फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Columns ›   Blog ›   madhya pradesh politics Will Shivraj Singh Chouhan return as chief minister

मध्य प्रदेश: कौन बनेगा राज्य का सीएम? क्या फिर कमान संभालेंगे शिवराज?

Sat, 21 Mar 2020 03:13 PM IST
Satish Alia सतीश एलिया
Updated Sat, 21 Mar 2020 03:13 PM IST
विज्ञापन
madhya pradesh politics Will Shivraj Singh Chouhan return as chief minister
क्या शिवराज सिंह चौहान फिर बनेंगे सीएम? - फोटो : SELF

मध्य प्रदेश की 14 माह पुरानी गैर कांग्रेसी विधायकों के टेके पर टिकी और कांग्रेस के सिंधिया गुट के 22 विधायकों के इस्तीफों के धमाके से गिरी कमलनाथ सरकार के बाद बनने जा रही 230 सदस्यों वाली मप्र विधानसभा में महज 107 विधायकों वाली भाजपा सरकार का मुख्यमंत्री कौन होगा? और सरकार कितनी टिकाऊ होगी? यह सवाल समूचे प्रदेश में इस वक्त कोरोना वायरस के संकट पर से ज्यादा चर्चा में हैं।
विज्ञापन


कोरोना संकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के देश को संबोधन को दरकिनार रखकर उत्साह में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के आवास पर शुक्रवार रात आयोजित कर लिया गया विधायकों का कमलनाथ सरकार का पतन उत्सव रात्रिभोज भले रद्द करना पड़ा हो, लेकिन सरकार बनाने की रणनीति दिल्ली, ग्वालियर और भोपाल में जारी है।
विज्ञापन


ज्योतिरादित्य सिंधिया की कांग्रेस से बगावत को 53 साल पहले 1967 में उनकी दादी विजयाराजे सिंधिया की तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारका प्रसाद मिश्र के खिलाफ तख्तापलट का इतिहास दोहराना बताया जा रहा है, लेकिन यह बगावत होते हुए भी उस तख्तापलट से भिन्न है। यानी अभूतपूर्व है। विजयाराजे सिंधिया ने कांग्रेस विधायक दल का विभाजन कर संयुक्त विधायक दल बनाया था जिसकी नेता वे खुद बनीं थीं, लेकिन सदन की नेता होने के बावजूद मुख्यमंत्री नहीं बनीं बल्कि कांग्रेस के बागी गोविंद नारायण सिंह को मुख्यमंत्री बनवाया था।
विज्ञापन
विज्ञापन


वे संविद सरकार के मुख्यमंत्री बने थे और श्रीमती सिंधिया का इस त्याग के लिए आजीवन और मरणोपरांत भी अगाध सम्मान बरकरार है। उनके पोते ज्योतिरादित्य सिंधिया ने भाजपा ज्वाइन की और उनके समर्थक 22 विधायक जिनमें छह मंत्री भी शामिल थे, कमलनाथ सरकार के खिलाफ सिंधिया के साथ डटे रहे। वे सब अब पूर्व विधायक हैं। प्रदेश में अब भाजपा की सरकार बनना तय है, जिसका भविष्य 24 सीटाें पर होने वाले उपचुनाव के नतीजे पर निर्भर होगा। संविद सरकार के मुख्यमंत्री गोविंद नारायण सिंह 20 महीने ही मुख्यमंत्री रहे थे, और कांग्रेस फिर सत्ता में लौटी थीं, राजा नरेश चंद्र सिंह मुख्यमंत्री बनाए गए थे।   
 

madhya pradesh politics Will Shivraj Singh Chouhan return as chief minister
कमलनाथ और दिग्विजय सिंह - फोटो : Social Media (सांकेतिक)

अब तक  ग्वालियर अंचल से अकेले दिग्विजय बने मुख्यमंत्री
मप्र के अब तक के 64 साल के इतिहास में ग्वालियर चंबल अंचल अकेला ऐसा क्षेत्र है जहां से एक ही  नेता मुख्यमंत्री पद तक  पहुंचा। वे हैं दिग्विजय सिंह। वे ग्वालियर संभाग के गुना जिले के राघौगढ़ के हैं और सिंधिया रियासत यानी ग्वालियर स्टेट के तहत छोटी सी रियासत के पूर्व राजा हैं, ठीक वैसे ही जैसे सिंधिया उनके समर्थकों के लिए श्रीमंत, महाराजा या महाराज हैं।   

