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जब गोवा में सुबह से 2 बजे रात तक मीटिंग करते रहे परिकर और फिर अचानक दिल्ली में..!

Mon, 18 Mar 2019 04:47 PM IST
सारंग उपाध्याय संजय मिश्र
संजय मिश्र Published by: सारंग उपाध्याय Updated Mon, 18 Mar 2019 04:47 PM IST
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मुख्यमंत्रियों के कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलते मनोहर परिकर ( फाइल फोटो) - फोटो : PTI

जब भी पत्रकार राज्यों का चुनाव कवर करने किसी राज्य में जाते हैं तो उनका प्रयास जनता की नब्ज टटोलने के साथ ही उस राज्य के बड़े नेताओं से मिलकर उनकी रणनीति और उनके नजरिए को समझने की होती है। इसी नजरिए से गोवा के ईमानदार एवं कर्तव्यनिष्ठ नेता मनोहर परिकर जी के साथ 25 जनवरी 2017 की देर रात को मिलना हुआ था।

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अमर उजाला में विशेष संवाददाता कार्य करते हुए वर्ष 2017 में सम्पन्न गोवा विधानसभा चुनाव कवर करने का वह मौका था। जब दिल्ली से राज्य का चुनाव कवर करने गए अन्य पत्रकार मित्रों से भी मुलाकात हुई। सबने निर्णय किया कि गोवा आए हैं तो सादगी की पहचान रखने वाले परिकर जी से मिलना और उनका इंटरव्यू करना तो बनता है, क्योंकि जमीन पर सभी वर्गों में परिकर की लोकप्रियता नजर आ रही थी। चाहे वह वर्ग भाजपा का विरोधी क्यों न हो, मगर परिकर की कार्यशैली का कायल था। वैसे भी अलग-अलग संस्थानों से आए करीब 8-9 पत्रकार मित्रों का समूह बन गया था। उस वक्त परिकर देश के रक्षा मंत्री थे। उनसे मिलने का विचार करते वक्त दिन में यह ध्यान नहीं आया कि अगले दिन 26 जनवरी है और रक्षा मंत्री के रूप में उनका दिल्ली रहना अनिवार्य है।
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खैर, सभी ने अपने-अपने प्रयास शुरू कर दिए।  मालूम चला कि परिकर जी गोवा में ही पार्टी के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। अब इससे तसल्ली हुई कि यहां आए हैं तो रक्षा मंत्री का इंटरव्यू मिल जाएगा।  
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मनोहर पर्रिकर अपन सादगीपूर्ण जीवन के लिए भी लोकप्रिय थे। - फोटो : SELF

इस तरह उनसे समय लेने की कोशिश शुरू हुई। लेकिन सफलता नहीं मिल पा रही थी। अंत में मैंने केंद्र सरकार के एक अन्य मंत्री को फोन लगाया और उनसे परिकर जी का समय तय कराने में मदद की गुहार लगाई। उन्होंने आश्वासन दिया और ठीक दो घंटे बाद उनका फोन मुझे वापस आया। उन्होंने परिकर जी के सहयोगी सानील का नंबर भेजा और बताया कि रात्रि 8:30 में हम लोगों की मुलाकात परिकर जी से हो जाएगी।

करीब साढ़े चार बजे यह खुशखबरी हमें मिल चुकी थी। मैंने भी परिकर जी के सहयोगी सानील को फोन कर उनसे समय और जगह पक्का पूछ लिया। उन्होंने रात्रि 8:30 बजे राज्य भाजपा ऑफिस पणजी में मिलने का समय बताया। अपनी-अपनी सुविधानुसार हम सभी पत्रकार मित्र ठीक 8:30 बजे राज्य भाजपा के पणजी ऑफिस पहुंच गए, लेकिन मालूम चला कि परिकर जी वहां पहुंचे ही नहीं हैं।  

खैर, कार्यालय में उपस्थित राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री बी.एल संतोष जी से हम लोगों की मेल मुलाकात हुई और उनसे चुनावी तैयारियों और जमीनी हकीकत पर चर्चा शुरू हुई। इस बीच उन्होंने भी परिकर जी के सहयोगी से संपर्क साधने का प्रयास किया ताकि उनसे मिलने में हमारी मदद कर सकें। मगर दूर देहात में होने की वजह से फोन का नेटवर्क मिल नहीं पा रहा था। बावजूद हम लोगों की कोशिश जारी रही, लेकिन करीब 10:30 बज गए और सभी पत्रकार मित्रों को भूख भी लग आई थी।

 

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कैंसर जैसी बीमारी के बावजूद भी उनका हौसला टूटा नहीं था और वे लगातार काम कर रहे थे। - फोटो : social media

परिकर जी के इंटरव्यू की चाहत में सभी बिना रात्रि भोजन के पहुंचे थे। इसी बीच मेरा संपर्क स्थापित हुआ परिकर जी के सहयोगी के साथ। उन्होंने जानकारी दी कि वे अभी भी पणजी से 60 किमी. की दूरी पर हैं और कार्यकर्ताओं से मिलना जारी है जिससे उन्हें पणजी पहुंचने में काफी देर होगी। अब परिकर जी से मिलने की संभावना कम होती जा रही थी। सानील से बातचीत के बात हमने सबसे पहले कहीं कुछ भोजन करने का तय किया।
 
