आपके पास मौजूद हर किताब एक कहानी है कि आप किताब खरीदने से पहले कौन थे और उसे पढ़ने के बाद क्या हो गए। किताबें घर जैसी होती हैं। जैसे एक बार रहना शुरू करने पर आप घर का हिस्सा हो जाते हैं, वैसे ही आप किताबों से जुड़ते हैं, और फिर उसका एक हिस्सा हो जाते हैं। मैंने कई किताबें पढ़ीं और मुझे पता है कि मैं उनके बारे में क्या सोचता हूं, लेकिन क्या कभी किताबें भी मेरे बारे में कुछ सोचती होंगी? शायद वे मुझे नासमझ समझती हों, या एक मासूम इन्सान, या फिर एक कोरा कागज? शायद उन्हें मैं ऐसा व्यक्ति लगता होऊंगा, जिसके विचार गलत हों या फिर जिसके कोई विचार ही न हों। कई बार मुझे ऐसा लगा कि जैसे मेरी किताबें मुझसे हंसी-मजाक में बात करती हों। सच तो यह है कि हम किताबों को पढ़ते हैं और किताबें हमें। किताबें हमें माफ करना भी सिखाती हैं।
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नई किताबें ऑडिशन के लिए आए नए कलाकारों की तरह चमकती हैं, लेकिन वक्त के साथ उनके कवर और शीर्षक फीके पड़ जाते हैं, पन्ने मुड़ जाते हैं और वे भी पुरानी किताबों की तरह बेजान-सी लगने लगती हैं। जब मैं यूनिवर्सिटी परीक्षा की तैयारी कर रहा था, तो मैंने ब्लीक हाउस को इप्सविच और मैसाचुसेट्स के समुद्र तटों पर बैठकर पढ़ा था। आज भी उसके पन्नों में रेत के कण महसूस किए जा सकते हैं। और मेरी अलमारी में रखी वह फटी-पुरानी किताब चाइल्डक्राफ्ट, मेरे माता-पिता के घर से आई थी। यह वही बच्चों की किताब थी, जिसे मेरी मां पढ़कर मुझे सुनाया करती थीं।
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अलमारी से गायब किताबों की बात तो छोड़ ही दीजिए, उन किताबों की वजह से बनी खाली जगहों की बात करते हैं, जो मजबूरी में मेहमानों को दी गईं और उन्होंने फिर कभी वापस नहीं की। क्या यह संभव है कि कोई आपसे किताब उधार मांगे और आप मना कर दें? काश! किताबें वापस पाने के लिए कोई फिरौती तय होती। अनातोले फ्रांस ने मजाक में कहा था कि उनकी लाइब्रेरी में सिर्फ वही किताबें थीं, जो दूसरों ने उन्हें उधार दी थीं। जब आप किसी को कोई किताब सुझाते हैं, तो वह किताब संदेश ले जाने वाली एक दूत बन जाती है। वह उन लोगों के सोचने का तरीका बदल सकती है, जिनके बारे में आपको कभी पता भी नहीं चलेगा। और कौन जाने, वे लोग उस नए ज्ञान का इस्तेमाल किस तरह करेंगे! हेनरी डेविड थोरो, ऑस्कर वाइल्ड, एजरा पाउंड-इन तीनों ने जेल में लिखा या लिखने के लिए प्रेरित हुए। उनकी लिखाई में जो विचार थे, वही उनके बाहर निकलने का रास्ता बने। इसी तरह जहां जेल से मीन काम्फ किताब लिखकर हिटलर ने दुनिया को लगभग तबाह कर दिया था। वहीं दूसरी ओर, नेल्सन मंडेला ने जेल से किताब लिखकर दुनिया को तबाही से लगभग बचा लिया।
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किताबें मेरी शिक्षक भी हैं और मित्र भी। वह मुझसे ज्यादा जानती हैं, और लंबे समय में मेरा भला चाहती हैं। मैं उन्हें नहीं छोड़ सकता-जैसे किसी पुराने दोस्त को अचानक नहीं छोड़ा जा सकता। पड़ोसियों की तरह मेरी अलमारियों पर रखी किताबें भी अपने दरवाजे पर खड़ी होकर हमेशा मेरा स्वागत करती हैं। कभी-कभी मैं सोचता हूं कि रात के सन्नाटे में, जब घर में अंधेरा होता है और मैं सो रहा होता हूं, तो क्या वे आपस में फुसफुसाती होंगी? क्या वे मेरे बारे में बातें करती होंगी?
 
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