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महाशिवरात्रि विशेषः विविधताओं के देवता हैं शिव, जीवन के विविध रंगों में दिखाई देते हैं महादेव

Fri, 21 Feb 2020 07:23 AM IST
Gautam Chaudhary गौतम चौधरी
Updated Fri, 21 Feb 2020 07:23 AM IST
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mahashivratri 2020 importance o f lord shiva and significance of mahashivratri
महाशिवरात्रि का दिन शिव को याद करने का, उनके मनन और उनके व्यक्तित्व के स्मरण का दिन है। - फोटो : अमर उजाला

वरेण्य भ्राता शिव शिष्य हरीन्द्रानंद जी साहेब कहते हैं कि शिव विविधताओं के देवता हैं। हाल ही में जब उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि शिव को यदि आप इष्ट के रूप में मानते हैं तो मानिए लेकिन उससे भी उनका प्रभावशाली रूप गुरु का है। यदि आप सदेह गुरुओं के स्थान पर शिव को गुरु बना लेते हैं तो आपको न इस लोक में किसी प्रकार की कोई परेशानी होगी और न ही परलोक में किसी प्रकार की कोई समस्या होगी। एक बार उन्हें गुरु बना के तो देखिए।

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दरअसल, हमारी शिक्षा पद्धति समाज को स्वावलम्बी तो बना रही है, परन्तु कहीं न कहीं घरों में प्रेम, सहिष्णुता, सहनशीलता और समरसता खोती जा रही है। यदि शिव के व्यक्तित्व से आप प्रभावित हैं तो इन समस्याओं का समाधान सहज ही आपके पास चल कर आएगा।
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महाशिवरात्रि का दिन शिव को याद करने का, उनके मनन और उनके व्यक्तित्व के स्मरण का दिन है। हम किस तरह परिवार, हमारे परिवार किस तरह मोहल्ले व मोहल्ले किस नगर और देश-प्रदेश के साथ मिलजुल कर रह सकते हैं, वह हमें शिव से सीखना चाहिए। शिव प्रबंधन, योग, व्याकरण, संगीत, आयुर्वेद आदि जीवन के सभी विधाओं के गुरु हैं।

शिक्षाप्रद और महान हैं शिव 
बहुत शिक्षाप्रद है भगवान शिव का परिवार। परिवार में जितने सदस्य उतनी रुचियां, सभी की अलग-अलग प्रकृति, विभिन्न प्रकार के व्यवहार परन्तु इनके बावजूद सभी का एक छत के नीचे रहना समाज को बहुत कुछ सिखाता है। देखें तो शिव परिवार में शामिल हैं मां पार्वती, विनायक जी, भगवान कार्तिकेय, शिव के गले में फनियर नाग, जटा में गंगा व चन्द्रदेव, गणेश जी का वाहन मूषक, कार्तिकेय का वाहन मयूर, शिव का वाहन नन्दी, पार्वती का वाहन सिंह। इनमें प्राकृतिक रूप से सांप दुश्मन है चूहे का तो मोर की शत्रुता है भुजंग से।

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शिव विश्व गुरु हैं। कहा जाता है यदि शिव को गुरु मान लिया तो जीवन के सारे अंधकार दूर हो जाते हैं। - फोटो : अमर उजाला

इसी तरह सिंह का आहार है बैल, तो शिव की जटा में अग्निपुंज चन्द्रदेव व गंगा विभिन्न तासीर के हैं। इतने विरोधाभास के बाद भी सभी न केवल एक परिवार के सदस्य हैं बल्कि कभी सुनने में नहीं आया कि इस परिवार में कभी फूट पड़ी हो।

एक दूसरे के दुश्मन होते हुए आपस में मिलजुल कर रहते हैं। परिवार में रहन-सहन और खानपान में काफी विषमता होने के बावजूद भी सभी प्रेम, एकता और भाईचारे की भावना से रहते हैं। सामाजिक तौर पर देखें तो परिवारों में भी यह जरूरी है अलग-अलग विचारों, अभिरुचियों, स्वभावों के बावजूद हम लोग हिलमिल कर रहें अपनी सोच दूसरों पर न थोपी जाए और सबसे खास बात यह कि मुखिया और अन्य बड़े सदस्यों के गले में गरल थामें रखने का धीरज और सबको साथ लेकर चलने की आदत हो तभी संयुक्त परिवार चल सकते हैं।

