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राम का एक ही चेहरा है: जिस आदमी ने एक चेहरा पा लिया, वह राम हो गया

Thu, 02 Oct 2025 07:11 AM IST
शिवम गर्ग आचार्य रजनीश
आचार्य रजनीश Published by: शिवम गर्ग Updated Thu, 02 Oct 2025 07:11 AM IST
सार

राम का एक ही चेहरा है। सुख में, दुख में, महल हो या जंगल में, उनके चेहरे में भेद नहीं। और जिस आदमी ने एक चेहरा पा लिया, वह राम हो गया।

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Lord Ram has only one face The man who has found one face becomes Ram
राम जी - फोटो : adobe stock

विस्तार

हम या तो रावण हो सकते हैं या राम, मध्य में होने का कोई उपाय नहीं। हमारे मन की तकलीफ यह है कि यह तो हम भी समझते हैं कि राम हम नहीं हैं, मगर यह अहंकार को चोट देती है कि तो फिर रावण ही बचते हैं, वह मानने को मन राजी नहीं होता। मन कहता है, माना कि राम नहीं हैं, क्योंकि इतनी घोषणा करनी भी जरा मुश्किल मालूम पड़ती है। चारों तरफ लोग जानते हैं कि राम हम नहीं हैं, किसके सामने घोषणा करें? लोग सिर्फ हंसेंगे। तो राम तो हम होने को नहीं कह पाते। कहना तो चाहते हैं, कह नहीं पाते, वास्तविक कठिनाइयां हैं, लेकिन रावण मानने का भी मन नहीं होता। तो बीच का मार्ग हम खोज लेते हैं। अगर रावण के व्यक्तित्व को समझें, तो पाएंगे कि तुम मध्य में तो हो ही नहीं सकते, छोटे या बड़े रावण हो सकते हो।

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रावण में ऐसा क्या है, जो हममें नहीं? इसे समझें। रावण में साम्राज्य विस्तार की आकांक्षा है, लेकिन वह बड़ा विद्वान और शास्त्रों का ज्ञाता भी है। रावण के गुणधर्मों में ऐसा कौन-सा है, जो हम खुद में न पाएं।
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रावण धन का दीवाना है, इसलिए उसकी स्वर्ण की नगरी है। फिर भी दूसरे का धन, दूसरे का राज्य उसे आकर्षित करता है। राम की अयोध्या सोने की नहीं है, फिर भी राम को दूसरे की किसी चीज या राज्य में कोई रस नहीं है। राम जैसी चेतना का व्यक्ति झोपड़े में रहे, तो भी महल आकर्षित नहीं करता। राम जैसा व्यक्ति जहां भी रहे, वहीं महल है। रावण जैसा व्यक्ति जहां भी रहे, वहीं दुख है। रावण के दस सिर कहे हैं हमने। हर आदमी के दस सिर हैं। क्योंकि हमको कई चेहरे तैयार रखने पड़ते हैं, सुबह से शाम तक कई दफे बदलने पड़ते हैं।  
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राम का एक ही चेहरा है। सुख में, दुख में, महल हो या जंगल में, उनके चेहरे में भेद नहीं। और जिस आदमी ने एक चेहरा पा लिया, वह राम हो गया। यानी उसका चेहरा प्रामाणिक हो गया, जिसका चेहरा भीतरी हो गया, जो बाहर को देखकर चेहरे नहीं बदलता।  उसका होना थिर हो गया है। इसी थिरता का नाम राम है। रावण को मारना इसीलिए मुश्किल हुआ कि असली चेहरे का पता ही नहीं है, झूठ के चेहरे को काट भी दो, तो कोई फर्क नहीं पड़ता, न वहां रक्त है, न मांस है, वह सिर्फ एक ख्याल था, उसे काट दिया, तो आप तुरंत दूसरा पैदा कर लोगे।

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