Loksabha Election 2024: पश्चिम बंगाल में चुनौतियां कम नहीं होंगी भाजपा के लिए, पहले चरण में ही साख दांव पर
टीएमसी ने यहां जगदीश चंद्र बसुनिया को मैदान में उतारा है। इन दोनों के बीच अबकी कड़ी टक्कर की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक ही दिन कुछ घंटे के अंतराल पर इलाके में चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुकी हैं। इससे इस सीट की अहमियत समझ में आती है।
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पश्चिम बंगाल में पहले चरण में जिन तीन सीटों पर मतदान होना है वहां भाजपा की साख दांव पर है। इसकी वजह यह है कि पिछले चुनाव में उसने यह तीनों जलपाईगुड़ी, कूचबिहार और अलीपुरदुआर सीटें जीती थी। इस बार पार्टी के सामने उन पर कब्जा बरकरार रखने की चुनौती है। वैसे, भी उत्तर बंगाल इलाके को भगवा पार्टी का मजबूत गढ़ माना जाता है।
वर्ष 2019 में पार्टी ने इलाके की आठ में में से सात सीटें जीती थी जिनमें से छह सीटें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित है। इस बार सीधे मुकाबले में तृणमूल कांग्रेस ने भाजपा से इन सीटो को छीनने के लिए कमर कस ली है। लेकिन इन तीनों सीटों पर भाजपा मामूली बढ़त की स्थिति में है। दिलचस्प बात यह है कि इन तीन सीटों के लिए जो 37 उम्मीदवार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं उनमें से दस करोड़पति हैं। इनमें से खासकर कूचबिहार सीट सबसे अहम है।
दरअसल, पिछली बार यहां जीते भाजपा के निशीथ प्रामाणिक फिलहाल केंद्रीय गृह राज्यमंत्री हैं और इस बार भी वह मैदान में हैं। लेकिन हाल के दिनो में यह इलाका भाजपा और तृणमूल कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पों के कारण सुर्खियों में रहा है। राज्य सरकार के मंत्री उदयन गुहा के साथ उनका छत्तीस का कड़ा है।
टीएमसी ने यहां जगदीश चंद्र बसुनिया को मैदान में उतारा है। इन दोनों के बीच अबकी कड़ी टक्कर की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी एक ही दिन कुछ घंटे के अंतराल पर इलाके में चुनावी रैलियों को संबोधित कर चुकी हैं। इससे इस सीट की अहमियत समझ में आती है।
इस इलाके के जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए ही भाजपा ने अनंत राय महाराज को अपना राज्यसभा उम्मीदवार बनाया था। वे पार्टी के टिकट पर ऊपरी सदन में पहुंचने वाले राज्य के पहले व्यक्ति हैं।
अनंत महाराज उस ग्रेटर कूचबिहार पीपुल्स एसोसिएशन के एक गुट के प्रमुख हैं जो बंगाल और असम के सीमावर्ती इलाके को मिलाकर अलग केंद्र शासित प्रदेश की स्थापना की मांग करता रहा है। वो करीब 40 लाख की आबादी वाले कोच-राजबंशी समुदाय के हैं जो इलाके में निर्णायक हैं।
कूचबिहार से सटी जलपाईगुड़ी सीट पर टीएमसी उम्मीदवार निर्मल कुमार राय का मुकाबला भाजपा के जयंत कुमार राय से है। इस संसदीय इलाके में दलितों और आदिवासियों की भरमार है। ज्यादातर चाय बागान भी इसी इलाके में हैं। पिछली बार जयंत राय ने करीब 1.85 लाख वोटों के अंतर से यहां जीत हासिल की थी।
भाजपा की ताकत की काट के तौर पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राजबंशी समुदाय के लिए कई योजनाओं की शुरुआत की है। इनमें राजबंशी समुदाय के लिए अलग प्राथमिक स्कूलों की स्थापना और समुदाय के समाज सुधारक पंचानन बर्मा की जयंती पर सरकारी अवकाश की घोषणा करना शामिल है। ममता ने चाय बागान मजदूरों की मांगों पर विचार करने और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने का भी भरोसा दिया है।
भाजपा ने अलीपुरदुआर सीट पर अपने पिछले विजेता और केंद्रीय मंत्री जॉन बारला की जगह पार्टी के जिला प्रमुख मनोज तिग्गा को मैदान में उतारा है। इससे पार्टी में कुछ असंतोष है। बारला इस बार भी टिकट की आस लगाए बैठे थे। टीएमसी यहां इसी असंतोष को भुनाने का प्रयास कर रही है।
तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर बीते पांच वर्षों के दौरान अपनी स्थिति कुछ मजबूत की है। पार्टी के राज्यसभा सदस्य प्रकाश चिक बारिक की इलाके के चाय बागान मजदूरों पर खासी पकड़ है।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इलाके में गोरखा, कोच-राजबंशी और कामतापुरी जैसे जातीय समूहों के समर्थन ने भाजपा के पैरों तले की जमीन को मजबूत बनाया है। भाजपा वर्ष 2009 से ही गोरखा समुदाय के समर्थन से दार्जिलिंग सीट जीतती रही है।
जहां तक मुद्दों का सवाल है पहले दौर में जिन सीटों पर मतदान होना है वहां अलग केंद्रशासित प्रदेश की मांग के अलावा नागरिकता (संशोधन) कानून और चा बागानों और उशके मजदूरो की दुर्दशा ही सबसे बड़ा मुद्दा है। दोनों प्रमुख दावेदार यानी भाजपा और टीएमसी इलाके के विकास के लिए अपनी योजनाओं का जिक्र करते हुए लोगों से समर्थन मांग रहे हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि पहले दौर में भाजपा के सामने इन सीटो को बचाए रखने की चुनौती है। तृणमूल कांग्रेस के पास खोने के लिए कुछ नहीं है। अगर वह इन तीनों में से एक भी सीट भाजपा से छीन लेती है तो इसे उसकी बड़ी कामयाबी माना जा सकता है।
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