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देश की सुरक्षा और सीमा निगरानी के लिए ड्रोन की अपरिहार्यता

Thu, 01 Feb 2024 01:02 PM IST
Dhanendra Kumar धनेंद्र कुमार
Updated Thu, 01 Feb 2024 01:02 PM IST
सार

भारतीय नौसेना ने श्रीलंका के आस-पास के समुद्र क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा कार्यों के लिए भी ड्रोन का प्रभावशाली ढंग से प्रयोग किया है। ड्रोन समुद्री गतिविधियों की निगरानी करने, शिपिंग लेन की सुरक्षा और तस्करी, डकैती जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करता है।

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National Defence Drone Requirements For Country's Security And Border Surveillance
drone - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

आज के परिप्रेक्ष्य में वैश्विक तनाव, संघर्ष और युद्ध में ड्रोन का अत्यधिक महत्व है। अक्सर खबरों में देखा जाता है कि रूस-यूक्रेन के युद्ध, मध्य पूर्व की तनावपूर्ण स्थिति और अनेक देशों द्वारा सीमा पर निगरानी और युद्ध के दौरान शत्रु के क्षेत्र में हमलों के लिए ड्रोन का प्रयोग तेजी से बढ़ रहा है। ड्रोन का अर्थ मुख्य रूप से एक रिमोट कंट्रोल या कंप्यूटर द्वारा निर्देशित मानवरहित उपकरण है। इनका उपयोग रक्षा, निगरानी और आंतरिक सुरक्षा के अतिरिक्त आपदा प्रबंधन, कृषि, स्वास्थ्य, भू-स्थानिक मानचित्र, खनन, हवाई फोटोग्राफी और सिनेमैटोग्राफी आदि क्षेत्रों में भी अत्यन्त महत्वपूर्ण होता है।

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भारत ने शुरुआत में सैन्य ड्रोन का इस्तेमाल पाकिस्तान के साथ 1999 के कारगिल युद्ध दौरान किया था जहां इजरायल ने भारत को आईएआई हेरॉन और सर्चर ड्रोन दिये थे। तब से आज तक भारत ने इजराइल, अमेरिका आदि से कई सैन्य मानव रहित उपकरण एवं ड्रोन खरीदें हैं। रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने अपना घरेलू मानवरहित हवाई वाहन (UAV) भी विकसित किया है।

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अभी हाल में ही सोमालिया के पास एमवी लीला समुद्री जहाज के हाइजैकिंग में भारतीय नौसेना ने आनन फानन में एक ऑपरेशन में MQ-9B ड्रोन को तैनात किया और 15 भारतीय चालक दल को बचाया।

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जून 2021 में जम्मू में भारतीय वायुसेना के एक स्टेशन पर हमले के लिए पाकिस्तान ने ड्रोन का इस्तेमाल किया था। जिसका भारत ने प्रभावी तरीके से जवाब दिया था। लद्दाख जैसे क्षेत्रों में सीमा निगरानी के लिए ड्रोन का उपयोग किया जाता है। भारत और चीन के बीच तनाव के दौरान भी ड्रोन के इस्तेमाल ने आर्मी को सतर्क किया था। ड्रोन के माध्यम से स्थितिजन्य निगरानी की जा सकती है और दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलती है।

 


भारतीय नौसेना ने श्रीलंका के आस-पास के समुद्र क्षेत्र में निगरानी और सुरक्षा कार्यों के लिए भी ड्रोन का प्रभावशाली ढंग से प्रयोग किया है। ड्रोन समुद्री गतिविधियों की निगरानी करने, शिपिंग लेन की सुरक्षा और तस्करी, डकैती जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में मदद करता है।

 


2020-21 में भारत ने कोविड महामारी के दौरान न केवल पूरे भारत में पहाड़ी और दुर्गम इलाकों में शीघ्रातिशीघ्र वैक्सीन और आवश्यक चिकित्सा आपूर्ति पहुंचाने में, बल्कि निकटवर्ती देशों की सहायता, जैसे नेपाल के दूर-दराज के इलाकों में पहुंचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया था। इस माध्यम से कठिन इलाके और सीमित पहुंच की चुनौतियों पर काबू पाया जा सकता है। इसी प्रकार कृषि क्षेत्र में भी ड्रोन द्वारा खेतों और फसलों पर दबाइयों के स्प्रे में भी इनका विशेष उपयोग होता है।

 


आत्मनिर्भरता प्राप्त करने की दिशा में भारतीय नौसेना को हाल ही में भारत का पहला स्वदेश निर्मित UAV' 'दृष्टि 10 स्टार लाइनर’ उपलब्ध हुआ। यह भारत की एक प्रमुख निजी कम्पनी अडानी डिफेंस एण्ड ऐरोस्पेस ने बनाया था। नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने इसकी विशेष सराहना करते हुए यह कहा कि संघर्ष के समय समुद्री सुरक्षा के लिए ड्रोन 'आसमान में तीसरी आंख’ साबित हो सकता है।

 


