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गांधी और स्त्री सशक्तीकरण: महिलाओं के लिए बापू ने कैसे समाज की कल्पना की थी?

Fri, 02 Oct 2020 02:34 AM IST
Sunita Mini सुनीता मिनी
Updated Fri, 02 Oct 2020 02:34 AM IST
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Mahatma gandhi Jayanti 2020: Gandhiji and Women Empowerment amid Rape, gangrape and murders in Society
Sunita - फोटो : Social Media

उत्तर प्रदेश के हाथरस में दलित लड़की के साथ जो कुछ भी हुआ, ऐसे भारत की कल्पना कभी नहीं की होगी हमारे राष्ट्रपिता ने। आज से तकरीबन 100 साल पहले महिला सशक्तीकरण का संदेश देनेवाले महात्मा आज शायद ये सब बर्दाश्त नहीं कर पाते। गांधीजी हमेशा से से नारियों को बराबरी का दर्जा देने के लिए प्रयासरत रहे। 

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महात्मा गांधी की महिलाओं के बारे में जो सोच है, उसे उनकी आत्मकथा ‘सत्य के साथ मेरे प्रयोग’ के तौर पर ज्यादातर जोड़ कर देखा गया है लेकिन उस दौर में भी उनकी सोच महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर जितनी सुदृढ़ थी वह इस दौर के लोगों के लिए एक मिसाल है। आज बापू के विचारों पर फिर से गौर करने का समय है। 
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ऐसे समय में जब महिलाओं पर अत्याचार के मामले आए दिन सोशल मीडिया पर छाए रहते हैं, बापू का 99 साल पहले 15 सितंबर 1921 को यंग इंडिया में लिखा वक्तव्य आज भी सही प्रतीत होता है, 

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आदमी जितनी बुराइयों के लिए जिम्मेदार है, उनमें सबसे घटिया नारी जाति का दुरूपयोग है।

सच्चाई यही है कि पुरुषों की मानसिकता में आज भी कोई खास बदलाव नहीं आया है। पुरुषवादी मानसिकता ने महिलाओं को भोग की वस्तु और अपना गुलाम ही समझा है। गांधीजी ने साफ-साफ कहा था कि वे अगर महिला होते तो पुरूषों द्वारा किए गए अत्याचार को कतई बरदाश्त नहीं करते। 


बापू ने सीता और द्रौपदी को नारियों में आदर्श माना, इसलिए नहीं कि ये धार्मिक पात्र हैं, बल्कि इसलिए कि ये दोनों साहसी थीं और दोनों प्रतिरोध करना जानती थीं। कभी किसी के आगे झुकी नहीं। धर्म और परंपराओं में आस्था रखने वाले महात्मा ने इसे कभी बेड़ी की तरह नहीं देखा और कुरीतियों का विरोध किया। उनका मानना था कि परंपराओं की नदी में तैरना अच्छी बात है लेकिन उसमें डूब जाना आत्महत्या के समान है। 

महात्मा गांधी ने यह स्वीकार किया है कि उन्हें अहिंसा और सत्याग्रह के मार्ग पर चलने की प्रेरणा अपनी मां और पत्नी से मिली। पत्नी कस्तूरबा उस काल की परंपरागत पत्नियों से अलग थीं, पुरुषों की दासता उन्हें भी पसंद नहीं थी, इसी वजह से मोहनदास को दबंग पति से समझदार पति बनने में सहायता की। उनका यह भी मानना था कि दांडी मार्च और सत्याग्रह महिला कार्यकर्ताओं की वजह से ही सफल हो पाया। 

 

Mahatma gandhi Jayanti 2020: Gandhiji and Women Empowerment amid Rape, gangrape and murders in Society
गांधीजी ने कांग्रेस में महिला नेतृत्व को प्रोत्साहन दिया और अपने हर आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की
गांधीजी महिलाओं को सशक्तीकरण के विषय के रूप में नहीं देखते थे, बल्कि उनका मानना था कि महिलाएं स्वयं इतनी सबल हैं कि खुद की ही नहीं वरन संपूर्ण मानव जाति के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उनका कहना था कि कि अगर महिलाओं को आजाद होना है तो उन्हें निडर बनना होगा। परिवार और समाज के बंधनों को तोड़ते हुए उनपर थोपे गए अन्याय का विरोध करना ही उन्हें जुल्मों से मुक्ति दिला सकता है। 

तत्कालीन नेता और पार्टियों से अलग गांधीजी महिलाओं को पुरूषों से किसी मामले में कम नहीं समझते थे, बल्कि उनका मानना था कि महिलाएं पुरूषों के मुकाबले अधिक सुहृदय और सुदृढ़ होती हैं। उन्हें महिलाओं को अबला कहना बिल्कुल पसंद नहीं था, इसे वे महिलाओं की आंतरिक शक्ति को दुत्कारना मानते थे। उन्होंने कई बार यह कहा कि जिन्हें हम अबला कहते हैं, वे अगर सबला बन जाएं तो हर असहाय शक्तिशाली हो जाएगा। 

गांधीजी ने कांग्रेस में महिला नेतृत्व को प्रोत्साहन दिया और अपने हर आंदोलन में उनकी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की। वर्ष 1921 में जब महिलाओं के मतदान का मुद्दा उठाया गया तो उन्होंने इसका भरपूर समर्थन किया। 2 मई 1936 के हरिजन में भी गांधी जी ने देश की शिक्षा पर अपना दृष्टिकोण व्यक्त करते हुए स्पष्ट कहा था कि स्त्री इतनी सशक्त हो जाए कि अपने पति को भी ‘न’ कहने में संकोच न हो। 

उनका कहना था कि महिलाओं को अपने अधिकारों और कर्तव्यों का ज्ञान होना चाहिए। गांधीजी बराबर कहते रहे कि महिलाओं को सशक्त बनना है तो इसकी पहल परिवार से ही करनी होगी। गलत बातों को वह जब तक सहेगी उसके साथ जुल्म होता रहेगा। गांधीजी ने कहा था- जिस दिन से एक महिला रात में सड़कों पर स्वतंत्र रूप से चलने लगेगी, उस दिन से हम कह सकते हैं कि भारत ने स्वतंत्रता हासिल कर ली है।

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
 
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