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लोहिया का समाजवाद और आजम खां का बयान, कहीं बड़ी सियासी भूल तो नहीं कर गए अखिलेश?

Tue, 16 Apr 2019 02:07 PM IST
Sonu Yadav सोनू यादव
Updated Tue, 16 Apr 2019 02:07 PM IST
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लोकसभा चुनाव में नेताओं के बीच एक दूसरे पर शर्मिंदगी की हद तक छींटाकशी का दौर जारी है। - फोटो : अमर उजाला

लोकसभा चुनाव में नेताओं के बीच एक दूसरे पर शर्मिंदगी की हद तक छींटाकशी का दौर जारी है। सबसे ज्यादा चर्चा रामपुर सीट से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार आजम खां के भाजपा कैंडिडेट जयाप्रदा पर दी गई टिप्पणी को लेकर है। एक महिला उम्मीदवार पर सपा नेता का यह बयान इतना वाहियात और शर्मसार कर देने वाला था कि चुनाव आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए उनके चुनाव प्रचार पर 72 घंटों का प्रतिबंध लगा दिया। 

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बहरहाल, पुरुषों के आधिपत्य वाले भारतीय समाज में महिलाओं की स्थिति हमेशा से ही दयनीय रही है। एक दौर वो भी था जिसे आप अराजक कह सकते हैं, उस दौर में स्त्री सिर्फ उपभोग की वस्तु की ही तरह देखी जाती थी, लेकिन बदलते समय के साथ आज भी ये मानसिकता कुछ खास परिवर्तित नहीं हो पाई है। आज भी बहुत से लोग स्त्री को सिर्फ एक वस्तु की ही तरह देखते हैं जिसका वे मनचाहा प्रयोग कर सकते हैं और इस मसले में वो लोग भी पीछे नहीं है जिनके हाथ में हम देश और समाज के भविष्य की बागडोर सौंपने से भी नहीं हिचकते हैं। मौजूदा लोकसभा चुनाव में नेताओं की एक दूसरे पर बयानबाजी और टीका टिप्पणी उसी जमाने की याद दिलाती है। 
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जया प्रदा पर आजम खान का बयान हर पार्टी के नेता को शर्मसार कर गया। - फोटो : अमर उजाला

लोहिया के समाजवाद को शर्मिंदा करते आजम खां 
कहने को तो आजम खान समाजवादी आंगन में लोहिया जी के रोपे समाजवाद रूपी वृक्ष की छांव में किलकारियां मारते रहे हैं, लेकिन आजम की मानसिकता उस समाजवाद से रत्ती भर भी मेल नहीं खाती है जिसको लोहिया जी ने बड़ी जतन से पाल-पोसकर बड़ा किया। हालांकि आजम के बेहूदे बयानों से जन्म-जन्मांतर का नाता है लेकिन रविवार को जब उनके मुख़ारबिंदु से जयाप्रदा के लिए- "रामपुर वालों, उत्तर प्रदेश वालों, हिंदुस्तान वालों... ! उसकी असलियत समझने में आपको 17 बरस लग गए।  मैं 17 दिन में पहचान गया कि..! 

उपरोक्त वाक्य निकले तो यकीनन लोहिया जी का समाजवाद शर्मिंदा हो रहा होगा। समाजवादी पार्टी खुद को उन्ही लोहिया के आदर्शों और सिद्धांतो पर चलने वाली पार्टी बताती है जिन्होंने राजनीति में शुचिता लाने के लिए अपनी ही पार्टी की सरकार से इस्तीफ़ा मांग लिया था क्योंकि उस सरकार ने आंदोलनकारियों पर गोलियां चलवा दी थीं।

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समाजवादी पार्टी ने आजम खां पर कोई कार्रवाई नहीं की। - फोटो : अमर उजाला

लोहिया के समाजवादी आदर्शवादी 
लोहिया जी कहा करते थे “हिंदुस्तान की राजनीति में तब सफाई और भलाई आएगी जब किसी पार्टी के खराब काम की निंदा उसी पार्टी के लोग करें।”अब आज  ख़ुद की जबान पर कंट्रोल न रख पाने वाले आजम से से इस्तीफ़ा कौन समाजवादी मांगेगा, कौन समाजवादी निंदा करेगा उस बयान की जो गोली से ज्यादा मारक क्षमता से लैस था और देश कि आधी आबादी (महिला) के विरुद्ध दिया गया है।

खंडन तक नहीं किया अखिलेश यादव ने 
बेशर्मी कि हद तब हो गई जब 24 घंटे से ज़्यादा वक्त गुजरने के बावज़ूद पार्टी ने अपने इस जरूरत से ज़्यादा लंबी जबान वाले नेता के बयान का न तो खंडन किया और न ही पार्टी की तरफ से कोई स्पष्टीकरण दिया गया। इसके उलट महिला सम्मान पर बड़े-बड़े लेख छापने वाले समाजवादी बुद्धिजीवी आजम के बचाव में तमाम कुतर्क गढ़कर आजम को पाक साफ़ बताते नज़र आए और तरह-तरह के कुतर्कों के साथ उनके बचाव करने में वो खुद उन्ही की जबान बोलते दिखे और साबित कर दिया की समाजवाद की एक अलग दुनिया है जहां लोहिया के सिद्धांत और दर्शन चिंतन सिर्फ चुनावी घोषणा पत्र, लच्छेदार भाषणों, लाल टोपी, मंच, स्टेज पर ही मिलता है बाकि समय वो पार्टी कार्यालय की मेज की दराज़ में रखे रहते हैं। 

अखिलेश की भूल 
क्या समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव और पितामह मुलायम सिंह यादव को आजम खां पर कार्रवाई नहीं करनी थी? क्या आजम खां के बयान के बाद एक बार भी अखिलेश यादव ने नहीं सोचा होगा कि जयाप्रदा पर दिया गया बयान किसी भाजपा प्रत्याशी से पहले एक महिला पर दिया गया था बयान था और जिस समाजवादी आदर्शों और सपनों  को वह जनता के बीच दिखाते हैं वह उसी का अपमान था। अखिलेश चाहते तो आजम खां पर कार्रवाई करके एक मिसाल कायम करते और यूपी में महिलाओं के प्रति एक नैतिक दृष्टिकोण की स्थापना कर सकते थे। यह एक बड़ा सियासी मौका भी होता, लेकिन अखिलेश ने ऐसा  कुछ नहीं किया। यहां तक की पार्टी प्रवक्ताओं की जुबान भी बंद रही। 

काश लोहिया के विचार इन समाजवाद के ध्वजवाहकों के सार्वजनिक जीवन में भी आ जाए। 
 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.

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