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बापू का स्त्री विमर्श: महात्मा गांधी ने अपने जीवन में महिलाओं से प्रेरणा भी ली और प्रेरित भी किया

Dr.Chitralekha Anshu डॉ.चित्रलेखा अंशु
Updated Fri, 02 Oct 2020 01:17 AM IST
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महात्मा गांधी के जीवन में कई महिलाएं रहीं जिनसे गांधी ने प्रेरणा ली
महात्मा गांधी के जीवन में कई महिलाएं रहीं जिनसे गांधी ने प्रेरणा ली

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गांधी सिर्फ नाम नहीं बल्कि स्वयं में एक विचार है। गांधी का नाम सुनते ही मन में कुछ सिद्धांत, दर्शन और संभावनाएं चलने लगती हैं। ये सभी विमर्श सत्य, अहिंसा, स्वराज, स्वदेशी और मानवतावाद से जुड़े हुए हैं। गांधी स्वयं को एक ऐसा व्यक्ति मानते थे, जो न तो एक स्त्री थे न ही एक पुरुष, बल्कि एक मानव थे। उन्होंने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि उनके अंदर एक स्त्री मन भी है जो बहुत ही कोमल और संवेदनशील भी है। 
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गांधी के स्त्री चिंतन के विषय में जस्टिस रानाडे ने एक बार लिखा था कि “हमलोग अपनी पूरी जिंदगी में स्त्रियों के हित में जितना काम कर पाएंगे, महात्मा गांधी एक दिन में  कर देते हैं। आज 21वीं सदी में महिलाओं की मुखर आवाज के पीछे गांधी का बहुत बड़ा योगदान है। या यों कहें की गांधी के जीवन में जो विचार तथा सिद्धांत पनपे उसकी प्रेरणा के पीछे भी कुछ महिलाएं शामिल हैं तो इसमें कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। 


गांधी ने हर उस व्यक्ति से सीखा जिसके विचार सत्य, धर्म तथा अहिंसा के करीब था। यहां धर्म पूजा पाठ नहीं बल्कि मानवतावाद से संबंधित विचार के रूप में अभिव्यक्त है। इस संदर्भ में सर्वप्रथम उन्हें अपनी माता पुतलीबाई से जीवन की बुनियादी सीख मिली जो धर्म, उपवास की कठोर पृष्ठभूमि, पठन-पाठन की प्रेरणा, बड़ों का आदर आदि नैतिक शिक्षा से संबंधित है। 

उन्हें अपनी माता से उपवास करने की प्रेरणा ऐसी मिली जो बीमारी या कमजोरी की हालत में भी तोड़ी न जा सके। यही कारण रहा कि स्वराज आंदोलन के समय गांधी कठोर से कठोर उपवास करते चले गए। उनकी माता अशिक्षित होते हुए भी उनके भीतर ज्ञान एवं अनुशासन की ऐसी प्रेरणा जागृत कर गईं, जिसे पढ़कर और महसूस करके हम आज भी चमत्कृत होते हैं।

उनके जीवन में दूसरी महत्वपूर्ण स्त्री कस्तूरबा बाई थीं, जो न केवल उनकी पत्नी थी बल्कि उनकी बाल सखा भी थीं। बाल सखा इसलिए, क्योंकि दोनों का विवाह बचपन में ही हो गया था। कस्तूरबा बचपन से ही स्वतंत्र स्वभाव की महिला थी, जो किसी भी प्रकार की मानसिक गुलामी को स्वीकार नहीं कर पाती थीं। उस समय अधिकतर महिलाएं अपने पति को परमेश्वर की तरह मानती थी किन्तु कस्तूरबा वैसी बातें कभी स्वीकार न करती जो उन्हें पराधीन बनाती थीं। बल्कि वे गांधी से उनके पूरे जीवन में प्रश्न पूछती रहीं हैं। 

गांधी को उनसे सहनशीलता हठ, स्वतंत्र व्यक्तित्व, प्रतिप्रश्न की प्रेरणा मिली। गांधी दक्षिण अफ्रीका सत्याग्रह में लिखते हैं कि, ‘पत्नी ने अपनी अद्भुत सहनशीलता के द्वारा मुझपर विजय प्राप्त किया’। मां और पत्नी के अलावा भी महात्मा गांधी के जीवन में कई महिलाएं रहीं जिनसे न केवल गांधी ने प्रेरणा ली बल्कि उनके कार्यों की प्रशंसा भी की। उनमें सरोजिनी नायडू को गांधी एक बुद्धिजीवी महिला के रूप में चिह्नित करते हैं। एक ऐसी महिला जो भारतीय होते हुए भी पश्चिमी समाज में अत्यंत लोकप्रिय है। उनकी लोकप्रियता को गांधी ने रवींद्र नाथ ठाकुर के समकक्ष आका है। 
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