कभी पानी की बूंद-बूंद को मोहताज़ रहे गांव में लहलहा रहींं फसलें
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‘पानी‘ प्रकृति के उन अमूल्य उपहारों में से एक है जिसके बगैर जीवन की कल्पना संभव नहीं है, इसीलिए जल जीवन का पर्याय है। जल के महत्व को बताते ऐसे ढेरों वाक्य आप सभी ने जिंदगी में कभी न कभी पढ़े, कहे, सुने और लिखे होंगे, लेकिन जीने वाले लोग दुनिया में विरले हैं, जिनकी आंखों का पानी अब तक मरा नहीं है। शायद इसीलिए मरामाधो के ग्रामीणों की हिम्मत और हौसले के सामने किस्मत ने भी घुटने टेक दिए। आज आलम ये है कि कभी पानी की एक-एक बून्द को मोहताज़ रहे इस गांव में मेहनत की फसलें लहलहा रही हैं।
दरअसल, सागर जिले की आदिवासी बाहुल्यता वाली केसली जनपद पंचायत की एक ऐसी ही ग्राम पंचायत मरामाधो है, जहां के 2 हजार 246 लोगों ने अपनी मेहनत के बलबूते और सरकारी पहल के बल पर अपने पंचायत क्षेत्र को सिंचित बना लिया है। इसका सुखद परिणाम ही है कि कभी बारिश के चार माह बाद भी पानी को तरसने वाले ग्रामीण अब जल संकट से छिड़ी जंग को लगभग जीत चुके हैं।
• घाटे का सौदा साबित हो रही थी कृषि
ग्रामीणों की आय का मुख्य जरिया कृषि है, जो कि गहराते जल संकट के कारण घाटे का सौदा साबित होने लगी थी। ग्राम पंचायत मरामाधो के तहत आने वाले पठा कला, देवरी कला और देवरी खुर्द गांवों में किसान बारिश के भरोसे ही रह कर किसानी किया करते थे। इन हालात में कुछेक किसानों को छोड़ बाकी के किसान रबी की फसल न के बराबर ही ले पाते थे। हालात यह थे कि लगातार गहराते जल संकट ने किसानों को उनके मुख्य व्यवसाय कृषि से दूरी बनाने के लिए बाध्य कर दिया था।
• ऐसे शुरू हुई ‘जल की खेती‘
केसली जनपद पंचायत के अध्यक्ष अतुल डेवाड़िया बताते हैं कि जल संकट से निपटने के लिए केंद्र व राज्य सरकारें जल संरक्षण की दिशा में सराहनीय पहल कर रही हैं। जल संरक्षण पर चर्चा करते हुए सूबे के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जल संकट और सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए ‘जल की खेती‘ का संदेश भी दिया। जल संकट का सामना कर रही मरामाधो ग्राम पंचायत में सरकारी योजनाओं की सहायता से ‘जल की खेती‘ करनी शुरू की गई और अब इसके सकारात्मक परिणाम दिख रहे हैं।
• खेत व सार्वजनिक तालाबों का निर्माण
बरसात के पानी को रोकने के लिए ग्राम पंचायत मुख्यालय मरामाधो सहित देवरी कलां, देवरी खुर्द और पठा कला में साल 2018-19 में 12 खेत तालाबों सहित मनरेगा योजना के तहत तीन सार्वजनिक तालाबों का निर्माण कराया गया। वहीं एक अन्य तालाब का निर्माण जनभागीदारी से वर्ष 2019-20 में भी कराया गया। साल 2018-19 में दो तालाबों का भी जीर्णोंद्धार किया गया। साथ ही ‘मुख्यमंत्री सरोवर‘ योजना के तहत भी एक बांध निर्माण कार्य पूरा हुआ है।
• कूप खुदाई व जीर्णोंद्धार
इन तीन वर्षों में कपिल धारा योजना के माध्यम से 40 कुंए खोदे गए। वहीं जल संरक्षण के एक अन्य कार्यक्रम ‘निर्मल नीर‘ के तहत भी दो कूपों का खनन करवाया गया। इसके अलावा ग्राम पंचायत में पहले से मौजूद कुंओं में से पांच का जीर्णोंद्धार भी किया गया। ग्राम पंचायत स्तर पर सरकारी हैंडपंपों के पास रिचार्ज सिस्टम बनाने के भी कार्य आरंभ है।
• स्टॉप डेम व बोरी बंधान
ग्राम पंचायत की सीमा से गुजरने वाली सुनार नदी के जल को लंबे समय तक रोके रखने के लिए 9 स्टाॅप डेम निर्मित किए गए हैं। इन स्टाॅप डेमस के माध्यम से रोके गए नदी के पानी से किसान फसलों की सिंचाई आसानी से कर सकते हैं। बरसाती नालों के पानी को रोककर उससे जलस्तर बढ़ाने के लिए बोरी बंधान के कार्य भी किए गए हैं। बारिश के पानी की प्रत्येक बूंद को बचाने के लिए ग्राम पंचायत में लूज बोल्डर संरचना के 42 और गेबियन संरचना के 11 कार्य किए गए हैं।
• केंद्र सरकार ने थपथपाई पीठ
केंद्र सरकार के जल शक्ति मंत्रालय ने जल संरक्षण के उद्देश्य से ‘जलाभिषेक अभियान‘ शुरू किया है। करीब तीन वर्ष तक जल संरक्षण के क्षेत्र में काम करने के बाद ग्राम पंचायत की 90 हेक्टेयर से अधिक भूमि सिंचिंत रकवे में आने लगी है। जल संरक्षण के क्षेत्र में ग्राम पंचायत वासियों के साथ ही शासन और प्रशासन की मेहनत का ही परिणाम जल शक्ति मंत्रालय के ‘राष्ट्रीय पुरस्कार‘ के रूप में मरामाधो को मिला है। इससे पूर्व में ग्राम पंचायत को ‘स्वच्छता मिशन‘ के तहत भी केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह एक कार्यक्रम में पुरस्कृत कर चुके हैं।
• अब भू-समतलीकरण की पहल
जल संकट से उबरने के बाद मरामाधो में शुरू किए गए भू-समतलीकरण कार्य के बारे में जानकारी देते हुए केसली जनपद पंचायत की मुख्य कार्यपालन अधिकारी पूजा जैन बताती हैं कि आदिवासियों को वन भूमि अधिकार अधिनियम के तहत जमीन के पट्टे प्रदान किए गए हैं। हालांकि वन भूमि काफी उबड़-खाबड़ और पथरीली होने से इस पर कृषि करना कठिन है। ऐसे में वन भूमि को समतल कर कृषि योग्य बनाने के लिए मनरेगा योजना के तहत भू-समतलीकरण का कार्य किया जा रहा है।
• अब गांव की 245 एकड़ जमीन पर होगी खेती
सरपंच माखन अहिरवार बताते हैं कि ग्राम पंचायत क्षेत्र में अब तक भू-समतलीकरण से करीबन 15 हितग्राही लाभान्वित हुए हैं और इस कार्य के तहत 45 एकड़ जमीन को सुधारा जा चुका है। सचिव अजय सिंह सोलंकी बताते हैं कि भूमि सुधार के 75 काम जारी हैं, जिनके पूरा होते ही अनुमानित 225 एकड़ भूमि पर कृषि की जा सकेगी।
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