मकर संक्रांति 2022: मकर संक्रांति खुशी के सूचकांक का उच्चतम बिंदु है
खुश और संतुष्ट रहने के विभिन्न तरीकों के लिए खुद को शिक्षित करते हुए मुझे सनातन हिंदू धर्म के बारे में कुछ बहुत ही रोचक तथ्य मिले। धर्म एक ऐसी चीज है जिसे हम समझते हैं, धारण करते हैं और फिर एक पूर्ण जीवन के लिए लागू करते हैं। मकर संक्रांति का पर्व हमें कई मायनों में वैज्ञानिक समाज बनाता है।
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खुश और संतुष्ट रहने के विभिन्न तरीकों के लिए खुद को शिक्षित करते हुए मुझे सनातन हिंदू धर्म के बारे में कुछ बहुत ही रोचक तथ्य मिले। धर्म एक ऐसी चीज है जिसे हम समझते हैं, धारण करते हैं और फिर एक पूर्ण जीवन के लिए लागू करते हैं। हिंदू धर्म शाश्वत् है। हालांकि, हमारे शास्त्र और लेख हमें 5000 साल पहले की प्रथाओं के बारे में बताते हैं।
मैं वास्तव में उस समय के परिवर्तनकारी वैज्ञानिकों द्वारा डिजाइन की गई सूक्ष्म गतिविधियों से चकित हूं, जिन्होंने सभी गतिविधियों का अभ्यास किया और उनमें महारत हासिल की। इसलिए हम उन्हें ऋषि कहते हैं। जितना अधिक मैं पढ़ती हूं, उतना ही मैं योग्य और सक्षम महसूस करती हूं। पढ़ने से ही अपनेपन का विकास होता है। और हम सुखी महसूस करते हैं।
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जब हम खुश होते हैं तो अपनी खुशी साझा करना चाहते हैं और उन लोगों को सशक्त बनाना चाहते हैं जिनसे हम प्यार करते हैं। महिलाएं सदियों से अपने परिवार के लिए सशक्तिकरण प्रशिक्षक रही हैं। यदि हम अपने परिवारों को ज्ञान के अनुभवों के माध्यम से सशक्त बना सकते हैं तो हम सभी उस सशक्त जाति का हिस्सा बन सकते हैं, जो मनुष्य होने के योग्य है।
मकर संक्रांति और हमारी परंपरा
जनवरी में हमारा पहला त्योहार "मकर संक्रांति" है। हम सभी जानते हैं कि इस त्योहार में क्या करना है, और हम यह भी जानते हैं कि पूरा भारत इसे अलग-अलग नामों से मनाता है। लेकिन, मैं आपको इस त्योहार की गतिविधियों का जादुई प्रभाव दिखाना चाहती हूं जिनका असर हमारे खुशी सूचकांक पर पड़ता है।
इस पर्व की गतिविधियां जैसे कि सूर्य पूजा, पतंग उड़ाना, अलाव के चारों ओर नाचना, गाना, नाचना, नदी में डुबकी लगाना और दूसरों को दान देना, इन सबका आध्यात्मिक महत्व है। यही नहीं इस पर्व पर मूंगफली, गुड़, तिल आदि से तैयार भोजन भी हमें संतुष्टि देता है। नदी में डुबकी लगाने से हमारी नकारात्मक ऊर्जाओं का शोधन होता है और हम खुद को अंदर से साफ महसूस करते हैं।
इस दिन पतंग उड़ाने का तात्पर्य आकांक्षी होने से है। लेकिन, ब्रह्मांड का पता लगाने और आकाश की तरह उड़ने का उत्साह होने के साथ ही हमें अपने अपनो और संस्कारों से जुड़े रहना का सकंल्प भी पतंग की डोरी देती है। ये हमें अनुशासित रहने और आत्म संयम का अभ्यास करते रहने को भी कहती है।
हमारे ऋषि-मुनियों को वर्षों पहले पता था कि सूर्य ऊर्जा का अंतिम और उत्तम स्रोत है और उन्होंने उस दिन की गणना की जब सूर्य की किरणें भारत की उपचार और स्फूर्तिदायक शक्तियों को अवशोषित करने के लिए सबसे अच्छी थीं।
मकर संक्रांति पर हमें इस तरफ भी ध्यान देना है कि हमारे सनातन और वैदिक ज्ञान का का लोप होने से ही समाज में, स्वास्थ्य, धन, संबंध, शांति आदि सभी क्षेत्रों में तनाव और अवसाद बढ़ा है। जब हम एक साथ आते हैं और अपने त्योहार मनाते हैं, तो हम वास्तव में अपनेपन की भावना रखते हैं और हमारी खुशी का सूचकांक ऊपर उठता है।
मकर संक्रांति का अर्थ यही है। इस दिन सभी देवता विष्णु की पूजा कर अपने उपक्रम पर निकलते हैं। आइए हम भी अपने अंतर्मन को सशक्त करें। पालनकर्ता की आराधना करें और हर हाल में खुश रहने का संकल्प लें और दूसरों की खुशियों के लिए उत्प्रेरक बनें।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।