इसके बाद स्थानीय लोगों से मालूम कर हमने भोजन के लिए होटल की ओर रुख किया। लेकिन एक बार फिर मायूसी हाथ लगी कि शायद अब परिकर जी का इंटरव्यू करने का मौका न मिल सके। इस बीच भोजन करते-करते मैंने अपनी अंतिम कोशिश जारी रखी। परिकर जी से मुलाकात के लिए एक बार फिर प्रयास शुरू हुए और एक बार फिर केंद्रीय मंत्री को फोन लगाया और कहा कि- भाई साहब अभी तक परिकर जी से मिलना नहीं हो पाया है, इंटरव्यू तो दूर की बात। हम लोग महज 10 मिनिट का समय मांग रहे थे।

बहरहाल, उक्त मंत्री जी ने दोबारा प्रयास का आश्वासन दिया और ईमानदार कोशिश की।  थोड़ी देर में उनका वापस फोन आया और रात्रि 11:30 बजे पणजी के मांडवी होटल पहुंचने की जानकारी दी। आगे बढ़ने पर होटल मैनेजर से परिकर जी के बारे में पूछने पर मालूम चला कि वे अब भी नहीं पहुंचे हैं मैनेजर ने हमे नीचे वेटिंग हाल में बैठने का इशारा दिया। उसे शायद हमारे आने की सूचना थी। सानील जी को दोबारा फोन करने पर उन्होंने होटल में ही बैठने व चाय-कॉफी पीने को कहा। करीब आधी रात ही हो चली थी। इस बीच सामने के एक हाल में भाजपा कार्यकर्ताओं की उपस्थिति थी। परिकर उनकी मीटिंग लेने वाले थे। इस वजह से हमें और देर होने के आसार नजर आने लगे।
 
इसके बाद रात के तकरीबन 12:35 बजे परिकर जी ने होटल में प्रवेश किया। स्वागत हाल पर लोगों से मिलने के बाद वो हमारी ओर आने लगे सानील ने हमारी ओर उन्हें रुख करने का इशारा किया। परिकर जी ने आते ही सबसे हाथ मिलाया और हम लोगों के बीच बैठे। सबसे पहले उन्होंने पूछा कि भोजन हुआ कि नहीं और अपने सहयोगी को हमे भोजन कराने का इशारा किया। लेकिन हम लोगों ने भोजन कर लेने की बात करते हुए उनके आग्रह के लिए धन्यवाद दिया।  


 

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वे बेहद परिश्रमी और लगातार काम करने वाले राजनेता थे। - फोटो : social media

इसके बाद एक-एक कर सभी मित्रों का परिचय शुरू हुआ और सबने अपना विजिटिंग कार्ड रक्षा मंत्री को साझा किया। अब राज्य के राजनीतिक हालात पर चर्चा शुरू हुई। इस बीच उन्होंने हम लोगों के लिए कॉफ़ी की पेशकश कर दी। राज्य की जमीनी एवं राजनीतिक हालात की चर्चा के बाद हमने एक-एक कर अपने सवाल दागने शुरू कर दिए। वो भी बखूबी जवाब देते रहे। इस बीच घड़ी की सुई 1:20 बजा रही थी और सानील का इशारा भी हम लोगों को मिल चुका था, क्योंकि सामने के बड़े हाल में उपस्थित पार्टी कार्यकर्ताओं संग परिकर को बैठक भी करनी थी। बावजूद उसके परिकर जी का करीब 15 मिनट और ले पाने में हम सफल रहे। सभी सवालों का जवाब उन्होने बखूबी दिया।

इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक चैनल के मित्रों ने टिक-टैक् किया। सानील ने बताया कि इस कार्यकर्ता बैठक के बाद परिकर जी की एक अन्य मीटिंग है और 26 जनवरी परेड में शामिल होने के लिए उन्हें सुबह 4:30 की फ्लाइट भी पकड़नी है। खैर, होटल में उनके साथ उपस्थित लोगों से शिष्टाचार पूरी करने के बाद हम सभी पत्रकार अपनी-अपनी गाड़ियों से अपने-अपने होटल की ओर रुख कर गए। कुछ लंबी यात्रा के बाद मैं भी करीब 2:30 बजे अपने होटल पहुंचा और सो गया।

सुबह देर से नींद खुली तो टीवी ऑन करते ही देखा कि परिकर जी इंडिया गेट पर हैं और 26 जनवरी परेड में शामिल हैं।  सभी पत्रकार बंधु अपना इंटरव्यू फ़ाइल करने के बाद दोपहर में भोजन पर साथ मिले। देर रात तक जागने और मेहनत की कसक नहीं थी और परिकर जी से मिलने और इंटरव्यू के बाद सभी मिशन को सफल व कामयाब मान रहे थे। गोवा की वह चुनावी यात्रा सबके लिए आज भी यादगार है।

सादर नमन कर्तव्यनिष्ठ मनोहर परिकर. ॐ शांति।

लेखक संजय मिश्र अमर उजाला के पूर्व पत्रकार और अब त्रिपुरा के मुख्यमंत्री के मीडिया सलाहकार हैं।



डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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