'दृष्टि' 36 घण्टे तक लगातार उड़ान भरने में सक्षम है और यह 450 किलोग्राम पेलोड वाली क्षमता का मानवरहित ड्रोन है। इस ड्रोन को STANAG 4671 सर्टिफिकेट भी मिला हुआ है, इसके चलते यह नाटो सदस्यों के हवाई क्षेत्र में भी संचालित हो सकता है। रक्षा मंत्रालय ने भारतीय नौसेना और भारतीय सेना को 4 MALE ड्रोन की आपूर्ति के लिए अडानी डिफेंस एण्ड एयरोस्पेस से अनुबन्ध किया था, जिनमें इन्हें दो-दो अगले कुछ महीनों में ही उपलब्ध करा दिये जायेंगे।

National Defence Drone Requirements For Country's Security And Border Surveillance
drone - फोटो : ANI

सैन्य ड्रोन उद्योग में निजी क्षेत्र का योगदान बहुत सामयिक है, जो भारतीय रक्षा को सामरिक लाभ और नई ऊंचाई प्रदान करेगा। कई सरकारी और निजी संस्थानों में ड्रोन से जुड़े हुए प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय उड़ान अकादमी ने फरवरी 2021 में भारत की पहली ड्रोन फ्लाइंग साइट पर DGCA प्रमाणित प्रशिक्षण शुरू किया। आत्मनिर्भर भारत नीति के अंतर्गत भारत सरकार ने ड्रोन और ड्रोन उपकरण के लिए 120 करोड़ रूपये के लागत की PLI स्कीम को मंजूरी दी है।

2022-23 के बजट में ड्रोन शक्ति योजना की भी घोषणा की गई थी, इसके तहत ड्रोन-एस-ए-सर्विस (DrAAS) के लिए स्टार्टअप को बढ़ावा दिया जाएगा। इसके साथ सभी राज्यों में चुनिंदा ITI में कौशल विकास के लिए ड्रोन से जुड़े हुए पाठ्यक्रम भी शामिल होंगे। इस समय भारत में ड्रोन के निर्माण के लिए 333 स्टार्ट-अप स्थापित हो चुके हैं, और देश के नौजवानों और उधमियों द्वारा और नी तेजी से विकसित किये जा रहे हैं।


पड़ोसी देशों में बढ़ती चुनौतियों और भू-रणनीतिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए यह बहुत महत्वपूर्ण है कि भारत इस क्षेत्र में जल्द से जल्द आत्मनिर्भरता हासिल करे। इसके लिए स्वदेशी विनिर्माण क्षमताओं और नई टेक्नोलॉजी  को विकसित करना जरूरी है। जैसे-जैसे दुनियाभर में प्रगति हो रही है भारत पीछे रहने का जोखिम नहीं उठा सकता। इस दृष्टि से भारत में जहां आत्मनिर्भरता के लिए DRDO और पब्लिक सेक्टर में ड्रोन निर्माण और टेक्नोलॉजी में तेजी से विकास किया जा रहा है, वहीं प्राइवेट सेक्टर द्वारा इस क्षेत्र में बहुत तेजी से काम हो रहा है। इसके साथ ही मित्र देशों से भी उच्च तकनीक और संयुक्त निर्माण के लिए करार किये जा रहे हैं। कुछ समय पहले अमेरिका के साथ रक्षा समझौते में भारत ने 30 MQ-9B प्रीडेटर ड्रोन खरीदने का समझौता किया था।


इस वर्ष भारत अपने गणतंत्र की 75वीं वर्षगांठ मना रहा है। गणतंत्र दिवस के मौके पर समारोह में देश के सैन्य बल और सुरक्षा उपकरणों का प्रभावशाली प्रदर्शन हुआ। इस अवसर पर फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मुख्य अतिथि थे। उनकी दो दिवसीय यात्रा पर भारत और फ्रांस सरकार के बीच कई मुद्दों पर समझते हुए। इसमें एक रक्षा समझौते (डिफेंस डील) के अंतर्गत दोनों देशों ने महत्वपूर्ण सैन्य साजो सामान साथ विकसित करने का एक महत्वाकांक्षी औद्योगिक रोडमैप जारी किया है।


आज जब हमारे देश को कुछ पड़ोसी देशों और अन्य तत्वों से सुरक्षा और तनावपूर्ण स्थिति का सामना करना पड़ रहा है, यह अपरिहार्य है कि हमारे सुरक्षा बलों को अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण, जिनमें उच्च-स्तरीय ड्रोन का विशेष महत्व है, उपलब्ध कराए जाएं और यह संतोष का विषय है कि हमारी सरकार और प्राइवेट क्षेत्र दोनो मिलकर इस बारे में तेजी से काम कर रहे हैं।
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नोट- धनेन्द्र कुमार भारत सरकार के भूतपूर्व रक्षा उत्पादन सचिव, विश्व बैंक में भूतपूर्व भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश और भूटान के कार्यकारी निदेशक, और प्रथम चेयरमैन सीसीआई रहे हैं।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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