शिव परिवार के विभिन्न विचारों वाले मोतियों को एक माला में पिरोते हैं भगवान शिव, जैसे मजबूत सूत्रधार। शिव जिनकी अपनी निजी महत्त्वाकांक्षा नहीं, परिवार की रुचि ही उनको मन भाती है। वो दूसरे के लिए विष पीने को तैयार हैं, स्वभाव इतना सरल कि भस्मासुर तक को वरदान दे दे और क्रोध इतना कि तीसरा नेत्र खोले तो तीन लोक भस्मीभूत हो जाएं। शिव अपने परिवार के सभी सुख-सुविधाएं उपलब्ध करवाते हैं, परन्तु खुद मृगचरम में जीवन व्यतीत करते, रूखा-सूखा खाकर गुजारा करते हैं।

मीठे फल परिवार को और भांग, धतूरा व आक का सेवन खुद करते हैं। परिवार के सदस्यों की इतनी चिन्ता की अपनी शादी में रूठ जाने पर नन्दी बैल की भी लिलावरी करते दिखते हैं। परिवार के मुखिया को शिव की भान्ति जीवन जीने की कला आनी चाहिए। वह अपने परिवार की इच्छा पर अपनी इच्छा हावी न होने दें, संकट आए तो उससे निपटने को तैयार रहें और सभी की सुने-मानें परन्तु व्यवहार धमार्नुसार करें।

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शिव परिवार के विभिन्न विचारों वाले मोतियों को एक माला में पिरोते हैं भगवान शिव, जैसे मजबूत सूत्रधार। - फोटो : mahashivratri 2020

शिव परिवार हमारे परिवार तक ही सीमित नहीं होना चाहिए वरन् हमारे देश में विभिन्न धर्मों, पन्थों, सम्प्रदायों, जाति और विविधताओं के बीच एकता व सन्तुलन शिव परिवार की तरह जरूरी है। समाज में अलग-अलग आस्थाओं, विभिन्न रुचियों, स्वभाव, गुण-दोष के लोग निवास करते हैं। हमें किसी पर अपनी मर्जी या विचार थोपने का प्रयास नहीं करना चाहिए बल्कि इन विविधताओं को प्रेम के धागे में पिरो कर एक ऐसे कण्ठाहार का निर्माण करना चाहिए जो देश व समाज की शोभा बढ़ाए।

सर्वमान्य और सर्वोचित निर्णय ठण्डे दिमाग से ही लिए जा सकते हैं, यह शिव परिवार बताता है। महाशिव के मस्तक पर चन्द्रमा और गंगा का होना इस बात का संकेत है कि मस्तिष्क को सदा शीतल रखो। चन्द्रमा और गंगाजल दोनों में असीम शीतलता है। घर हमेशा ठण्डे दिमाग से ही चलते हैं। गणेश जी के शरीर से बड़ा सिर बताता है कि शक्ति से बुद्धि बड़ी, उनके बड़े कान कहते हैं कि सुनने की शक्ति विकसित करो।

सन्युक्त परिवार भारतीय संस्कृति के आधार हैं। संस्कृति का विकास पुस्तकें पढ़ने या शिक्षा के पाठ्यक्रमों से नहीं बल्कि परिवारों में होता है। बच्चे को जीवन जीने का ढंग दादा-दादी की वह सरल-सुन्दर कहानियां सिखाती हैं जो रात के समय एक ही खाट पर सोते हुए सुनाई जाती हैं।

होली-दीवाली के दिन घर में होने वाली चहल-पहल व पकने वाले पकवान, होने वाली पूजा-पाठ को देख कर बच्चे रामायण व महाभारत की कथाएं कब कण्ठस्थ कर जाते हैं पता भी नहीं चलता। परिवार ही वह जगह है जहां व्यक्ति को जीवन जीने की हर सुविधा, अवसर व साधन मिलते हैं।

हमारे समाज में जो सामाजिक आचार-विहार प्रचलित है, जिसे हम भारतीय संस्कृति कहते हैं वह संयुक्त परिवारों की ही देन है। शिवरात्रि हमारे परिवार में एकता, प्रेम, स्नेह, त्याग की भावना का संचार कर सकता है और आपका कुटुम्ब समाज व देश की उन्नति का पथप्रदर्शक बने इन्हीं शुभकामनाओं के साथ, हर-हर महादेव।
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें  blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

 

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