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विश्व सिनेमा की जादुई दुनिया: मार्गरेट बूथ- ‘फिल्म एडिटर’ की संज्ञा पाने वाली महिला

Tue, 08 Sep 2026 12:12 PM IST
Dr. Vijay Sharma डॉ. विजय शर्मा
Updated Tue, 08 Sep 2026 12:12 PM IST
सार

मार्गरेट बूथ ने 45 फिल्मों की एडिटिंग की। जब उन्होंने शुरू किया, जाहिर है, तब मूक फिल्मों का दौर था। बाद में उन्होंने सवाक फिल्में भी एडिट कीं। पहले फिल्म एडिटर को फिल्म कटर कहा जाता था।

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History of world cinema Margaret Booth American film editor and producer
सिनेमा की दुनिया - फोटो : Freepik.com

विस्तार

14 जनवरी 1898 को कैलिफोर्निया में जन्मी मार्गरेट बूथ जब फिल्म कटिंग की दुनिया में आईं, तो उस समय औरतें फिल्म जोड़ने का कार्य तो कर रही थीं, मगर उन्हें सिने-उद्योग में कोई स्थान-सम्मान प्राप्त न था। 28 अक्टूबर 2002 को जब वे स्ट्रोक की जटिलताओं के चलते कैलिफोर्निया में गुजरीं तो कई लोगों ने उन्हें आदर के साथ याद किया।

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उनकी श्रद्धांजलि में गार्डियन अखबार ने लिखा: ‘अपने साउंड एवं विजन की अंतिम एडिटिंग केलिए सारे फिल्ममेकर को उनके अनुमोदन से गुजरना होता था।’ वे क्लासिक एडिटिंग शैली की अग्रणी थीं। 
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क्लासिक एडिटिंग का मतलब होता है, ‘इनविजिबल कटिंग’, क्लासिक एडिटिंग ‘इनविजिबल कटिंग’ भी कहलाती है। इस एडिटिंग की विशेषता होती है, एक इमेज से दूसरी इमेज में बिना किसी दरार के सरकते जाना, ताकि दर्शक शॉट के क्रम प्रवाह को ही देखे, ये शॉट अलग-अलग लिए गए थे, दर्शक इस बात से अनभिज्ञ रहे। इसमें एक्शन काटते वक्त समय और स्पेस के तारतम्यता को बनाए रखा जाता, कथानक प्रमुख होता है।
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मार्गरेट बूथ ने 45 फिल्मों की एडिटिंग की। जब उन्होंने शुरू किया, जाहिर है, तब मूक फिल्मों का दौर था। बाद में उन्होंने सवाक फिल्में भी एडिट कीं। पहले फिल्म एडिटर को फिल्म कटर कहा जाता था। ‘फिल्म एडिटर’ की संज्ञा पाने वाली वे पहली एडिटर, वो भी महिला हैं।

कारी ब्यूचैम्प अपनी किताब ‘विदआउट  लेइंग डाउन: फैंसेस मैरिओन एंड द पावरफुल वीमेन ऑफ अर्ली हॉलीवुड’ में लिखते हैं: “प्रसिद्ध प्रड्यूसर इर्विंग तैलबर्ग ने बूथ के साथ फिल्म कटर को ‘फिल्म एडिटर’ कहना शुरू किया। वे उन पर उतना ही निर्भर करते थे, जितना (वे करते थे) किसी लेखक पर।’

एडिटर के साथ प्रोड्यूसर का भी किया काम
 
अपने लम्बे जीवन में तीन शताब्दी से गुजारने वाली मार्गरेट प्रोड्यूसर भी थीं। इतना ही नहीं, वे अपने समय में एमजीएम में एडिटर-इन-चीफ रहीं। मार्गरेट ने अपना काम डी डब्ल्यू ग्रिफिथ के साथ प्रारंभ किया। उनके यहां वे 1915 से 1920 तक रहीं। एमजीएम में उन्होंने 1926 से काम शुरू किया। वहां वे एक लम्बे समय- 1939 से 1968 तक सुपरवाइजिंग एडिटर रहीं।

खुद प्रड्यूसर रही मार्गरेट बूथ 1986 में अपने रिटायरमेंट के समय प्रड्यूसर रे स्टार्क केलिए काम कर रही थीं। उन्हें एडिटिंग से समय निर्देशकों का हस्तक्षेप पसंद नहीं था। अधिकांश निर्देशक बहुत खराब एडिटर होते हैं, ऐसा वे मानती थीं। उनके अनुसार प्रारंभ से वे फिल्म में लय खोजने की करती हैं, ताकि फिल्म को ‘कविता जैसी’ बनाया जा सके।

‘62 साल मोशन पिक्चर इंडस्ट्री को फिल्म एडिटर के असाधारण रूप से विशिष्ट सेवा’ करने हेतु 1977 में अकादमी ने ऑनरेरी ऑस्कर प्रदान किया। भले ही उन्हें खुद अकादमी पुरस्कार नहीं मिला लेकिन एमजीएम में सुपरवाइजर एडिटर के रूप में उन्होंने छ: अकादमी प्राप्त फिल्मों को गाइड किया था।

जिन 45 फिल्मों की उन्होंने एडिटिंग की फिल्म क्रेडिट में उनमें से कई में उनका नाम नहीं आता है, जैसे 1959 में ‘बेन-हर’ जैसी विश्व प्रसिद्ध फिल्म की एडिटिंग की पर उनका नाम क्रेडिट में नहीं है। इसी तरह ‘आवर डॉन्सिंग डॉटर्स’ ‘(1928), ‘द मेरी विशो’ (1925) की फिल्म में उनका नाम क्रेडिट में नहीं है। उस समय तक एडिटर का नाम क्रेडिट में देने की बात किसी ने नहीं सोची थी।

हां, ‘दि एनिमी’ (1927), ‘द मिस्टिरियस लेडी’ (1928), ‘फाइव एंड टेन’ (1931), ‘बमशेल’ ‘(1933), 1935 की ‘म्युटिनी ऑन द बाउंटी’ (इसके लिए उन्हें अकादमी का नामांकन मिला था।), ‘कैमिले’ (1936), ‘मर्डर बाई डेथ’ (1976) तथा ‘एनी’ (1980) जैसी नामी कुछ फिल्मों के क्रेडिट में उनका नाम मिलता है।



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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

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