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सफाई के लिए लगे ट्रीटमेंट प्लांट से ही गंगा की पवित्रता को खतरा

Wed, 31 May 2023 01:48 PM IST
Jay singh Rawat जयसिंह रावत
Updated Wed, 31 May 2023 01:48 PM IST
सार

अलकनन्दा नदी देवप्रयाग से चलने वाली पतित पावनी गंगा की मुख्य जलश्रोत है। गंगा में 60 प्रतिशत जलराशि का योगदान अलकनन्दा नदी के जलागम से और 40 प्रतिशत जलराशि भागीरथी के जलागम से है।

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Namami Gange Programme: The sewage treatment plant itself is polluting the Ganga
मलजल डाला जा रहा है, जिससे गंगा प्रदूषित हो रही है। - फोटो : जयसिंह रावत

विस्तार

बैकुंठ धाम के नाम से भी पुकारे जाने वाले बद्रीनाथ धाम का मलजल शोधन संयंत्र यानी कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) एक बार फिर चर्चाओं में आ गया है। नामामि गंगे परियोजना के तहत गंगा की निर्मलता और पवित्रता को बनाए रखने के लिए स्थापित यह प्लांट स्वयं गंगा को इसके उद्गम स्थल पर और वह भी बद्रीनाथ में मलजल डालकर प्रदूषित कर रहा है। इस संयंत्र द्वारा फैलाई जा रही गंदगी का मुद्दा दो बार नैनीताल हाइकोर्ट के समक्ष उठ चुका है। 

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अक्सर नदी में बहाई जाती है गंदगी

जोशीमठ के सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश कपरुवाण के अनुसार गत 19 मई से लेकर 25 मई तक तीन बार खाक चैक पर बने 26 हजार लीटर प्रति दिन (दशमलब 26 एमएलडी) क्षमता सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से मलजल सीधे गंगा में प्रवाहित किए जाने के वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो चुके हैं। कपरुवाण कहते हैं कि इतनी पवित्र नदी को ऐसे पवित्र स्थान पर और स्वयं पवित्रता बनाए रखने के लिए जिम्मेदार व्यवस्था द्वारा अपवित्र किया जाना बेहद चिन्ताजनक है। प्रतिदिन हजारों की संख्या में तीर्थयात्रियों की मौजूदगी में गंगा की पवित्रता का भंग होना और भी चिन्तनीय हो जाता है। 
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जल संस्थान ने एक दिन मैला बहाने की पुष्टि की

पवित्र अलकनन्दा में एसटीपी में जमा मलमूत्र आदि गंदगी को बहाए जाने पर उत्तराखण्ड जल संस्थान के अधीक्षण अभियन्ता सुशील कुमार से पूछने पर वे एक सप्ताह के अन्दर तीन दिन नदी में मलजल प्रवाहित करने का तो खण्डन करते हैं मगर एक दिन 19 मई को प्लांट में खराबी आ जाने के कारण सीवेज को अलकनन्दा में प्रवाहित किए जाने की पुष्टि अवश्य करते हैं।
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सुशील कुमार बताते हैं कि संयत्र में खराब मशीन को 19 मई को ही बदल दिया गया था और नदी में सीवेज के प्रवाह को रोक दिया गया था। अधीक्षण अभियन्ता यह भी बताते हैं कि मशीनरी का खराब हो जाना सामान्य बात है जिसे तत्काल ठीक करा दिया जाता है। लेकिन इस एसटीपी से नदी में सीवेज को प्रवाहित करने के जो तीन वीडियो वायरल हुए हैं वे 19 से लेकर 24 मई के बीच तीन अलग-अलग दिनों के हैं। जाहिर है कि जितनी बार प्लांट में गड़बड़ी होगी उतनी बार सीवेज सीधे अलकनन्दा में जाएगा। 

हर रोज बद्रीनाथ में हजारों लोग होते हैं निवृत

यात्रा सीजन में बद्रीनाथ धाम में  प्रतिदिन लगभग 15 हजार यात्री पहुंचते हैं। इनके अलावा व्यवसायी, पण्डा पुरोहित, पुलिस, प्रशासन के कर्मचारी, मंदिर समिति के कर्मचारी, नगर पंचायत के कर्मचारी और साधु सन्तों के अलावा मास्टर प्लान के सेकड़ों कर्मचारी और मजदूर वहां जमा होते हैं। जिनके मलमूत्र की निकासी इन्हीं प्लांटों तक पहुंचती है और पावर फ्लक्चुएशन या प्लांट में खराबी आने पर गंदगी सीधे अलकनन्दा में आ जाती है। 