छत्तीसढ़, मालवा, निमाड़, विंध्य, महाकौशल और मध्य क्षेत्र से मुख्यमंत्री बने हैं। 
छग से पहले मुख्यमंत्री रविशंकर शुक्ल और उनके पुत्र श्यामाचरण शुक्ल के अलावा मोतीलाल वोरा, मालवा से कैलाशनाथ काटजू,  प्रकाशचंद्र सेठी,  कैलाश जोशी, वीरेंद्र कुमार सखलेचा, सुंदरलाल पटवा, राजा नरेशचंद्र सिंह, विंध्य से गोविंद नारायण सिंह, अर्जुन सिंह, मध्य क्षेत्र से बाबूलाल गौर, शिवराज सिंह चौहान,  बुंदेलखंड से उमा भारती, निमाड़ से भगवंत राव मंडलोई् और महाकौशल से  द्वाराप्रसाद मिश्र और कमलनाथ मुख्यमंत्री बने थे। हालांकि कमलनाथ की तरह डीपी मिश्रा, रविशंकर शुक्ल और काटजू मप्र में नहीं जन्मेंं थे।

यूं ये तीन पीढ़ी का संघर्ष
डीपी मिश्रा का संघर्ष जवाहरलाल नेहरू से था, लेकिन वे उनकी बेटी इंदिरा गांधी के प्रिय पात्र बन गए थे। डीपी मिश्रा और विजयाराजे सिंधिया के टकराव के नतीजे में मिश्रा की सरकार गई थी और गोविंद नारायण सिंह संविद सरकार के मुख्यमंत्री बने थे। डीपी मिश्रा के राजनीतिक शिष्य अर्जुन सिंह ने कांग्रेस में विजयराजे सिंधिया के पुत्र माधवराव सिंधिया को कभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नहीं बनने दिया।

अर्जुन के राजनीतिक पट्ट शिष्य दिग्विजय सिंह ने माधवराव सिंधिया के पुत्र ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भी लगभग वही हालात पैदा कर दिए। डीपी मिश्रा के पुत्र बृजेश मिश्र  तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के प्रधान सलाहकार रहे। इधर सिंधिया परिवार की तीसरी पीढ़ी नेहरू परिवार की तीसरी-चौथी पीढ़ी के बरअक्स खड़ी होकर भाजपा में  चुकी है।

व्यापमं से लेकर हनी ट्रैप तक प्रेतछाया 
कांग्रेस के 14 माह के कमलनाथ सरकार के संक्षेपकाल में हनी ट्रैप कांड और भूमाफिया तथा सहकारी सोसाटियों के घोटालेबाजों के बेनकाब होने के सिलसिले ने भाजपा में कई बड़े चेहरों को न केवल असहज किया बल्कि वे चेहरा बचाने और रास्ते खोजने को मजबूर हुए। इनमें सत्ता साकेत के लख्ते जिगर रहे ब्यूरोक्रेटस भी शामिल थे। इन मामलों का जिक्र नई सरकार और उसके मुखिया के चयन और उसके बाद इन मुद्दों के फिर सियासत की आग में सुलगने के सवालों पर चर्चा में आ ही रहे होंगे।

कैसे सधेगा संतुलन 
देखना ये है कि एक किसिम की अल्पमत सरकार बनाने, राज्यसभा उपचुनाव जीतने और अभूतपूर्व तरीके से 24 विधानसभा सीटाें पर उपचुनाव की रणनीति के बीच जातीय और क्षेत्रीय संतुलन किस तरह साधेगी भाजपा। वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष ब्राम्हण विष्णुदत्त शर्मा भी मूलत: चंबल क्षेत्र के हैं, भले ही वे बुंदेलखंड के खजुराहो से सांसद हों।

बुंदेलखंड के ही ब्राम्हण गोपाल भार्गव नेता प्रतिपक्ष रहने के बाद अब किस भूमिका में होंगे, यह विचारणीय होगा। 2018 के विधानसभा चुनाव में तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान का आरक्षण के समर्थन में माई का लाल बयान भी भाजपा के विपरीत जाने वाला एक बड़ा फैक्टर माना जाता रहा है।

भाजपा के सामने सवाल ओबीसी शिवराज सिंह चौहान की ही तरह इसी वर्ग की उमा भारती के संतुलन का भी होगा। अभी प्रहलाद पटेल मोदी सरकार में मंत्री हैं और वे उसी लोधी जाति के हैं जिसकी उमा भारती हैं और उप्र के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह हैं। जातीय संतुलन और समीकरण ही उप्र में भी भाजपा के ताकतवर बनने का मूल मंत्र रहे हैं। हो सकता है मप्र में यह समीकरण भी भविष्य के मद्देनजर साधे जाने पर मंथन चल रहा हो। मुख्यमंत्री के अलावा मंत्रिमंडल में भी यही मंथन होगा। संभव है नई मंत्रिपरिषद छोटी ही रखी जाए, उपचुनाव तक। एक दर्जन या सवा दर्जन ही संख्या रहे।          

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed