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Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   Nagaland Civic Election 2024: 33 Percent Reservation For Women In Nagaland First Time In India

नागालैंड में पहली बार निकाय चुनावों में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण

Prabhakar Mani Tewari प्रभाकर मणि तिवारी
Updated Tue, 25 Jun 2024 06:35 PM IST
सार

इस चुनाव में पहली बार महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्थानीय आदिवासी संगठनों के भारी विरोध और बड़े पैमाने पर होने वाली हिंसा के कारण ही बीस साल से यह चुनाव नहीं कराए जा सके थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्ताक्षर और कड़े रुख की वजह से राज्य सरकार को महिला आरक्षण विधेयक पारित करना पड़ा। यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है।

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Nagaland Civic Election 2024: 33 Percent Reservation For Women In Nagaland First Time In India
Nagaland Civic Election - फोटो : Istock

विस्तार

पूर्वोत्तर राज्य नागालैंड में बुधवार 26 जून को करीब 20 साल बाद स्थानीय निकाय चुनाव के लिए मतदान होगा। लेकिन यह कोई नई बात नहीं है। नई बात यह है कि इस चुनाव में पहली बार महिलाओं के 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान किया गया है। महिला आरक्षण के मुद्दे पर स्थानीय आदिवासी संगठनों के भारी विरोध और बड़े पैमाने पर होने वाली हिंसा के कारण ही बीस साल से यह चुनाव नहीं कराए जा सके थे। बाद में सुप्रीम कोर्ट के हस्ताक्षर और कड़े रुख की वजह से राज्य सरकार को महिला आरक्षण विधेयक पारित करना पड़ा। यह चुनाव सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में हो रहा है।

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हालांकि, अब भी राज्य के सबसे ताकतवर नागा संगठन ईस्टर्न नागा पीपुल्स ऑर्गेनाइजेशन (ईएनपीओ) ने इस चुनाव के बायकाट की अपील की है। लेकिन अबकी बार इसमें महिलाओं की भागीदारी काफी बढ़ गई है। उसने राज्य के छह पूर्वी जिलों के लोगों से इस चुनाव में हिस्सा नहीं लेने की अपील की है। यहां इस बात का जिक्र प्रासंगिक है कि हाल के लोकसभा चुनाव में स्थानीय संगठनों की अपील कर छह पूर्वी जिलों में एक भी वोट नहीं पड़े थे। इससे संगठन के असर को समझा जा सकता है।

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राज्य के चुनाव आयुक्त टी जे लोंग कुमार बताते हैं-

 

शांतिपूर्ण मतदान की तमाम तैयारियां पूरी हो गई हैं। चुनाव की राह में कई कानूनी बाधाएं और चुनौतियां थीं। लेकिन अब उनको दूर कर लिया गया है।

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चुनाव आयुक्त ने बताया कि इस चुनाव में कुल 523 उम्मीदवार मैदान में हैं। पहले कुल 670 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किया था। लेकिन उनमें से 79 ने अपने नाम वापस ले लिए और चार का नामांकन कागजात अधूरे रहने के कारण खारिज हो गया था। मतदान से पहले ही 64 उम्मीदवार निर्विरोध चुन लिए गए हैं। इनमें सत्तारूढ़ नेशनलिस्ट डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी (एनडीपीपी) के सबसे ज्यादा 45 उम्मीदवार हैं। इसके अलावा भाजपा के सात, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (भाजपा) के पांच, कांग्रेस के तीन, नागा पीपुल्स फ्रंट के दो उम्मीदवारों के अलावा दो निर्दलीय भी शामिल हैं।


राज्य की 39 नगर पालिका और नगर परिषदों की कुल 418  सीटों में से 112 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। कोहिमा, दीमापुर और मोकोकचुंग में नगर पालिका परिषद है और बाकी जगह नगर परिषद।

निष्पक्ष और शांतिपूर्ण मतदान के लए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत कर दी गई है। पहली बार यहां किसी चुनाव में सुरक्षा की जिम्मेदारी राज्य पुलिस को सौंपी गई है। चुनाव आयोग के मुताबिक, राज्य के 530 मतदान केंद्रों में से 92 सामान्य, 209 संवेदनशील और बाकी बेहद संवेदनशील हैं। 

Nagaland Civic Election 2024: 33 Percent Reservation For Women In Nagaland First Time In India
नागालैंड पूर्वोत्तर का पहला राज्य है जहां किसी चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया है। - फोटो : Istock

बीते दो दशकों के दौरान राज्य में इस मुद्दे पर भारी हिंसा होती रही है। वर्ष 2017 में तो इस मुद्दे पर हुई हिंसा में कम से कम दो लोगों की मौत हो गई थी और बड़े पैमाने पर तोड़-फोड़ और आगजनी हुई थी। उसके बाद चुनाव स्थगित कर दिए गए थे। आदिवासी संगठनों के विरोध के कारण तब मुख्यमंत्री टी आर जेलियांग को भी अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

उस साल राज्य में एक फरवरी को शहरी निकाय चुनावों के लिए मतदान होना था। इस मौके पर टी आर जेलियांग के नेतृत्व वाली नागा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) सरकार, जिसमें बीजेपी भी साझीदार थी, ने महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण पर मुहर लगा दी। लेकिन विभिन्न नागा संगठनों ने बड़े पैमाने पर इसका विरोध शुरू कर दिया।
 

दूसरी ओर, महिला संगठन नागा मदर्स एसोसिएशन भी अबकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के हवाले आरक्षण की मांग पर अड़ा रहा। इसी पर टकराव शुरू हुआ। हालात इतने बेकाबू हो गए कि राज्य में सेना उतारनी पड़ी और हिंसा में दो लोगों की मौत हो गई। आखिर राज्यपाल ने इन चुनावों को रद्द कर दिया था।


दरअसल, वर्ष 2012 में नागा मदर्स एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट में दायर एक याचिका में अदालत से शहरी निकायों में महिलाओं को 33 फीसद आरक्षण मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार को निर्देश देने की अपील की थी।

दो साल चली सुनवाई के बाद बीते साल अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने उसके पक्ष में फैसला सुनाया। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हुए सरकार ने इन चुनावों के लिए मतदान कराने का फैसला किया। उसके बाद महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण को मंत्रिमंडल की हरी झंडी मिल गई।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि नागालैंड पूर्वोत्तर का पहला राज्य है जहां किसी चुनाव में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान लागू किया गया है। राज्य में अक्सर राजनीतिक दलों पर महिलाओं की अनदेखी करने के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन अब यह चुनाव एक नई मिसाल कायम कर सकता है।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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