अलकनन्दा मुख्य धारा है गंगा की

अलकनन्दा नदी देवप्रयाग से चलने वाली पतित पावनी गंगा की मुख्य जलश्रोत है। गंगा में 60 प्रतिशत जलराशि का योगदान अलकनन्दा नदी के जलागम से और 40 प्रतिशत जलराशि भागीरथी के जलागम से है। अलकनन्दा के धार्मिक महत्व को इसी बात से समझा जा सकता है कि इसी नदी पर उत्तराखण्ड के पंच प्रयाग स्थित हैं, जहां हर साल विशेष पर्वों पर लाखों लोग स्नान करते हैं। इसी नदी के क्षेत्र में बद्रीनाथ और केदारनाथ धाम स्थित है। इसी नदी के किनारे महत्वपूर्ण नगर होने के कारण प्रदूषण का सर्वाधिक खतरा अलकनन्दा किनारे ही रहता है। इसलिए नमामि गंगे परियोजना का फोकस इस नदी पर ज्यादा किया गया है। 

19 करोड़ की लागत से बने हैं सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट

यात्रा सीजन में तीर्थ यात्रियों की भारी भीड़ और अलकनन्दा के साथ ही बद्रीनाथ धाम की पवित्रता को देखते हुए नमामि गंगे परियोजना के तहत एक नहीं बल्कि तीन-तीन एसटीपी 19 करोड़ की लागत से बद्रीनाथ पुरी में स्थापित किए गए थे। इनमें से एक खाक चैक पर ( दशमलब 26 एमएलडी क्षमता) दूसरा खाक चैक के सामने नदी पार मानव कल्याण आश्रम के निकट (1 एमएलडी) और तीसरा मंदिर की सीढ़ियों के नीचे पुल के पास स्थापित किया गया है।

इन तीनों में सबसे चर्चित खाक चैक वाला प्लांट है। स्थानीय लोगों को आशंका है कि प्लांट से जब दिन दहाड़े सीवेज नदी में प्रवाहित किया जा सकता है तो रात के अंधेरे में और यात्रा सीजन के बाद भी प्लांट के टैंक को नदी में खाली कराया जा सकता है।

Namami Gange Programme: The sewage treatment plant itself is polluting the Ganga
नैनीताल हाईकोर्ट पहुंचा मामला - फोटो : अमर उजाला

पहली बार नही मलजल बहाने की शिकायत

सनातन धर्मावलम्बियों के चार सर्वोच्च धामों में से एक बद्रीनाथ में मलजल की बेतरतीव निस्तारण से उत्पन्न गंदगी की शिकायत पहली बार नहीं है। इससे पहले 15 जून 2018 को चेतना भरद्वाज नाम की महिला की जनहित याचिका पर नैनीताल हाइकोर्ट की जस्टिस वी.के. बिष्ट और जस्टिस अलोक सिंह की खण्डपीठ ने इसी मुद्दे को लेकर केन्द्र और राज्य सरकार को नोटिस जारी किया था। यही नहीं सन् 2005 में भी हाइकोर्ट के समक्ष यह मुद्दा उठा था। 

नैनीताल हाइकोर्ट में जा चुका है मामला

अपनी पीआइएल में चेतना भारद्वाज ने शिकायत की थी कि बद्रीनाथ मंदिर से 500 मीटर से भी कम दूरी पर अलकनन्दा नदी के किनारे मानकों की अनदेखी कर एसटीपी लगाया गया है। इसके निकट अन्न क्षेत्र आश्रम है जहां बड़ी संख्या में साधू सन्तों को भोजन कराया जाता है। जबकि वहां बदूबू फैली रहती है।

चेतना ने अपनी याचिका में कहा था कि उन्होंने 6 जून 2018 को एसटीपी का दौरा किया तो वह हैरान रह गईं। नदी किनारे एक आवासीय और धार्मिक क्षेत्र में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट न केवल नामामि गंगे कार्यक्रम के उद्देश्य को विफल करता है अपितु वहां के निवासियों और वहां आने वाले श्रद्धालुओं के लिए तनाव और बीमारी पैदा करता है। याचिका में कहा गया है कि प्लांट को पहले मंदिर से काफी दूर जोशीमठ मार्ग पर अलकनन्दा वन्य विहार में लगाया जाना था लेकिन बाद में प्लांट खाक चैक पर लगा दिया गया। 

नमामि गंगे परियोजना का हो रहा उद्धेश्य विफल

नमामि गंगे कार्यक्रम एक एकीकृत संरक्षण मिशन है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा जून 2014 में 20,000 करोड़ रुपये के बजट परिव्यय के साथ राष्ट्रीय नदी गंगा के प्रदूषण, संरक्षण और कायाकल्प के प्रभावी उन्मूलन के दोहरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए ‘फ्लैगशिप प्रोग्राम’ के रूप में अनुमोदित किया गया था।

नमामि गंगे परियोजना के 2021 के आंकड़ों के अनुसार परियोजना के तहत उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान राज्यों में 48 सीवेज प्रबंधन परियोजनाएं कार्यान्वित की जा रही हैं और 99 सीवेज परियोजनाएं पूरी की जा चुकी हैं। इन राज्यों में 27 सीवेज परियोजनाएं निविदा के अधीन हैं और 8 नई सीवेज परियोजनाएं शुरू की गई हैं। 5658.37 (एमएलडी) की सीवरेज क्षमता सृजित करने का कार्य निर्माणाधीन है। 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदाई नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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